Tuesday, March 3, 2026
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किसान की सोच ही प्रदेश की नीति तय करती है, कृषि बजट में नहीं आने दी जाएगी कोई कमी – मुख्यमंत्री

किसान की सोच ही प्रदेश की नीति तय करती हैकृषि बजट में नहीं आने दी जाएगी कोई कमी – मुख्यमंत्री

 

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्री-बजट कंसल्टेशन बैठक में कृषि विशेषज्ञोंएफपीओ और प्रगतिशील किसानों से किया संवाद

 

चंडीगढ़, 15 जनवरी – हरियाणा के समग्र कृषि विकास, किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से वीरवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर बजट-पूर्व परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हितधारकों से आगामी बजट 2026-27 के लिए सुझाव लिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं और जरूरतों को केंद्र में रखकर प्रभावी नीतियां तैयार कर रही है और कृषि क्षेत्र को बजट में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को जीवंत बनाए रखने में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। असली भारत गांवों में बसता है और हरियाणा की पहचान दूध-दही, मेहनतकश किसानों और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है, इसलिए हरियाणा के आगामी बजट में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए विशेष ध्यान रखा जायेगा।

पिछले बजट में किसानों के 99 सुझाव शामिल किए

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह बैठक उनके लिए भावनात्मक रूप से भी विशेष है, क्योंकि वे स्वयं किसान के बेटे हैं और खेती-बाड़ी की कठिनाइयों को नजदीक से समझते हैं। उन्होंने कहा कि अन्नदाता किसान केवल अन्न उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सभ्यता का संवाहक भी है।

मुख्यमंत्री ने पिछली बजट-पूर्व परामर्श बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि 9 जनवरी 2025 को आयोजित बैठक में किसानों और विशेषज्ञों द्वारा 161 बहुमूल्य सुझाव दिए गए थे, जिनमें से 99 महत्वपूर्ण सुझावों को बजट 2025-26 में शामिल किया गया। इन सुझावों के आधार पर सरकार ने कृषि क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और व्यावहारिक निर्णय लिए।

नकली बीज रोकथाम के लिए सरकार ने बनाया कानून

मुख्यमंत्री ने कहा कि नकली बीज की रोकथाम के लिए सख्त कानून बनाने की दिशा में कदम उठाए गए है। मोरनी क्षेत्र के लिए विशेष कृषि एवं बागवानी कार्य योजना तैयार की गई, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं को और सशक्त किया गया तथा मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के अंतर्गत अनुदान राशि बढ़ाई गई, जिससे जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के सुझावों के अनुरूप सभी मंडियों के नवीनीकरण, सभी फसलों के लिए गेट पास प्रणाली लागू करने, प्रत्येक जिले में बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, नए उत्कृष्टता केंद्रों का निर्माण, सभी जिलों में बागवानी मिशन का विस्तार जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

इसके अतिरिक्त पशुधन बीमा योजना के दायरे का विस्तार, सफेद झींगा उत्पादन की लागत कम करने के लिए सोलर तकनीक का उपयोग, मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना, दूध संग्रह केंद्रों की स्थापना, हर-हित स्टोर तथा नए वीटा बूथ स्थापित करने जैसी योजनाओं को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद मिली।

नई तकनीक और अनुसंधान से ही कृषि का भविष्य सुरक्षित

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कृषि वैज्ञानिकों का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर अनुसंधान करें, जिनसे किसानों को कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त हो सके और किसान बदलते समय के साथ आगे बढ़ सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युवा नई तकनीक के साथ खेती करना चाहता है, इसलिए कृषि अनुसंधान को युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप दिशा देना आवश्यक है। उन्होंने वैश्वीकरण के दौर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित आधुनिक कृषि तकनीकों को हरियाणा की कृषि व्यवस्था में अपनाने के लिए ठोस एवं व्यवहारिक योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया।

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए बजट में था 9200 करोड़ रुपये का प्रावधान

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में कृषि एवं संबद्ध विभागों के लिए 9,296 करोड़ 68 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति और नीयत की सफलता तभी मानी जाएगी, जब योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष प्राप्त सुझाव और भी अधिक व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और दूरदर्शी हैं। उन्होंने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनने और उन्हें बजट प्रावधानों में सम्मिलित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए बजट में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने किसानों और हितधारकों से आग्रह किया कि वे आगामी 8 से 10 दिनों के भीतर अपने और सुझाव सरकार के चैटबॉट के माध्यम से साझा करें। उन्होंने कहा कि जब वे विधानसभा में बजट 2026-27 प्रस्तुत करेंगे, तो जिन हितधारकों के सुझाव बजट में शामिल किए जाएंगे, उन्हें बजट भाषण सुनने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा जाएगा, ताकि वे स्वयं इस प्रक्रिया के साक्षी बन सकें।

इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, लोक निर्माण मंत्री श्री रणबीर गंगवा, विधायक श्रीमती सावित्री जिंदल, विधायक श्री रणधीर पनिहार, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ साकेत कुमार, कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज अग्रवाल, पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव श्री विजय दहिया,  कृषि विभाग के महानिदेशक श्री राजनारायण कौशिक,  मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ राज नेहरू, श्री वीरेंद्र बड़खालसा,  मेयर परवीन पोपली सहित अन्य विभागों के अधिकारी और  प्रगतिशील किसान मौजूद थे।

 

हरियाणा में आधुनिक किन्नू जूस प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना होगी: कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा

चंडीगढ़ , 15 जनवरी – हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों के अनुरूप हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन और हरियाणा डेयरी विकास सहकारी संघ (वीटा) मिलकर सिरसा जिले में एक आधुनिक किन्नू जूस प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना करेंगे।

कृषि मंत्री ने बताया कि यह संयंत्र पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत स्थापित किया जाएगा, जिसकी वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता लगभग 22,000 मीट्रिक टन होगी। इस प्लांट में किन्नू के साथ-साथ अमरुद , अनार समेत अन्य फलों का भी प्रसंस्करण किया जाएगा, जिन्हें वीटा ब्रांड के तहत पैक और विपणन किया जाएगा।

श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि तैयार उत्पादों का विपणन “हर -हित” तथा  “वीटा” स्टोर्स के माध्यम से किया जाएगा, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा और बागवानी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह परियोजना विशेष रूप से किन्नू उत्पादक किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और फलों की बर्बादी को कम करने में सहायक होगी।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में “हर -हित” योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष लगभग 200 से 250 स्टोर स्थापित किए जा रहे हैं। भविष्य में इस नेटवर्क का विस्तार करते हुए प्रतिवर्ष 500 से 600 स्टोर स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार आधुनिक कृषि अवसंरचना, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और सशक्त विपणन व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

हरियाणा सरकार ने विभागों को हरियाणा नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड पोर्टल पर ग्रुप-डी   के खाली पदों का विवरण अपलोड करने का निर्देश दिया

चंडीगढ़, 15 जनवरी – हरियाणा सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों को ग्रुप-डी कर्मचारियों के सुचारू समायोजन और पोस्टिंग की सुविधा के लिए हरियाणा नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड पोर्टल पर ग्रुप-डी   के खाली पदों का विवरण तुरंत अपलोड करने का निर्देश दिया है।

मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी एक पत्र में, विभागों को एक सप्ताह के भीतर हरियाणा नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड पोर्टल रिक्विजिशन पोर्टल पर खाली पदों की जानकारी अपलोड करने का निर्देश दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन ग्रुप-डी   कर्मचारियों ने अभी तक ज्वाइन नहीं किया है, उन्हें पोर्टल पर पहले से जमा की गई उनकी पोस्ट प्राथमिकताओं के अनुसार बिना किसी परेशानी के समायोजित या दोबारा पोस्ट किया जा सके।

