मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एचपीपीसी और एचपीडब्लूपीसी की बैठकों की अध्यक्षता की, इसमें लगभग 40.62 करोड़ रुपये की बचत हुई
मुख्यमंत्री ने बैठकों में मंज़ूर प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के दिए निर्देश
इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क को मज़बूत करने को दी मंज़ूरी
चंडीगढ़, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हरियाणा निवास में हाई-पावर्ड परचेज कमेटी और हाई-पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठकों के दौरान, राज्य के विभिन्न विभागों के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई, और कामों और सेवाओं की खरीद के संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
एचपीपीसी की बैठक में लगभग 133.47 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले कुल 5 टेंडरों पर विचार किया गया। इनमें से एक प्रोजेक्ट में री-टेंडरिंग का आदेश दिया गया। बाकी टेंडरों के लिए, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 123.13 करोड़ रुपये थी, बोली लगाने वालों के साथ विस्तार से बातचीत की गई। बातचीत में इन कामों का अंतिम मूल्य लगभग 105.04 करोड़ रुपये तय किया गया। इस पारदर्शी और प्रभावी बातचीत प्रक्रिया के माध्यम से, राज्य सरकार ने लगभग 18.09 करोड़ रुपये की बचत सुनिश्चित की, जो मज़बूत वित्तीय प्रबंधन और सार्वजनिक संसाधनों के कुशल उपयोग को दर्शाता है।
इसी तरह, एचपीडब्लूपीसी की बैठक में लगभग 491.53 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले कुल 11 टेंडरों पर विचार किया गया। इनमें से तीन टेंडरों को स्थगित/री-टेंडर करने की मंज़ूरी दी गई। बाकी टेंडरों के लिए, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 412.19 करोड़ रुपये थी, बोली लगाने वालों के साथ विस्तार से बातचीत की गई। बातचीत के बाद, इन कामों का अंतिम मूल्य लगभग 389.66 करोड़ रुपये तय किया गया, जिससे लगभग 22.53 करोड़ रुपये की बचत हुई। इस प्रकार, दोनों बैठकों में कुल लगभग 40.62 करोड़ रुपये की बचत हुई।
बैठक में ऊर्जा मंत्री अनिल विज, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा, लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा, सिंचाई और जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी मौजूद थे।
कमेटी ने हरियाणा स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क ऑग्मेंटेशन प्रोजेक्ट के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक नेटवर्क मैनेजमेंट सेंटर्स के लिए पुराने यूपीएस और बैटरी के बायबैक के तहत ऑनलाइन यूपीएस सिस्टम और बैटरी बैंक की सप्लाई और इंस्टॉलेशन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी गई जिसका मकसद राज्य के डिजिटल और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर की विश्वसनीयता और दक्षता को बढ़ाना है।
इसके अलावा, कमेटी ने पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के आईएसआई मार्क वाले सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन की सप्लाई के लिए सालाना रेट कॉन्ट्रैक्ट की व्यवस्था करने के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी गई, जो पानी को कीटाणुरहित करने के लिए इस्तेमाल होने वाला आवश्यक केमिकल है।
अन्य फैसलों में अंबाला, हिसार, भिवानी, फरीदाबाद, पलवल, रेवाड़ी, रोहतक और पंचकूला क्षेत्रों में 220 केवी , 132 केवी और 66 केवी ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण शामिल था।
नूंह जिले के लिए एक बड़े निर्णय के तहत, कमेटी ने पुराने सीएचसी कैंपस में 100 बेड वाले नए जिला अस्पताल के निर्माण को मंज़ूरी दी, जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मंज़ूर प्रोजेक्ट्स को पूरी पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के साथ, तय समय सीमा के अंदर पूरा किया जाए।
क्रमांक 2026
पंचकूला में कुशल बिजनेस चैलेंज (केबीसी)- यूथ स्टार्ट-अप महोत्सव का राज्य स्तरीय शिखर सम्मेलन आयोजित
शिक्षा मंत्री ने राज्य स्तर पर चयनित 66 टीमों को उनके उद्यम के विकास के लिए सरकार की ओर से 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि के चैक किए वितरित
श्री महीपाल ढांडा विद्यार्थियों द्वारा विकसित उत्पादों से हुए प्रभावित, बच्चों की प्रतिभा की करी सराहना
कुशल बिजनेस चैलेंज 2.0 का मूल उद्देश्य कक्षा 11 एवं 12 के विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ उद्यमशीलता का विकास करना
