Tuesday, March 3, 2026
Homepunjabमोहाली वन मंडल की पहल से सिसवां–मिर्ज़ापुर वन क्षेत्र बना ईको-टूरिज़्म का...

मोहाली वन मंडल की पहल से सिसवां–मिर्ज़ापुर वन क्षेत्र बना ईको-टूरिज़्म का केंद्र

मोहाली वन मंडल की पहल से सिसवां–मिर्ज़ापुर वन क्षेत्र बना ईको-टूरिज़्म का केंद्र

नेचर ट्रेल प्राकृतिक नज़ारों और सुविधाओं से सुसज्जित

वनों पर निर्भर गांवों के स्वयं सहायता समूहों को कौशल प्रशिक्षण देकर सृजित किए जा रहे हैं रोज़गार के अवसर

चंडीगढ़, 15 जनवरी:

मोहाली वन मंडल द्वारा सिसवां–मिर्ज़ापुर वन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और ईको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए की जा रही पहलों को लोगों की ओर से अत्यंत उत्साहजनक सहयोग मिल रहा है।

सिसवां से मिर्ज़ापुर तक फैला नेचर ट्रैक, जिसकी लंबाई लगभग 5 किलोमीटर है और जिसे पूरा करने में करीब 1.5 घंटे का समय लगता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे वन दृश्य, सुंदर व्यू पॉइंट्स और वॉच टावरों के कारण लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।

सिसवां डैम पर नौकायन (बोटिंग) की सुविधा, सुव्यवस्थित कैंटीन सेवाएं तथा तीन ईको-हट पर्यटकों को एक शानदार अनुभव प्रदान कर रही हैं। ये सभी सुविधाएं लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।

इसके अलावा, वन मंडल द्वारा अन्य नेचर ट्रेल और ट्रैकिंग रूट भी विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें शीघ्र ही आम जनता के लिए खोला जाएगा।

25 दिसंबर को सिसवां डैम पर एक सफल नेचर अवेयरनेस कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें पहले साइक्लिंग इवेंट और उसके बाद ट्रैकिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विशेष रूप से चंडीगढ़ के निवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। साथ ही, स्कूल के बच्चों की नियमित शैक्षणिक यात्राएं भी सिसवां नेचर अवेयरनेस कैंप के अंतर्गत करवाई जा रही हैं, ताकि नई पीढ़ी में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित की जा सके।

मोहाली वन मंडल द्वारा प्रकृति संरक्षण, जिम्मेदार ईको-टूरिज़्म, पर्यावरण शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, वनों पर निर्भर गांवों के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सामुदायिक विकास के तहत सिसवां, गोचर और नाड़ा गांवों के स्वयं सहायता समूहों को अचार बनाना, ब्यूटी पार्लर, कपड़े के बैग तैयार करना, सिलाई (टेलरिंग) आदि जैसे कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि गांवों में रोज़गार के नए अवसर सृजित किए जा सकें। सिसवां गांव की वन समिति द्वारा सामुदायिक सेवा की पहल करते हुए हाल ही में बर्तनों का वितरण भी किया गया है।

——–
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments