Friday, January 9, 2026
Homeहरियाणाहरियाणा में लंबित म्यूटेशन निपटाने के लिए ‘जलसा-ए-आम’ अभियान शुरू

हरियाणा में लंबित म्यूटेशन निपटाने के लिए ‘जलसा-ए-आम’ अभियान शुरू

हरियाणा में लंबित म्यूटेशन निपटाने के लिए जलसा-ए-आम’ अभियान शुरू

एग्रीस्टैक और डिजिटल राजस्व सुधारों को मिलेगी रफ्तार

चंडीगढ़, 8 जनवरी–जन सुविधाओं को सुदृढ़ करने और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूती देने की दिशा में हरियाणा सरकार ने समयबद्ध राज्यव्यापी अभियान ‘जलसा-ए-आम’ शुरू किया है। इसके तहत सभी लंबित म्यूटेशन मामलों का निपटान किया जाएगा। साथ ही एग्रीस्टैक के क्रियान्वयन, डिजिटल राजस्व सुधारों, भूमि विभाजन मामलों के निस्तारण, अंतर-राज्य सीमा चिह्नांकन तथा व्यापक शीतलहर तैयारियों को गति दी जाएगी।

इन उपायों की समीक्षा एवं घोषणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की।

जलसा-ए-आम अभियान जनवरी माह के शनिवारों  10, 17, 24 और 31 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, ताकि म्यूटेशन मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। डॉ. मिश्रा ने अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके। वर्तमान में राज्य में 143 तहसीलों और 7,104 गांवों में 1,89,635 म्यूटेशन आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। उपायुक्तों को 10 दिनों से अधिक समय से लंबित 50,794 मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें फरीदाबाद, पलवल और अंबाला पर विशेष फोकस रहेगा। जनता की असुविधा को कम करने के लिए राज्य ऑटो-म्यूटेशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके लिए मौजूदा बैकलॉग का प्राथमिकता से निपटान आवश्यक है।

भूमि विभाजन के लंबे समय से लंबित मामलों पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने पंजाब भूमि राजस्व अधिनियम की प्रतिस्थापित धारा 111ए के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए, जो त्वरित निस्तारण का प्रावधान करती है। निस्तारण में तेजी लाने के लिए प्रत्येक सहायक कलेक्टर (द्वितीय श्रेणी) को प्रति माह न्यूनतम 12 विभाजन मामलों का निपटान करने का लक्ष्य दिया गया है, जबकि कम कार्यभार वाले तहसीलदारों को प्रति माह 20 मामलों का लक्ष्य सौंपा गया है।

जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डॉ. मिश्रा ने त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए, जिसके तहत जिला, मंडल और राज्य स्तर पर मासिक समीक्षा की जाएगी। उन्होंने वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र शुरू करने के भी निर्देश दिए, जिसके अंतर्गत सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को अनुबंध के आधार पर गांव-स्तरीय शिविरों में सहमति-आधारित समाधान हेतु नियुक्त किया जाएगा। प्रत्येक सफलतापूर्वक सुलझे मामले पर 10,000 रुपये का मानदेय स्वीकृत किया गया है, जिसे विवादित पक्षकारों द्वारा समान रूप से साझा किया जाएगा। उपायुक्तों को अधिक संख्या में लंबित राजस्व मामलों वाले गांवों में ADR शिविर आयोजित करने हेतु सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को पैनल में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

*डिजिटल परिवर्तन की उपलब्धियां*

डिजिटल राजस्व प्रशासन की प्रगति की समीक्षा करते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि हरियाणा में 60 लाख से अधिक भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली के शुभारंभ के बाद से 83,379 संपत्ति विलेख पेपरलेस मोड में पंजीकृत किए जा चुके हैं। कुल 1,17,931 विलेखों में से 90,711 को स्वीकृति मिली है, जो 76.9 प्रतिशत की स्वीकृति दर दर्शाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन पंजीकरण मामलों को दो से अधिक बार वापस किया गया हो, उन्हें समयबद्ध समाधान के लिए स्वतः वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाए।

 

*ततिमा डिजिटलीकरण लगभग पूर्ण*

5 जनवरी, 2026 तक 6,351 जियो-रेफरेंस्ड गांवों में 60.43 लाख ततिमा रिकॉर्ड पूरे किए जा चुके हैं। महेंद्रगढ़ जिले में 99.7 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि भिवानी और जींद जिलों में क्रमशः 3.82 लाख और 4.28 लाख रिकॉर्ड पूरे किए जा चुके हैं। शेष जिलों को 31 जनवरी 2026 तक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