कुशल बिजनेस चैलेंज (केबीसी)-यूथ स्टार्ट-अप महोत्सव का राज्य स्तरीय शिखर सम्मेलन आज पंचकूला स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में 1979 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं भारत के उपराष्ट्रपति के सचिव रह चुके डॉ. आई. वी. सुब्बा राव उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में स्कूली शिक्षा निदेशक श्री जितेंद्र कुमार, प्राथमिक शिक्षा के महानिदेशक श्री विवेक अग्रवाल तथा संयुक्त राज्य परियोजना निदेशक डॉ. मयंक वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह आयोजन समग्र शिक्षा के अंतर्गत हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा एससीईआरटी हरियाणा एवं उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कक्षा 11 एवं 12 के विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ उद्यमशीलता का विकास करना तथा उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम और व्यावसायिक अवधारणाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना है।
शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यार्थियों के स्टॉल्स का भ्रमण किया। उन्होंने प्रत्येक टीम को पूरा समय देते हुए उनके बिजनेस आइडियाज को ध्यानपूर्वक सुना तथा उत्पादों की सराहना की। शिक्षा मंत्री यह जानकर अत्यंत आश्चर्यचकित हुए कि एक टीम ने 40,000 रुपये का व्यवसाय कर 12,000 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को तैयार करने के लिए विशेषकर वोकेशनल अध्यापकों की जमकर प्रशंसा की।
अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि “विकसित भारत की स्थापना की नींव इस कार्यक्रम से रखी जा चुकी है।” उन्होंने कहा कि अक्सर यह कहा जाता है कि बच्चे भविष्य के नागरिक होते हैं, लेकिन आज के ये विद्यार्थी इतने व्यावहारिक विचारों के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने अपना नागरिक कर्तव्य आज ही निभा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस बात से अत्यंत प्रभावित हैं कि विद्यार्थी इतनी प्रभावी प्रस्तुतियाँ बना रहे हैं और व्यवसाय के जटिल विषयों को भी सहजता से समझा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब विद्यार्थी स्कूल स्तर पर ही इतना व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर लेंगे, तो वे अपने जीवन में कभी असफल नहीं होंगे।
शिक्षा मंत्री जीएमएसएसएस, बहादुरगढ़ की टीम द्वारा विकसित “रेसॉइल ऑर्गेनिक” नामक जैविक उर्वरक से विशेष रूप से प्रभावित हुए। इस उत्पाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और प्रति एकड़ उत्पादन में भी वृद्धि होती है। टीम के विद्यार्थियों ने बताया कि चीन की प्रति एकड़ पैदावार भारत से अधिक है तथा इस उर्वरक के प्रयोग से किसानों का रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट 44 प्रतिशत से बढ़कर 104 प्रतिशत तक हो सकता है।
कार्यक्रम को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया गया। पहले भाग में राज्य स्तर पर चयनित 66 टीमों ने अपने-अपने बिजनेस मॉडल्स का प्रदर्शन स्टॉल्स के माध्यम से किया। इन स्टॉल्स पर उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षकों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा स्वयं शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से उनके बिजनेस मॉडल, राजस्व सृजन, विपणन रणनीति, लागत प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत संवाद किया।
इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में हरियाणा के 22 जिलों से कुल 66 टीमों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक जिले से तीन-तीन टीमों ने अपने-अपने स्टॉल्स में व्यापार, उद्योग एवं उत्पादन से संबंधित नवाचारी मॉडल प्रस्तुत किए। इन सभी 66 टीमों को अपने उद्यम के विकास के लिए सरकार द्वारा 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इनमें से श्रेष्ठ 10 टीमों को मंच पर बुलाकर उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों, ज्यूरी सदस्यों एवं सरकारी अधिकारियों के समक्ष अपने-अपने मॉडल पर चर्चा करने का अवसर दिया गया। इन टीमों को इस कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय सहायता, अवसर, परामर्श तथा निरंतर सहयोग प्राप्त होगा।
