Saturday, August 30, 2025
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वामी कल्याणदेव महाराज जी की 21वीं पुण्यतिथि पर किया नमन

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वामी कल्याणदेव महाराज जी की 21वीं पुण्यतिथि पर किया नमन

 

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में शुकदेव आश्रम में स्वामी कल्याणदेव महाराज जी की प्रतिमा का किया अनावरण

 

समाज और देश की प्रगति के लिए प्रत्येक व्यक्ति निरंतर सेवा भाव से करे कार्य – मुख्यमंत्री

 

Priyanka Thakur

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में स्थित शुकदेव आश्रम में स्वामी कल्याणदेव महाराज जी की 21वीं पुण्यतिथि पर उनकी समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्वामी कल्याण देव जी महाराज की प्रतिमा का भी अनावरण किया।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज हम माँ गंगा के पावन तट पर स्थित महान महर्षि शुकदेव की धरती पर एकत्रित हुए हैं। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम विशेष स्थान है। यह आश्रम न केवल एक आध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि शिक्षा, सेवा और संस्कृति का भी प्रतीक है। स्वामी जी की प्रतिमा नई पीढ़ियों को स्वामी जी के कार्यों, सिद्धांतों और आदर्शों की हमेशा याद दिलाती रहेगी।

उन्होंने कहा कि स्वामी ओमानन्द जी महाराज इस आश्रम की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और शुकदेव जी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज सेवा के कार्यों को सेवा भाव से कर रहे हैं। स्वामी जी के मार्गदर्शन में इस आश्रम का शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि इस धरती पर हजारों साल पहले महर्षि शुकदेव जी महाराज ने परीक्षित को भागवत कथा सुनाकर मोक्ष का मार्ग दिखाया था। इस महान तीर्थ के उद्धार में संत कल्याणदेव महाराज ने अपना पूरा जीवन लगाया था l स्वामी कल्याणदेव जी महाराज का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उनके विचार और कार्य असाधारण थे। उन्होंने कम उम्र में ही सांसारिक मोह माया का त्याग कर आध्यात्मिक पथ अपनाया। यह पावन भूमि इसी महान संत, शिक्षाविद और समाज सुधारक की तपोभूमि है। वे केवल एक संत नहीं थे, वे अपने आप में एक संस्था थे, जहां से मानवता और समाज सेवा की धारा निरंतर बहती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी कल्याण देव जी ने अपने 129 सालों के लम्बे जीवनकाल में ज्ञान, शिक्षा और समाज सेवा को अपना धर्म बनाया। इस महान संत ने वर्ष 2004 में अपने नश्वर शरीर का त्याग किया l उन्होंने अनेक स्कूल, कॉलेज और गुरुकुलों की स्थापना की। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ, छुआछूत, जातिगत भेदभाव और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई, भाईचारे और प्रेम का संदेश भी दिया। समाज की अतुलनीय एवं विशिष्ट सेवाओं के लिए भारत सरकार द्वारा स्वामी कल्याणदेव जी महाराज को वर्ष 1982 में पद्मश्री से तथा वर्ष 2000 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा ‌कि आश्रम में स्वामी कल्याण देव सेवा ट्रस्ट की स्थापना की गई है। यह ट्रस्ट विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से गरीबों, बीमारों और जरूरतमंदों की सहायता करता है। यह शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक उत्थान के क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी स्वामी जी के सपनों का भारत बनाने का संकल्प लें।

मुख्यमंत्री ने शुकदेव तीर्थ पर उड़िया की पुस्तक का विमोचन किया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने शुकदेव तीर्थ पर हरियाणा भवन बनाने के लिए 11 लाख रुपये दान देने की घोषणा की।

इस अवसर पर स्वामी ओमानन्द जी महाराज ने अपने शुभाशीष संबोधन में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के सरल स्वभाव और मानवीय दृष्टिकोण की सराहना की और कहा कि मुख्यमंत्री का शुकदेव आश्रम से बड़ा पुराना नाता है। उन्होंने भारत की समृद्ध संत परंपरा पर विचार व्यक्त किए और कहा कि संतों ने देश को आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य समाज के उत्थान के कार्य को गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह जी का जीवन नैतिक मूल्यों का प्रतीक है और वे निरंतर लोगों की सेवा में तत्पर रहते हैं। उन्होंने भगवान बुद्ध और स्वामी विवेकानंद जी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका जीवन मानवता की सेवा में लगा है। हमें उनके जीवन को अपने जीवन का आदर्श मानकर अपनी जीवनचर्या चलानी चाहिए।