*एग्रीस्टैक का रोल आउट और अनुपालन उपाय*

एग्रीस्टैक के तहत 98 लाख से अधिक किसानों के लिए डेटा बकेट तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 5.12 लाख नामांकन पूरे हो चुके हैं। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि एग्रीस्टैक शिविरों में भूमि स्वामियों की PPP-ID और आधार सीडिंग एक साथ की जाए और इसे एक माह के भीतर पूर्ण किया जाए। पीएम-किसान लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें कृषि विभाग द्वारा भेजे जाने वाले एसएमएस अलर्ट के माध्यम से जुटाया जाएगा।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कृषि, राजस्व और CRID विभागों के अधिकारी फील्ड-स्तरीय शिविरों में एक साझा मंच पर कार्य करें, ताकि आधार-PPP सीडिंग और राजस्व अभिलेखों का अद्यतन निर्बाध रूप से हो सके। डॉ. मिश्रा ने लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों के शीघ्र निस्तारण तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत मध्यस्थता मामलों में न्यायालय-निर्देशित समय-सीमाओं के कड़ाई से पालन पर भी जोर दिया।

 

*अंतर-राज्य सीमा चिह्नांकन*

हरियाणा–उत्तर प्रदेश सीमा पर 1,221 में से 535 सीमा स्तंभ अब तक स्थापित किए जा चुके हैं। सोनीपत जिले में 74.6 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, इसके बाद पलवल और करनाल जिले हैं। शेष कार्य 18 फरवरी 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

*शीतलहर से निपटने की तैयारी और जन-अपील*

डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्य में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के दिशानिर्देशों के अनुरूप कोल्ड वेव एक्शन प्लान लागू किया गया है। चिकित्सा सामग्री और गर्म कपड़ों से सुसज्जित जिला-स्तरीय आपात प्रतिक्रिया टीमें सक्रिय कर दी गई हैं, जो 24 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया देंगी।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे विशेषकर अकेले रहने वाले बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवारों जैसे संवेदनशील पड़ोसियों का ध्यान रखें। सामुदायिक केंद्रों, ग्राम पंचायतों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों से हाइपोथर्मिया और फ्रॉस्टबाइट के शुरुआती लक्षणों की पहचान पर जागरूकता शिविर आयोजित करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने अत्यधिक ठंड के कारण किसी भी संकटग्रस्त व्यक्ति की सूचना आपात हेल्पलाइन 112 पर देने की अपील की।

 

 

प्रदेश सरकार एचआईवी की रोकथाम और पीड़ितों की देखभाल-सेवाओं को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध : आरती सिंह राव

 

व्यापक क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का किया जा रहा है आयोजन

 

चंडीगढ़, 8 जनवरी – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि प्रदेश सरकार एचआईवी की रोकथाम और पीड़ितों की देखभाल-सेवाओं को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार भारत सरकार के वर्ष 2030 तक एड्स के खतरे को खत्म करने के लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसके लिए व्यापक क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।

 

उन्होंने अधिकारियों को एचआईवी/एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने तथा प्रदेश में डेटा प्रबंधन प्रणाली (SIMS) को मजबूत करने के लिए निर्देश दिए।

 

हरियाणा स्टेट एड्स कण्ट्रोल सोसाइटी की उपनिदेशक डॉ. मीनाक्षी सोई ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री के दिशा निर्देशों की अनुपालना में क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसी दिशा में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) के प्रमुख घटकों पर आधारित एक व्यापक क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन 5 जनवरी से 10 जनवरी तक पंचकूला में किया जा रहा है।

 

यह कार्यशाला तीन चरणों में आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य एचआईवी से जुड़े सेवा कार्यों में संलग्न फील्ड स्तर के कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता एवं कार्य निष्पादन क्षमता को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित और सक्षम मानव संसाधन ही प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की नींव होते हैं।

 

डॉ. मीनाक्षी ने जानकारी दी कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) सेवाएं, ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) केंद्र तथा उच्च जोखिम एवं संवेदनशील समूहों के लिए लक्षित हस्तक्षेप (टीआई) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही स्ट्रेंथनिंग ओवरऑल केयर फॉर एचआईवी (एसओसीएच) पोर्टल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो एकीकृत एचआईवी सेवा प्रदाय के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) से जुड़े आईटी विशेषज्ञ श्री रोशन चौहान एवं श्री अभिनाश कुमार गुप्ता इस प्रशिक्षण के लिए संसाधन व्यक्ति के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को डेटा रिकॉर्डिंग, रिपोर्टिंग, केस प्रबंधन एवं एसओसीएच पोर्टल के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

 

