Thursday, February 19, 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर व्यापक चर्चा व राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा आवश्यक: सैलजा

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर व्यापक चर्चा व राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा आवश्यक: सैलजा

 

-कृषि बाजार, ऊर्जा आयात व्यवस्था तथा डेटा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए हैं

 

-देश के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्यों को रखा जाए

 

नई दिल्ली/सिरसा, 19 फरवरी।

 

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर देश में उठ रही चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते का मूल उद्देश्य देशहित, किसान-हित, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल स्वायत्तता की रक्षा होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार समझौते आर्थिक प्रगति के साधन होते हैं, किंतु वे राष्ट्रीय संप्रभुता या जनहित से समझौते की कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकते।

 

मीडिया को जारी एक बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि समझौते के विभिन्न प्रावधानों को देखते हुए किसानों, कृषि बाजार, ऊर्जा आयात व्यवस्था तथा डेटा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि देश के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्यों को रखा जाए ताकि किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों में किसी प्रकार की आशंका न रहे। उन्होंने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि बड़े पैमाने पर शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी जाती है, तो इसका प्रभाव देश के मक्का, ज्वार, सोयाबीन तथा कपास उत्पादक किसानों पर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि घरेलू किसानों की आय और बाजार संरक्षण के लिए क्या ठोस सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

 

ऊर्जा सुरक्षा के विषय में कुमारी सैलजा ने कहा कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा-आयातक देश के लिए कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता बनाए रखना रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता से पहले देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों, मूल्य स्थिरता और रणनीतिक स्वायत्तता का व्यापक आकलन सार्वजनिक किया जाए। डिजिटल क्षेत्र और डेटा प्राइवेसी पर उठ रहे सवालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल संप्रभुता और नागरिकों की निजता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि व्यापार समझौते में इस क्षेत्र से जुड़े प्रावधान हैं तो उन्हें संसद और जनता के सामने स्पष्ट किया जाए।

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