इस अवसर पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, शुकदेव आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एम. एल. रंगा, राज्यसभा सांसद श्री रामचंद्र जांगड़ा, सहित आश्रम के ट्रस्ट के पदाधिकारी, विधायक मिथिलेश, नेतागण एवं देश के विभिन्न स्थानों से पधारे श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

हीमोफीलिया रोगियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल

 

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से आज  हीमोफीलिया रोगियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल उनके निवास स्थान पर मिला। इस प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की लगातार कमी को लेकर मुख्यमंत्री को अवगत कराया तथा जीवन रक्षक इन दवाओं की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग रखी।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को इस वर्ष के बजट (2025-26) में हीमोफीलिया एवं थैलेसीमिया रोगियों के लिए घोषित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना को शीघ्र लागू करने का भी निवेदन किया, ताकि रोगियों को आर्थिक सहारा मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल में कैथल से राकेश यादव, यमुनानगर से विष्णु गोयल, रोहतक से अजय शर्मा, फतेहाबाद (भुना) से जोगिंदर सेठी, तथा कुरुक्षेत्र से सुखबीर समेत अनेक लोग शामिल थे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने इस विषय पर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देने की बात भी कही।

क्रमांक -2025

जंगबीर सिंह

हरियाणा सरकार ने लगाए भविष्य  विभाग के लिंक अधिकारी

 

हरियाणा सरकार ने भविष्य विभाग के महानिदेशक / निदेशक की अनुपस्थिति में विभाग के कामकाज का सुचारू सचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिंक अधिकारी लगाए हैं।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार विदेश सहयोग विभाग के महानिदेशक / निदेशक को लिंक अधिकारी-1 तथा नागरिक उड्डयन सलाहकार को लिंक अधिकारी-2 नियुक्त किया गया है।

 

हरियाणा में कर्मचारियों की शिकायतों का होगा जल्द समाधान

 

सभी विभागों में कर्मचारी शिकायत निवारण समिति’ गठित करने के निर्देश

 

मुकद्दमों में आएगी उल्लेखनीय कमी

 

हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों से जुड़े विवादों या शिकायतों के निपटान को गम्भीरता से लेते हुए, हर विभाग या संगठन में ‘कर्मचारी शिकायत निवारण समिति’ गठित करने के निर्देश दिए हैं। अब कर्मचारियों को अदालत में जाने से पहले विभागीय शिकायत निवारण समिति के माध्यम से समाधान करवाना अनिवार्य होगा। हर शिकायत का निपटारा अधिकतम आठ सप्ताह में करना आवश्यक होगा।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों व निगमों के प्रबंध निदेशकों तथा विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को जारी आदेशों में कहा गया है कि सभी विभाग व संगठन 15 दिनों के भीतर समिति के गठन की पुष्टि करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रशासनिक न्याय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजें। ये निर्देश प्रशासनिक न्याय विभाग द्वारा जारी हरियाणा स्टेट लिटिगेशन पाॅलिसी, 2025 के प्रावधानों के अनुरूप जारी किए गए हैं।

लिटिगेशन पॉलिसी के अनुसार, निर्णय प्रक्रिया में मनमानी और कर्मचारियों की शिकायतों या प्रतिवेदनों की अनदेखी सरकारी मुकदमों की बड़ी वजह बनती है। सेवा संबंधी मामलों में, अधिकतर मामले नियमों, निर्देशों और नीति निर्णयों के अनुसार राहत न मिलने से जुड़े होते हैं। अन्य मामलों में एक से अधिक नीतियां हो सकती हंै। न्यायालयों में आने वाले ऐसे अधिकतर मामलों में, अदालतें एक निश्चित समय-सीमा के भीतर स्पीकिंग ऑर्डर पारित करने के निर्देश देती हैं। मामला अदालत तक पहुंचने से पहले, सामान्य प्रशासनिक चैनल के माध्यम से अपनी शिकायतों को दूर करवाने के लिए आमतौर पर प्रभावित पक्ष काफी प्रयास करता है और इसमें काफी समय भी लग जाता है। इसके मद्देनजर सभी विभागों को प्रभावी शिकायत निवारण समितियाँ गठित करनी होंगी, जिससे काफी संख्या में अनावश्यक मुकदमेबाजी को रोका जा सकेगा।

इस शिकायत निवारण प्रणाली की संरचना द्विस्तरीय होगी। पहली श्रेणी में विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में मुख्यालय स्तर पर समिति गठित की जाएगी। इसमें दो क्लास-प् अधिकारी होंगे, जिनमें से एक एसएएस काडर का और दूसरा मुख्यालय पर तैनात विधि अधिकारी होगा। दूसरी श्रेणी जिला स्तर पर होगी, जिसकी अध्यक्षता संबंधित उपायुक्त या सेवानिवृत्त जिला/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश करेंगे। इस समिति में उपायुक्त द्वारा मनोनीत जिला स्तर पर मुख्य लेखाधिकारी, वरिष्ठ लेखाधिकारी या लेखाधिकारी तथा डिस्ट्रिक्ट अटार्नी, डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटार्नी या असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटार्नी भी शामिल होंगे।

लिटिगेशन पॉलिसी में स्पष्ट किया गया है कि सम्बन्धित विभागाध्यक्ष तथा उपायुक्त द्वारा इन समितियों का गठन पॉलिसी जारी होने के 14 दिनों के भीतर अधिसूचित किया जाना अनिवार्य है। मुख्यालय स्तर पर संबंधित अतिरिक्त निदेशक या संयुक्त निदेशक तथा जिला स्तर पर सम्बन्धित विभाग के जिला प्रमुख इस समिति की सहायता करेंगे।

इस समिति को शिकायत या प्रतिवेदन प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। समिति कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखने का अवसर देगी। मौखिक और लिखित प्रतिवेदनों के आधार पर 30 दिनों के भीतर अपनी अनुशंसा संबंधित उच्च अधिकारी को भेजेगी। उच्च अधिकारियों को अनुशंसा प्राप्त होने के एक माह के भीतर इस पर अंतिम निर्णय लेना होगा।

विभाग स्तरीय शिकायत निवारण प्रकोष्ठ या समिति की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष करेंगे। यह समिति मासिक बैठक कर मुख्यालय और क्षेत्रीय स्तर पर विभाग में मौजूद शिकायत निवारण प्रणाली की प्रभावशीलता की समीक्षा करेगी। यदि निर्देशों या नियमों में सामान्य प्रशासन या वित्त विभाग के स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है तो मामले को इस पाॅलिसी के तहत गठित राज्य स्तरीय अधिकार-प्राप्त समिति को भेजेगी। चूंकि अनुशासनात्मक कार्रवाई, वरिष्ठता और एसीपी से जुड़े मामलों में मुद्दमेबाजी ज्यादा होती है, इसलिए इनका शीघ्र निपटान किया जाना अनिवार्य है। साथ ही, वरिष्ठता सूची को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमित रूप से अपडेट और मुद्रित या प्रकाशित किया जाना चाहिए।

प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, हर विभाग को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के परामर्श से एक समर्पित साॅफ्वेयर प्लेटफार्म विकसित करना होगा। इसके माध्यम से कर्मचारी अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, अपनी शिकायत की स्थिति का पता लगा सकेंगे और निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्राप्त कर सकेंगे। इससे शिकायतों के निपटान में न केवल पारदर्शिता आएगी बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

 

हरियाणा विज़न 2047 दस्तावेज के लिए नागरिकों से सुझाव आमंत्रित

 स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान द्वारा हरियाणा के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए हरियाणा विज़न 2047 दस्तावेज़ तैयार किया जा रहा है। इस दस्तावेज के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आने वाले वर्षों में हरियाणा विकास और नवाचार के नए प्रतिमान स्थापित करे।

सरकारी प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि विज़न दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक सहभागी और व्यापक बनाने के लिए जन परामर्श सर्वेक्षण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी हेतू राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा एक पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपने विचार, सुझाव और अपेक्षाएँ सीधे सांझा कर सकते हैं, जो इस महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ का हिस्सा बनेंगी।

प्रवक्ता ने बताया कि इस पोर्टल का लिंक एनआईसी द्वारा बीएएमएस, वित्त विभाग, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सभी उपायुक्तों और हरियाणा राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की वेबसाइट पर सांझा किया जाएगा। अतः सभी नागरिकों से अनुरोध किया जाता है कि अपने मूल्यवान सुझाव इस जन परामर्श सर्वेक्षण में शामिल करने की कृपा करें।

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