हरियाणा में जल जीवन मिशन-2.0 के लिए केंद्र व राज्य के बीच हुआ एमओयू
एमओयू से हर घर स्वच्छ जल के लक्ष्य को मिलेगी नई गति – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
3000 करोड़ रुपये के निवेश से जल आपूर्ति और गुणवत्ता पर होगा फोकस
नूहं, पलवल और महेंद्रगढ़ के लिए विशेष जल परियोजनाएं होंगी क्रियान्वित
चंडीगढ़, 20 मार्च — हरियाणा में जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को लागू करने के लिए शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हरियाणा सरकार की ओर से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री मोहम्मद शाइन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
एमओयू हस्ताक्षरित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी चंडीगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस अवसर पर जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री श्री रणबीर गंगवा, मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी तथा मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव श्री यशपाल उपस्थित रहे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जल जीवन मिशन-2.0 के अंतर्गत राज्य सरकारों व केंद्र सरकार के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आज हुआ यह एमओयू बहुत महत्वपूर्ण है। जल जीवन मिशन के दूसरे चरण में राज्य सरकार का ध्यान केवल जल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि उसकी गुणवत्ता, स्थिरता और दीर्घकालिक प्रबंधन पर भी केंद्रित होगा। इसके तहत जल भंडारण टैंकों का आधुनिकीकरण, शेष परिवारों को पाइप लाइन जल आपूर्ति से जोड़ना और दक्षिण हरियाणा के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों जैसे नूंह, पलवल और महेंद्रगढ़ में विशेष परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इन सभी योजनाओं पर लगभग 3000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के पहले चरण में हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल और पर्याप्त पेयजल की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने का राज्य सरकार ने जो संकल्प लिया, उसे साकार भी किया। वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की जब शुरुआत हुई थी तब हरियाणा में केवल 58 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में नल का कनेक्शन था, लेकिन सरकार के सतत प्रयासों से 6 अप्रैल, 2022 को ही सरकार ने शत-प्रतिशत कवरेज हासिल कर देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान बनाया है। यह उपलब्धि हरियाणा के लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता था, लेकिन अब महिलाओं को उनके घरों में ही स्वच्छ जल उपलब्ध कराने से आए परिवर्तन सामाजिक सम्मान और जीवन स्तर में सुधार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज हरियाणा में जल आपूर्ति का एक मजबूत और व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जा चुका है। इसमें नहर आधारित हजारों जलघर, टयूबवेल आधारित जलघर और बूस्टिंग स्टेशन शामिल हैं। BISWAS पोर्टल के माध्यम से बिलिंग को पारदर्शी बनाया गया है और बीबीपीएस के जरिए भुगतान को सरल किया गया है। नागरिकों की शिकायत के समाधान के लिए मल्टी चैनल प्रणाली लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल की गुणवत्ता सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में राज्य के सभी 23 जिलों में एनएबीएल मान्यता प्राप्त अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल परीक्षण वैन तैनात की गई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसमें जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जल केवल एक संसाधन नहीं बल्कि यह जीवन और सम्मान का प्रतीक है। इसी सोच के साथ हम सभी को इस मिशन को एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना है और यह नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का माध्यम है। यह विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, इसलिए हम सब मिलकर इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाएं और हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने के कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
हरियाणा ने जल जीवन मिशन के पहले चरण में शत-प्रतिशत लक्ष्य किया हासिल – केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल
इस मौके पर नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की सराहना करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन के तहत हरियाणा राज्य ने उल्लेखनीय कार्य किया है और पहले चरण में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल उत्कृष्ट कार्य किया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अधिकारियों और टीम ने समर्पण और दक्षता के साथ कार्य करते हुए हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने में बेहतर कार्य किया है।