उन्होंने बताया कि राज्य भर के सभी एसटीआई काउंसलर एवं ओएसटी डेटा मैनेजर इस क्षमता निर्माण पहल में भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, लाइव डेमोंस्ट्रेशन, तकनीकी समस्याओं का समाधान तथा इंटरएक्टिव सत्र शामिल हैं, जिससे फील्ड स्तर की चुनौतियों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

 

डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि इस पहल से निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने और जरूरतमंद समुदायों तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने दोहराया कि यह प्रयास राज्य सरकार की एचआईवी रोकथाम एवं देखभाल सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वर्ष 2030 तक एड्स को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।

 

क्रमांक -2026

 

हरियाणा सरकार ने एचसीएस परीक्षा पाठ्यक्रम में किया संशोधन

 

मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के होंगे 4 पेपर

 

चंडीगढ़, 8 जनवरी—हरियाणा सरकार ने प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की परीक्षा के पाठ्यक्रम में व्यापक संशोधन किया है।

 

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की गई है।

 

प्रारंभिक परीक्षा में अब कुल 400 अंकों के दो वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र होंगे। प्रश्नपत्र-I (सामान्य अध्ययन) में सामान्य विज्ञान, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिक घटनाएं, भारतीय इतिहास एवं स्वतंत्रता आंदोलन, भारतीय एवं विश्व भूगोल, भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति तथा तार्किक क्षमता से संबंधित विषय शामिल होंगे। इसमें हरियाणा की अर्थव्यवस्था, समाज, संस्कृति और भाषा से जुड़े पहलू भी अंतर्निहित रहेंगे।

 

प्रश्नपत्र-II (सिविल सेवा अभिरुचि परीक्षा) में अभ्यर्थियों की समझ, तार्किक विवेचना, निर्णय क्षमता, समस्या समाधान, सामान्य मानसिक क्षमता, कक्षा 10 के स्तर की संख्यात्मक योग्यता तथा आंकड़ों की व्याख्या का परीक्षण किया जाएगा।

 

मुख्य लिखित परीक्षा में कुल छह वर्णनात्मक प्रश्नपत्र होंगे, प्रत्येक प्रश्नपत्र तीन घंटे और 100 अंक का होगा, जिससे कुल अंक 600 हो जाएंगे। इस संशोधन के तहत वैकल्पिक विषय प्रणाली को समाप्त कर सामान्य अध्ययन के चार प्रश्नपत्र शामिल किए गए हैं।

 

प्रश्नपत्र-I (अंग्रेजी एवं निबंध) में गद्यांश की समझ, प्रेसी लेखन, शब्दावली, व्याकरण, रचना एवं किसी एक विषय पर सुव्यवस्थित और संक्षिप्त निबंध लेखन का मूल्यांकन होगा। प्रश्नपत्र-II (हिंदी एवं हिंदी निबंध–देवनागरी लिपि) में अनुवाद, पत्र एवं प्रेसी लेखन, गद्य-पद्य व्याख्या, मुहावरे, शुद्धि एवं विषय आधारित निबंध शामिल हैं।

 

सामान्य अध्ययन-I में प्राचीन से आधुनिक काल तक की भारतीय कला, साहित्य एवं स्थापत्य, 18वीं सदी से आधुनिक भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता पश्चात राष्ट्र निर्माण, विश्व इतिहास, भारतीय समाज की विविधता, सामाजिक मुद्दे, भौतिक एवं मानव भूगोल तथा हरियाणा से संबंधित पहलुओं को शामिल किया गया है।

 

सामान्य अध्ययन-II में भारतीय संविधान की विकास यात्रा, विशेषताएं, संशोधन, संघीय ढांचा, संसद एवं विधानमंडलों की कार्यप्रणाली, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका, संवैधानिक एवं वैधानिक संस्थाएं, शासन, कल्याणकारी योजनाएं, ई-गवर्नेंस, नागरिक सेवाओं की भूमिका, अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं हरियाणा से जुड़े समकालीन मुद्दे सम्मिलित हैं।

 

सामान्य अध्ययन-III में भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि, औद्योगिक नीति, अवसंरचना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा तथा हरियाणा से संबंधित विषयों को स्थान दिया गया है।

 

सामान्य अध्ययन-IV (नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि) में केस स्टडी के माध्यम से लोक जीवन में नैतिक मूल्यों, ईमानदारी, उत्तरदायित्व, सहानुभूति, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सार्वजनिक सेवा में आचरण, पारदर्शिता, सूचना का अधिकार तथा भ्रष्टाचार से जुड़ी चुनौतियों का आकलन किया जाएगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments