शक्ति चेतना उत्सव में हुआ दिव्य साधना की विराट चेतना का अनुभव
संत हूँ, मानवता की भलाई चाहता हूँ, समाज अच्छा होगा तो राष्ट्र अच्छा होगा : सिद्ध गुरुवर सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव
चण्डीगढ़ : विश्वधर्म चेतना मंच, तिरुपति की चण्डीगढ़ शाखा द्वारा आयोजित शक्ति चेतना उत्सव में आध्यात्मिक चेतना के मूर्तिमान प्रकाशपुंज युगपुरुष सिद्धगुरु सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुर्वानन्द स्वामी जी गुरुदेव, जिनकी एक दृष्टि जीवन की दशा व दिशा दोनों बदल देती है, ने अपनी अमृतवाणी से श्रद्धालुओं को निहाल कर दिया। इस दौरान मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव जी का फूल मालाएं पहना कर स्वागत किया।
अपने उद्बोधन में सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव महाराज जी ने कहा कि समाज अच्छा होगा तो राष्ट्र अच्छा होगा। हमें युद्ध् नही, बुद्ध चाहिए, ताकि हम सभी अपने मन से परमात्मीय ऊर्जा का अनुभव करें।
साथ ही उन्होंने कहा कि पंजाब वीरों की नगरी है तथा यही एकमात्र जगह है, जहाँ गुरुद्वारों में 24 घंटों गुरु जी का लंगर भक्तों को मिलता है।
महाराज जी ने बताया कि उनकी कर्मस्थली बंगलौर में संस्था द्वारा ए-आई टेकनीक से हॉस्पिटल बनाया जाएगा तथा इस हॉस्पिटल चैन का विस्तार पूरे भारत वर्ष मे किया जाएगा। इसके साथ ही महिलाओं के लिए यूनिवर्सिटी बनाई जायेगी जिसमे शिक्षा, चिकित्सालय, देवालय व साधना इत्यादि की सुविधा होगी। महाराज जी ने संयुक्त परिवार और खुशहाल परिवार पर भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर हिमाचल के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, डॉक्टर आर सी मिश्रा, पूर्व डीजीपी अपनी पत्नी सहित, पूर्व जस्टिस नवाब सिंह, पूर्व जस्टिस की धर्म पत्नी श्रीमती ऋतंबरा सांघी , श्रीमती मंजु चंद्रा, एके सिंह (पार्लियामेंट सेक्रेटरी), राम नेहर शर्मा ( मीडिया प्रभारी), मीनू अग्रवाल, संजय शर्मा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), अमित कदियान, भूपेन्द्र जैन राष्ट्रीय संयोजक, सुरेश गुप्ता, चण्डीगढ़ अध्यक्ष व नरेश गर्ग सहित विश्वधर्म चेतना मंच, चण्डीगढ़ केन्द्र सभी सदस्य उपस्थित रहे। इस मौके पर राज्यपाल महोदय ने कहा कि वे स्वयं आकर पूज्य गुरुदेवजी को राज्यपाल आवास में पधारने के लिए निमंत्रण देंगे।
उल्लेखनीय है कि अपना सारा जीवन राष्ट्र विकास, विश्व एवं मानवता कल्याण को समर्पित कर चुके गुरुदेव महासाधना संपन्न कर दिव्य ऊर्जा एवं ईश्वरीय चेतना के अनुभव एवं मंगल दर्शन, अमृतवाणी व आशीर्वाद की वर्षा से निहाल करने 6 से ज्यादा वर्षों के अंतराल के पश्चात चंडीगढ़ उक्त कार्यक्रम में पधारे हैं।
आध्यात्मिक चेतना के मूर्तिमान प्रकाशपुंज युगपुरुष ब्रह्मर्षि गुरुदेव ज्ञान, भक्ति, कर्मयोग की साक्षात त्रिवेणी हैं। जिनसे करुणा, सरलता, दया, स्नेह, प्रेम, वैराग्य, तेजस्विता, मर्यादा, बुद्धत्व, साधना व शक्ति की धारा प्रवाहित होती है। ‘श्री गुरुदेव’ ने अपनी सातों कुण्डलिनी शक्तियाँ जाग्रत कर शिवलोक, विष्णुलोक, ब्रह्मलोक का अनुभव प्राप्त किया है। पुरातन, सनातन ऋषि मुनियों की लुप्त हो रही मंत्रों की शक्तियों एवं तंत्रों की लब्धियों को अपने वैदुष्य व साधना से खोज कर सिद्ध किया है। गुरुदेव में जैसी लौकिक एवं पारलौकिक सिद्धियाँ हैं, उनका कोई विकल्प नहीं।
श्री सद्गुरुदेव ने विश्व धर्म चेतना मंच के माध्यम से 193 देशों की यात्रा करते हुए धर्म के मूल स्वरूप एवं भारतीय ज्ञान दर्शन को विश्व भर में पहुंचाकर भारतीय संस्कृति की पताका को फ़हराया है।
22 से अधिक भाषाओं के ज्ञाता गुरुदेव कहते हैं कि खुशी के लिए नहीं, खुशी से जीओ। धर्म के लिए नहीं, धर्म से जीओ।
सेवा और संयमित जीवन ही पूजा है। स्वयं ऊपर उठने और और औरों के जीवन को ऊपर उठाने में प्रेरक और सहयोगी बनो। जीवन आत्मदर्शन का होना चाहिए, प्रदर्शन का नहीं।


