सावन माह के पहले सोमवार की व्रत कथा:
प्राचीन काल में एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ जीवन यापन करता था। संतान की प्राप्ति न होने के कारण वे दोनों अत्यंत दुखी रहते थे। उन्होंने संतान प्राप्ति हेतु कई देवी-देवताओं की आराधना की, परंतु कोई फल नहीं मिला।
एक दिन ब्राह्मण पत्नी ने ब्राह्मण से कहा – “स्वामी! आप सावन के सोमवार का व्रत करें, शिवजी की पूजा करें। भगवान शिव सच्चे मन से की गई भक्ति को कभी व्यर्थ नहीं जाने देते।”
ब्राह्मण ने सावन का सोमवार व्रत करना शुरू किया। प्रत्येक सोमवार को वह व्रत रखता, व्रत कथा सुनता और शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करता। उसकी श्रद्धा देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसे दर्शन देकर वरदान दिया – “वत्स! तुम्हें संतान की प्राप्ति होगी। तुम सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करोगे।”
कुछ समय पश्चात ब्राह्मण के घर एक तेजस्वी पुत्र का जन्म हुआ। पूरे गांव में आनंद का माहौल छा गया। तभी से सावन सोमवार व्रत की महिमा और भी बढ़ गई।
🙏 सावन सोमवार व्रत का महत्व:
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इस दिन शिवजी को जल अर्पित करना, रुद्राभिषेक करना और “ॐ नमः शिवाय” का जाप अत्यंत फलदायी होता है।
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व्रती को व्रत की कथा सुननी और दूसरों को सुनानी चाहिए।