कुशल बिजनेस चैलेंज 2.0 का मूल उद्देश्य “कार्य के साथ शिक्षा” को साकार करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी व्यापार, उद्योग, विपणन, लागत प्रबंधन, मूल्य निर्धारण, नवाचार, टीम प्रबंधन, संचार कौशल तथा समस्या समाधान जैसे महत्वपूर्ण जीवनोपयोगी कौशल सीख रहे हैं।
कार्यक्रम में शैक्षणिक सत्र 2024-25 में लगभग 37,000 विद्यार्थियों ने पूरे राज्य में इसमें भाग लिया था। वहीं इस वर्ष 2,500 से अधिक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में 66 मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति की गई, जिन्होंने लगभग 7,000 अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया। इसके परिणामस्वरूप 1,18,000 विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम में पंजीकरण कराया, जिन्होंने 23,000 से अधिक टीमों का गठन कर अपने-अपने नए बिजनेस आइडियाज प्रस्तुत किए।
पीएम श्री गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कुंडली की टीम द्वारा विकसित पूर्णतः बायोडिग्रेडेबल पेन, जिसमें बीज भी लगा हुआ है और उपयोग के बाद फेंकने पर पौधा उग जाता है। ऐसे लगभग 1,500 पेन की बिक्री हो चुकी है। लाडवा की टीम ने वेबसाइट के माध्यम से “मदर्स टिफिन” सेवा की शुरुआत की, जबकि नूंह जिले की छात्राओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। जब शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों से पूछा कि क्या उनके परिवारजन इस प्रकार के व्यवसाय के लिए समर्थन करते हैं, तो विद्यार्थियों ने बताया कि सामान्यतः ऐसा नहीं होता, लेकिन जब सरकार ने समर्थन दिया तो परिवारों का विश्वास भी बढ़ा है।
कुशल बिजनेस चैलेंज- यूथ स्टार्ट-अप महोत्सव का यह राज्य स्तरीय सम्मेलन हरियाणा के राजकीय विद्यालयों में उद्यमशीलता की संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर एवं रोजगार-उन्मुख बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
हरियाणा अंतर्देशीय मत्स्य पालन में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा – श्याम सिंह राणा
हरियाणा में 2.04 लाख टन मछली उत्पादन
हरियाणा के मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने राज्य में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की तेज विकास दर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरियाणा देश के प्रमुख भूमि-आबद्ध (लैंडलॉक्ड) मछली उत्पादक राज्यों में से एक बनकर उभरा है। राज्य ने 23,850 हेक्टेयर जल क्षेत्र से कुल 2.04 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया है।
हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के मत्स्य पालन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा ने 166 करोड़ मछली बीज (फिश सीड्स) का उत्पादन किया है, जो राज्य की मत्स्य पालन संरचना और वैज्ञानिक प्रथाओं के मजबूत होने को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भूमि-आबद्ध राज्यों में पंजाब मछली उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जबकि हरियाणा दूसरे स्थान पर है, भले ही राज्य की कोई तटरेखा न हो।
मत्स्य पालन मंत्री ने कहा कि हरियाणा में भूमि-आबद्ध राज्य तालाब-आधारित और अंतर्देशीय जल मत्स्य पालन के माध्यम से भारत के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन तटीय राज्यों की तुलना में इन्हें कम वित्तीय सहायता मिलती है, जिसका सीधा असर मछली पालकों और राज्य के जीडीपी पर पड़ता है।
मत्स्य पालन मंत्री ने सम्मेलन में बताया कि हरियाणा मत्स्य पालन को वैकल्पिक आजीविका के रूप में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। कई किसान पारंपरिक कृषि से बेहतर लाभ के कारण मछली पालन की ओर परिवर्तित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मछली पालन ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या, विशेष रूप से पराली जलाने की समस्या में भी मदद की है, क्योंकि यह किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि बीज गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए हरियाणा ने सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर मछली बीज बैंक सुनिश्चित किए हैं। भुवनेश्वर के सिफा से आनुवंशिक रूप से सुधारित मछली प्रजातियां प्राप्त की गई हैं, जिससे राज्य उच्च गुणवत्ता वाले ब्रुड स्टॉक का उत्पादन कर रहा है और समग्र उत्पादकता में सुधार हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मछली बीज प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा निर्देश और योजनाएं जारी करने का आग्रह किया ताकि सभी राज्यों में गुणवत्ता वाले बीज की एकसमान उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