श्री सी.आर. पाटिल ने जल जीवन मिशन–2 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी राज्यों के साथ समन्वय और समझौते को आवश्यक बताते हुए कहा कि इस दिशा में निरंतर बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी सहित सभी अधिकारियों और मिशन से जुड़े प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन–1 की सफलता के आधार पर अब दूसरे चरण को और मजबूती से आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्रमांक – 2026
प्रदेश में गैस भंडारण आवश्यकता अनुसार पर्याप्त – कृष्ण कुमार बेदी
जनसेवा को लक्ष्य मानकर निरंतर कार्य हेतु, पूरा रोड मैप तैयार
चण्डीगढ, 20 मार्च — हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश का चहुंमुखी विकास करना है। विशेषकर ग्रामीण अंचल में बेहतर सड़कों का निर्माण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, पेयजल एवं बिजली की निर्बाध आपूर्ति जैसी मूल आवश्यकताओं पर निरंतर फोकस किया जा रहा है। प्रदेश के आखिरी कोने तक आमजन को सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का लाभ मिले, यह मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का विजन है।
कैबिनेट मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी शुक्रवार को नरवाना पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में जन समस्याएं सुन रहे थे। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और विकास परियोजनाओं का हर क्षेत्र के लोगों को भरपूर फायदा मिले सरकार का यह प्रयास है। इसलिए जनसेवा को लक्ष्य मानकर निरंतर कार्य किए जा रहे हैं और इसके लिए पूरा रोड मैप भी तैयार किया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि नरवाना शहर की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है। लोगों की मांग पर नरवाना वासियों को जल्द ही बस स्टैंड के नए भवन की सौगात भी मिलेगी।
कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि प्रदेश में एलपीजी गैस आपूर्ति पूर्णतया निर्बाध और सुचारू है और रहेगी। गैस उपभोक्ताओं को किसी भी दहशत और भ्रामक प्रचार का शिकार होने की जरूरत नहीं है। प्रदेश में गैस भंडारण आवश्यकता अनुसार पर्याप्त है और लोगों को गैस आपूर्ति से संबंधित कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
कैबिनेट मंत्री ने साफतौर पर कहा कि एलपीजी गैस का कोई भी संस्थान या निजी कंपनी, एजेंसी और होलसेलर अतिरिक्त भंडारण, जमाखोरी, कालाबाजारी तथा ब्लैकमेलिंग ना करें। इसके लिए अधिकारियों को सख्त निगरानी के आदेश दिए गए हैं। यदि कोई भी ऐसी हरकत करते पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
क्रमांक 2026
रबी सीजन के मध्यनजर समय रहते मंडियों में पूरे करें आवश्यक प्रबंध- राजेश नागर
मंत्री ने किया घरौंडा अनाज मंडी का औचक निरीक्षण, प्रबंधों का लिया जायजा, दिए आवश्यक निर्देश
चण्डीगढ, 20 मार्च- हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने घरौंडा अनाज मंडी का औचक निरीक्षण किया और मंडी आढ़तियों तथा किसानों से बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आने वाले गेहूं के सीजन को लेकर खरीद प्रबंधों को समय रहते पूरा करें तथा किसानों के लिए मंडियों में स्वच्छ पेयजल, सुलभ शौचालय, बिजली, कैंटीन, शेड व सडक़ों की मरम्मत करवाई जाए। सरसों की खरीद में भी किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें और किसानों को कोई दिक्कत न आने दी जाए।
उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि मंडियों से गेहूं उठान के लिए पर्याप्त मात्रा में वाहन उपलब्ध करवाने के लिए टेंडर लग चुका है, जल्दी ही ट्रकों की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बारदाने की पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था करवाई जा रही है और सभी खरीद एजेंसियों को भी सरकार की ओर से आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं कि वे विभागों से संबंधित सभी तैयारियां जल्द पूरी करेंगे।
खाद्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि रबी सीजन के दौरान मंडियों में किसानों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। किसानों की फसल का एक-एक दाना सरकार द्वारा खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि मंडी में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नजर आए तो किसान इसकी सूचना दे सकते हैं, उस पर तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पत्रकारों के सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि मंडी के आरपीओ, प्रधान और अन्य अधिकारियों से बात कर यहां की समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई है। यहां अब तक कोई समस्या नहीं आई है, अगर कोई समस्या आती है तो उसको समय पर दूर कर दिया जाएगा। इस मौके पर डीएफएससी मुकेश कुमार तथा मंडी प्रधान सुखबीर सिंह संधू मौजूद रहे।
क्रमांक 2026
नूंह, रेवाड़ी, हिसार, जींद, रोहतक और चरखी दादरी के सिविल अस्पतालों में पीपीपी मोड पर जल्द शुरू होंगी एमआरआई स्कैन सेवाएं : स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव
हरियाणा के सिविल अस्पतालों को सशक्त बनाने के लिए अहम परियोजनाओं को दी मंजूरी
चंडीगढ़, 20 मार्च — हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की अध्यक्षता में स्पेशल हाई पावर्ड परचेज कमेटी (SHPPC) की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के सिविल अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
बैठक के दौरान सिविल अस्पताल मांडीखेड़ा (नूंह) और रेवाड़ी में सीटी स्कैन सेवाओं को हायर करने की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही मांडीखेड़ा (नूंह), रेवाड़ी, हिसार, जींद, रोहतक और चरखी दादरी के सिविल अस्पतालों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के आधार पर एमआरआई स्कैन सेवाएं शुरू करने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम और जींद के जिला सिविल अस्पतालों में मैकेनाइज्ड और ऑटोमेटेड क्लीनिंग सेवाएं शुरू करने को भी मंजूरी प्रदान की गई, जिससे अस्पतालों में स्वच्छता और मरीजों को बेहतर वातावरण मिल सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि स्वीकृत परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए और क्रियान्वयन में पारदर्शिता व दक्षता सुनिश्चित की जाए।
इन पहलों को हरियाणा के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
क्रमांक -2026
मत्स्य पालन से जुड़ी कई सेवाएं राइट टू सर्विस के दायरे में
नई सेवाओं के लिए समय-सीमा निर्धारित
चंडीगढ़, 20 मार्च-हरियाणा सरकार ने नागरिकों को समयबद्ध एवं पारदर्शी सेवाएं मुहैया कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मत्स्य पालन से जुड़ी कई नई सेवाओं को हरियाणा अधिकार सेवा अधिनियम, 2014 के तहत अधिसूचित किया है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा इस सम्बन्ध में एक अधिसूचना जारी की गई है।
अब सघन मत्स्य पालन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत लोडिंग ऑटो, फोर व्हीलर, ट्रॉली के साथ मिनी ट्रैक्टर पर सब्सिडी 40 दिन के अन्दर मिलेगी।
अधिसूचित सेवाओं में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम और न्यूक्लियस प्रजनन केन्द्रों (एनबीसी) हेतु सब्सिडी, नवाचार एवं और नवीन परियोजनाओं/गतिविधियों स्टार्ट-अप, इन्क्यूबेटर और पायलट परियोजनाओं सहित प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए सब्सिडी, प्रशिक्षण, जागरूकता, अनुभव एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए सब्सिडी, एकीकृत सजावटी मछली इकाई (ताजे पानी की मछलियों के प्रजनन एवं पालन) हेतु सब्सिडी तथा ताजे पानी के सजावटी मछली ब्रूड बैंक की स्थापना के लिए सब्सिडी शामिल है।
इसी प्रकार, मनोरंजक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु सब्सिडी, मछली एवं मत्स्य उत्पादों के ई-ट्रेडिंग एवं ई-मार्केटिंग के लिए ई-प्लेटफॉर्म हेतु सब्सिडी, कोल्ड स्टोरेज/आइस प्लांट के आधुनिकीकरण के लिए सब्सिडी, मछली मूल्य वर्धित उद्यम इकाइयों के लिए सब्सिडी तथा विस्तार एवं सहायता सेवाओं (मत्स्य सेवा केंद्र) के लिए सब्सिडी को भी इन सेवाओं में शामिल किया गया है।
इन सभी सेवाओं के लिए 50 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसके भीतर संबंधित विभाग को सेवाएं प्रदान करनी होंगी। सभी सेवाओं के लिए संबंधित जिला मत्स्य पालन अधिकारी को पदनामित अधिकारी,सम्बन्धित उप-निदेशक मत्स्य पालन को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी तथा निदेशक मत्स्य पालन को द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी नामित किया गया है ।
क्रमांक 2026
फरीदाबाद के बिजली बिलिंग प्रकरण में आयोग के निर्देश, उपभोक्ता को 5,000 रुपये मुआवजा देने के आदेश
चंडीगढ़, 20 मार्च — हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने जिला फरीदाबाद से संबंधित एक बिजली बिलिंग प्रकरण में तथ्यों पर विचार करते हुए उपभोक्ता श्री करण सिंह खत्री को 5,000 रुपये मुआवजा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। यह मुआवजा विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों से वसूल किया जाएगा।
आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि आवेदक ने 01 अगस्त 2024 को अस्थायी बिजली कनेक्शन लिया था। इस अवधि के दौरान उन्हें औसत आधार पर लगभग 2,500 रुपये प्रति माह के बिल जारी किए जाते रहे, जिनका उन्होंने नियमित रूप से भुगतान किया। बाद में 19 जनवरी 2026 को 01 अगस्त 2024 से 15 जनवरी 2026 की अवधि का 15,833 रुपये का बिल जारी किया गया।
इस संबंध में आवेदक ने 21 जनवरी 2026 को शिकायत दर्ज करवाई तथा नियमानुसार प्रथम एवं द्वितीय अपील की प्रक्रिया अपनाई। आयोग के संज्ञान में यह भी आया कि प्रकरण विचाराधीन रहने के दौरान उपभोक्ता द्वारा पूरी राशि का भुगतान किया गया।
आयोग ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि उपभोक्ता द्वारा वास्तविक विद्युत खपत का भुगतान किया जाना आवश्यक है, तथापि लंबे समय तक औसत बिलिंग के पश्चात एकमुश्त राशि आने की स्थिति में उपभोक्ता की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना अपेक्षित है।
आयोग ने निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार किस्तों में भुगतान जैसी व्यवस्था पर भी विचार करें।
हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट, 2014 की धारा 17(1)(ह) के तहत आयोग ने अधिकतम अनुमन्य 5,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही, संबंधित अधिकारी को 13 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