सरकार ने आगे निर्देश दिया है कि विभागों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत सत्यापित एक प्रमाण पत्र भी अपलोड करना होगा, जो हरियाणा नॉलेज कारपोरेशन लिमिटेड पोर्टल पोर्टल पर अपलोड किए गए ग्रुप-डी   रिक्तियों से संबंधित डेटा की सटीकता और सही होने को प्रमाणित करता हो। नए अनुशंसित ग्रुप-डी   कर्मचारियों की पोस्टिंग संबंधित विभागों द्वारा प्रदान की गई प्रमाणित जानकारी के अनुसार ही की जाएगी।

क्रमांक 2026

 

 

फरीदाबाद ई-नीलामी प्रकरण में एच.एस.वी.पी. को आयोग द्वारा मुआवजा देने के निर्देश

 

चंडीगढ़, 15 जनवरी — हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद में विकास कार्यों की स्थिति से संबंधित एक मामले में यह स्पष्ट किया है कि प्लॉट की ई-नीलामी से पूर्व स्थल पर आवश्यक विकास कार्य पूर्णता अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि आवंटियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि विकास कार्य पूरे होने के उपरांत ही प्लॉट की नीलामी और कब्जा प्रस्तावित किया जाना अपेक्षित है।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ई-नीलामी में शामिल किए जाने वाले प्लॉट्स पर सभी आवश्यक सुविधाओं का उपलब्ध होना आवश्यक है, जिससे आवंटी समय पर निर्माण कार्य आरंभ कर सकें। मामले में यह पाया गया कि दिनांक 24.11.2023 को जारी आवंटन पत्र के साथ कब्जा प्रस्तावित किया गया, जबकि स्थल पर कुछ विकास कार्य शेष थे। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि आवंटन पत्र की शर्त संख्या–5 के अनुसार 30 दिनों के भीतर कब्जा न दिए जाने की स्थिति में ब्याज देय होता है, जिसे नियमों के अनुसार लागू किया जाना चाहिए।

आयोग ने यह अपेक्षा व्यक्त की कि एक सार्वजनिक विकास प्राधिकरण के रूप में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा ऐसे मामलों में ब्याज भुगतान की प्रक्रिया स्वतः और समयबद्ध रूप से अपनाई जानी चाहिए, जिससे आवंटियों को अनावश्यक रूप से किसी मंच पर जाना न पड़े। इस संदर्भ में आयोग ने माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की दिनांक 16.10.2025 की टिप्पणी का उल्लेख किया, जिसमें वैधानिक उद्देश्यों के अनुरूप कार्य प्रणाली अपनाने पर बल दिया गया है।

आयोग ने बताया कि पूर्व में भी समान प्रकृति के मामलों में सभी प्रभावित आवंटियों को नियमों के अनुसार लाभ प्रदान करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। वर्तमान मामले में आयोग ने यह माना कि अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत अधिकतम 5,000 रुपये तक के मुआवजे का ही प्रावधान है।

अतः हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 की धारा 17(1)(ह) के तहत आयोग ने शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये का मुआवजा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं, जिसका भुगतान एच.एस.वी.पी. द्वारा 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यह राशि प्रारंभ में प्राधिकरण द्वारा अदा की जाए तथा नियमानुसार उत्तरदायित्व निर्धारित होने के पश्चात आगे की कार्रवाई की जा सके।

आयोग ने यह स्पष्ट किया कि आवंटी, यदि चाहे, तो अधिक मुआवजे के लिए उपभोक्ता फोरम, माननीय उच्च न्यायालय अथवा अन्य सक्षम प्राधिकरण से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र है। कब्जे के विषय में, अतिक्रमण और कानून-व्यवस्था से संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आयोग ने समाधान की दिशा में शीघ्र आवश्यक कदम उठाने की अपेक्षा व्यक्त की है।

इसके साथ ही आयोग ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में विकास कार्यों की स्थिति सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्लॉट को नीलामी प्रक्रिया में सम्मिलित न किया जाए। प्रकरण की समुचित समीक्षा हेतु आयोग ने मुख्य प्रशासक, एच.एस.वी.पी. से संबंधित फाइल की मूल नोटिंग शीट तथा एस्टेट ऑफिसर, फरीदाबाद से नीलामी, आवंटन और विकास कार्यों से जुड़े अधिकारियों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि प्रक्रियागत सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।

क्रमांक 2026

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