मत्स्य पालन मंत्री ने संरचना विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मछली पालकों और उद्यमियों को दिल्ली की गाजीपुर और आजादपुर मंडियों की तर्ज पर सोनीपत के गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट में समर्पित स्थान प्रदान किया गया है।
श्री श्याम सिंह राणा ने केंद्र सरकार के समक्ष कई प्रस्ताव रखे, जिनमें फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, यमुनानगर और पंचकूला में आधुनिक थोक मछली बाजार स्थापित करना शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये है। साथ ही करनाल में मछली प्रसंस्करण इकाई और सिरसा में झींगा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश होगा। उन्होंने बताया कि हरियाणा पंचकूला में विश्व स्तरीय एक्वेरियम हाउस बनाने की भी कल्पना कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 1,000 करोड़ रुपये है।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के गांव सुल्तानपुर में पांच एकड़ भूमि राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के लिए हस्तांतरित की गई है, जो हरियाणा और पड़ोसी राज्यों को लाभ पहुंचाएगा। उन्होंने अधिक नीतिगत समर्थन की मांग करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्रालय से 2026-27 वित्तीय वर्ष में भूमि-आबद्ध राज्यों पर विशेष ध्यान देने और उनकी विशिष्ट चुनौतियों को संबोधित करने के लिए हरियाणा में एक विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने पर विचार करने का आग्रह किया।
उन्होंने हरियाणा में मत्स्य पालन हेतू बढ़ा हुआ बजटीय समर्थन प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रति आभार व्यक्त किया और केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह के निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
क्रमांक 2026
सुभाष चन्द्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2027 के लिए आवेदन आमंत्रित
चंडीगढ़, 5 जनवरी — राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा सुभाष चन्द्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार – 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस पुरस्कार की घोषणा हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर की जाती है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि व्यक्तियों और संगठनों के अमूल्य योगदान और निस्वार्थ सेवा भाव को पहचानने और सम्मानित करने के लिए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार के नाम से वार्षिक पुरस्कार दिया जाता है। उन्होंने बताया कि केवल भारतीय नागरिक और भारतीय संस्थान ही पुरस्कार के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। संस्थान, स्वैच्छिक संगठन, कॉर्पोरेट संस्थाएं, शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थान, प्रतिक्रिया/वर्दीधारी बल या किसी अन्य संस्थान के लिए पुरस्कार के लिए एक संस्था के रूप में आवेदन कर सकते हैं।
पुरस्कार के लिए उम्मीदवार ने भारत में आपदा प्रबंधन जैसे रोकथाम, शमन, तैयारी, बचाव, प्रतिक्रिया, राहत, पुनर्वास, अनुसंधान/नवाचार या ऐसे कार्य के क्षेत्र में काम किया हो। आवेदन के साथ आपदा प्रबंधन में किए गए कार्यों का विवरण होना चाहिए। पुरस्कार के संबंध में अधिक जानकारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के पोर्टल पर उपलब्ध है।
क्रमांक: 2026
प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के लिए आरचरी खिलाड़ियों के चयन हेतु ट्रायल 9 जनवरी को पलवल में
चंडीगढ़, 5 जनवरी – प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन संभावित रूप से 20 फरवरी, 2026 तक छत्तीसगढ़ राज्य के दीव में किया जाएगा। निदेशक खेल विभाग हरियाणा के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 7 प्रतिस्पर्धात्मक खेलों एवं 2 डेमो खेलों को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियो एवं टीमों का चयन प्रथम चरण के ट्रायल के माध्यम से किया जाएगा। चयनित एथलीटों के नाम 20 जनवरी, तक भारतीय खेल प्राधिकरण को भेजे जाएंगे।
प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा राज्य की ओर से टीम स्पोट्र्स के अंतर्गत आरचरी खेल के लिए खिलाड़ियों का चयन आगामी 9 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम पलवल में ट्रायल के आधार पर किया जाएगा।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया की हरियाणा राज्य के ओपन वर्ग में आरचरी खेल में रुचि रखने वाले महिला एवं पुरुष खिलाड़ी निर्धारित तिथि को प्रात: 9 बजे ट्रायल हेतु स्टेडियम में अनिवार्य रूप से उपस्थित हों। उन्होंने बताया कि खिलाड़ी ट्रायल के लिए आवश्यक दस्तावेज अपने साथ लेकर आएं, जिनमें सक्षम अधिकारी द्वारा जारी एस.टी. जाति प्रमाण-पत्र, रिहायशी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, जन्म तिथि से संबंधित दस्तावेज आदि शामिल हैं। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक खिलाड़ी आगरा चौक पलवल के नजदीक स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम में जिला खेल कार्यालय पलवल से संपर्क कर सकते हैं।
क्रमांक: 2026
*विकसित भारत के लिए मनरेगा में सुधार हेतु लाया गया है जी राम जी एक्ट – मुख्यमंत्री*
*नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को मिला बढ़ावा- मुख्यमंत्री*
*केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए*
*जी राम जी एक्ट भ्रष्टाचार मुक्त ग्रामीण रोजगार की गारंटी- नायब सिंह सैनी*
चंडीगढ़, 5 जनवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 भ्रष्टाचार मुक्त ग्रामीण रोजगार की गारंटी प्रदान करता है। यह ग्रामीण रोजगार नीति अधिक गारंटी वाले कार्यदिवस, उच्च मजदूरी, पारदर्शी भुगतान और टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण को सुनिश्चित करता है। इस नए कानून से पहले की मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार और खामियों को दूर किया गया है।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने श्रमिकों के कल्याण और गांवों के विकास में एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विकसित भारत-जी राम जी योजना शुरू की है। यह विषय देश के करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश परिवारों से जुड़ा हुआ है।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, श्री रणबीर गंगवा, श्री कृष्ण कुमार बेदी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीण आत्रेय भी उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि वीबी जी-राम जी कानून का उद्देश्य उन वास्तविक श्रमिक लाभार्थियों का समर्थन करना है, जिन्हें पिछली सरकारों ने धोखा दिया था। यह अधिनियम परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी की व्यवस्था करता है, मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। श्रमिकों को गारंटीकृत रोजगार बढ़ाकर अधिक मजदूरी देती है। ये श्रमिक अब भ्रष्ट ठेकेदारों, अधिकारियों या राजनेताओं की तिजोरियाँ भरने के लिए नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।
खामियों से भरे ढांचे में बदलते समय के साथ पुरानी प्रणालियों को परिवर्तित करना आवश्यक
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा योजना लगभग 20 वर्ष पहले शुरू की गई थी। मनरेगा और ऐसी ही अन्य कई योजनाओं की प्रकृति ही ऐसी होती है कि इन्हें तैयार किया जाता है, पारित किया जाता है, लागू किया जाता है और इनमें सुधार भी किया जाता है। मनरेगा के अंतर्गत कई समस्याएं सामने आईं, जैसे कि श्रमिकों के बजाय मशीनों का उपयोग करना, बजट का अत्यधिक अनुमान, पहले से पूर्ण की गई परियोजनाओं को दोबारा करना, और ऐसी ही कई कमियां देखने को मिलीं, लेकिन आज सच्चाई यह है कि देश, समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पिछले 20 वर्षों में मूल रूप से बदल चुके हैं। ग्रामीण गरीबी वर्ष 2011-12 में जहां 25 प्रतिशत से अधिक थी, वहीं आज यह घटकर लगभग 5 प्रतिशत से भी नीचे आ चुकी है। इसका अर्थ है कि वर्तमान केंद्र सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण 25 प्रतिशत से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिजिटल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सेवाओं, डी.बी.टी., आधार और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। ऐसे में एक पुराने, खामियों से भरे ढांचे को बिना सुधार के ढोते रहना न तो श्रमिकों के हित में था और न ही राष्ट्र के।
*नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को मिला बढ़ावा*
