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पंजाब ने ऑटिज़्म और न्यूरो-डेवलपमेंटल केयर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह

पंजाब ने ऑटिज़्म और न्यूरो-डेवलपमेंटल केयर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना महंगे इलाज का प्रभावी विकल्प

स्वास्थ्य मंत्री द्वारा विश्व ऑटिज़्म दिवस के अवसर पर मोहाली में ऑटिज़्म और न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स संबंधी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा

एस.ए.एस. नगर, 2 अप्रैल:

ऑटिज़्म और न्यूरो-डेवलपमेंटल विकारों के लिए बाल विकास और देखभाल सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री, पंजाब डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार मोहाली में ऑटिज़्म और न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स के लिए स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का सक्रिय रूप से समर्थन कर रही है।

यह केंद्र, जिसे वर्ष 2025 में डॉ. बलबीर सिंह द्वारा वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, स्वास्थ्य क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तियों और विषय विशेषज्ञों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से शुरू किया गया था, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और अन्य न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थितियों से प्रभावित बच्चों और वयस्कों के लिए एक ऐतिहासिक पहल है।

इस पहल के महत्व को उजागर करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इन स्थितियों से हजारों बच्चे प्रभावित होते हैं, लेकिन प्रारंभिक पहचान, जांच और उपचार सेवाएं अभी तक सीमित और असमान रही हैं। उन्होंने कहा कि इस केंद्र का उद्देश्य देखभाल सेवाओं का एक संरचित, राज्य-व्यापी मॉडल स्थापित करना है, जो समय पर जांच, उपचार और दीर्घकालिक सहायता सुनिश्चित करेगा, जिसमें व्यावसायिक प्रशिक्षण और करियर मार्गदर्शन भी शामिल है।

जीवन के पहले पांच वर्षों में प्रारंभिक पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने प्रशिक्षित विकास विशेषज्ञों की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया और आश्वासन दिया कि आवश्यक स्टाफ की प्रतिनियुक्ति के माध्यम से इस समस्या का समाधान किया जा रहा है तथा केंद्र को पूरी तरह कार्यशील बनाया जा रहा है।

कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों की कमी और जांच में देरी के कारण बड़ी संख्या में बच्चों में इन स्थितियों का समय पर पता नहीं चल पाता, जिससे प्रारंभिक उपचार के अवसर खो जाते हैं। इस अंतर को दूर करने के लिए यह केंद्र एक ही छत के नीचे समेकित, बहु-विषयक सेवाएं प्रदान करेगा। इनमें न्यूरो-डेवलपमेंटल पीडियाट्रिक्स, बाल एवं किशोर मनोचिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सेवाएं, विशेष शिक्षा, स्पीच और लैंग्वेज थेरेपी, ऑडियोलॉजी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, फिजियोथेरेपी, डेंटल केयर तथा ईएनटी, नेत्र विज्ञान और ऑर्थोपेडिक्स जैसी विशेषज्ञ क्लीनिक शामिल हैं।

इसके अलावा यह केंद्र प्रारंभिक स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक सेवाएं, स्कूल रेडीनेस और समावेशी शिक्षा सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन, माता-पिता प्रशिक्षण, परिवार सशक्तिकरण कार्यक्रम और चिकित्सा पेशेवरों के लिए क्षमता निर्माण पहलों की सुविधा प्रदान करेगा।

इस पहल को केवल उपचार तक सीमित न बताते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह देखभाल सेवाओं की एक व्यापक प्रणाली के विकास का संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे जैसे डब्ल्यूएचओ के पुनर्वास लक्ष्य 2030 और सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी 3 और 3.8) के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य “किसी को भी पीछे न छोड़ना” और सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है।

इस अवसर पर अभिभावकों ने अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताएं व्यक्त कीं और उम्मीद जताई कि यह केंद्र आवश्यक सहयोग और भरोसा प्रदान करेगा।

डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों में ऑटिज़्म और इससे संबंधित विकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक समर्पित वेबसाइट भी लॉन्च की।

इस मौके पर अन्य प्रमुख उपस्थित लोगों में मोहाली के विधायक स कुलवंत सिंह, डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, मोहाली के निदेशक-प्राचार्य डॉ. नवदीप सैनी, पंजाब आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह और डॉ. भगवंत सिंह शामिल थे।

स्वास्थ्य मंत्री ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह रेखांकित किया कि विकास संबंधी चुनौतियों को समय पर देखभाल और सहयोग से प्रभावी ढंग से संबोधित किया जा सकता है। उन्होंने पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज का उल्लेख करते हुए इसे एक और ऐसी पहल बताया और दोहराया कि पंजाब सरकार हर क्षेत्र में उत्कृष्टता के ऐसे केंद्र स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार द्वारा महंगे निजी स्वास्थ्य बीमा के प्रभावी विकल्प के रूप में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना लागू की गई है और इस योजना के बारे में अधिक से अधिक जागरूकता फैलाने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से हृदय संबंधी आपातकालीन सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, जबकि आम आदमी क्लीनिक सुलभ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पंजाब राज्य समाज के सभी वर्गों के लिए एक समान, कुशल, समावेशी और वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणाली स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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