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को काफी बढ़ावा मिला है। इसके माध्यम से, सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास कर रही है। इससे पूरे भारत वर्ष में एक ग्रामीण अकुशल श्रमिक की वार्षिक आय में औसतन 7 हजार रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होगी। हरियाणा में मजदूरी दर ज्यादा है, इसलिए हर श्रमिक को कम से कम 10 हजार रुपये अधिक मिलेंगे।
*केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए*
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना से न केवल काम के अधिक दिन सुनिश्चित होंगे, जिससे बेहतर वेतन मिलेगा, बल्कि अनिवार्य साप्ताहिक वेतन भुगतान (अधिकतम 15 दिनों तक की देरी की अनुमति के साथ) से श्रमिकों को समय पर बढ़ा हुआ वेतन प्राप्त होगा। इससे आर्थिक स्वतंत्रता और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा। इसे संभव बनाने के लिए, केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 88 हजार करोड़ थी, जो उस समय तक का सबसे अधिक आवंटन था यानी पिछले रिकॉर्ड आवंटन को भी पार कर लिया गया है। इसमें अकेले केंद्र सरकार का हिस्सा 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगा, जिसे सरकार आने वाले वर्षों में बढ़ाने का वादा करती है।
*हरियाणा में 52 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के श्रमिकों को तथा 65 प्रतिशत से अधिक महिला श्रमिकों को काम मिला*
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत इस वर्ष हरियाणा में 52 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के श्रमिकों को तथा 65 प्रतिशत से अधिक महिला श्रमिकों को काम मिला है। यह काम वास्तव में उन्हें मिला है। पहले तो मशीनों से काम करवा लिया जाता था और उन्हें वास्तव में काम मिलता ही नहीं था।
उन्होंने कहा कि इस कानून में कार्यों की प्रकृति को भी बदला गया है। पहले मनरेगा के तहत सीमित रोजगार दिया जाता था। अब जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संसाधन और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाली स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में भी रोजगार दिया जाएगा। ग्राम पंचायतों की योजनाओं को पी.एम. गति शक्ति मास्टर प्लान से जोड़ा गया है, ताकि गांवों में होने वाला हर काम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो।
उन्होंने कहा कि इस योजना में अब कृषि के चरम मौसम के दौरान 60 दिनों का विराम शामिल किया गया है ताकि देश के किसान और मजदूर मिलकर काम कर सकें और मजदूरों को कृषि मौसम के दौरान उनके श्रम के लिए बाजार की उच्च दरें मिल सकें।
*भ्रष्टाचार से निपटने और शोषण को रोकने के लिए किए गए तकनीकी उपाय*
मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने, शोषण को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल वास्तविक श्रमिकों को ही पारदर्शिता के साथ उनका हक मिले, वीबी जी- राम जी योजना में कई उपाय किए गए हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और उपस्थिति से फर्जी कर्मचारियों, डुप्लिकेट जॉब कार्ड और फर्जी भुगतानों को रोका जा सकेगा। वेतन और भत्तों का सीधा, डिजिटल भुगतान इससे बिचौलियों, वेतन भुगतान में देरी और धन के दुरुपयोग की समस्या समाप्त हो जाएगी। जियो-टैगिंग और सैटेलाइट इमेजरी इस योजना के तहत बनाई गई प्रत्येक संपत्ति को जियो-टैग किया जाएगा और इसरो के भुवन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि भ्रष्ट ठेकेदारों या अधिकारियों द्वारा फर्जी परियोजनाओं का पंजीकरण न हो सके। साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासे इससे श्रमिकों की सूची, भुगतान, प्रतिबंध और निरीक्षण सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं। शिकायत रजिस्टर और ब्लॉक एवं जिला स्तर पर बहुस्तरीय शिकायत निवारण के साथ 7-दिवसीय निपटान समय सीमा अंतहीन विवादों और मुकदमों के बजाय अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है, साथ ही पूर्वाग्रह और दमन को समाप्त करता है।
उन्होंने कहा कि धन की हेराफेरी के लिए धोखे से बनाई गई फर्जी परियोजनाओं को रोकने के लिए, नए प्रावधानों को चार क्षेत्रों में बांटा जाएगा। जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संसाधन और जलवायु संरक्षण। अब, यह योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बनने के बजाय विकास में एक वास्तविक और ठोस योगदानकर्ता के रूप में काम करेगी।


