हर शुक्रवार डेंगू ते वार 2026: पंजाब ने बीमारी-मुक्त मानसून सीजन सुनिश्चित बनाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई में तेजी लाई
– पंजाब ने वेक्टर जनित और पानी से होने वाली बीमारियों के खिलाफ बहु-विभागीय दृष्टिकोण अपनाया
– स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की संयुक्त अध्यक्षता में हुई स्टेट टास्क फोर्स मीटिंग
– डॉ. बलबीर सिंह ने डेंगू और जूनोटिक खतरों से निपटने के लिए ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण अपनाने की अपील की
– डेंगू के मामलों में हैरानीजनक गिरावट: साल 2021 में 23, 389 पुष्टि किये मामलों के मुकाबले 2025 में सिर्फ़ 4981 केस आए सामने ; इसी समय दौरान मौतें की संख्या 55 से कम कर सिर्फ़ 8 हुई
चंडीगढ़, 3 अप्रैलः
आगामी हाई-ट्रांसमिशन सीजन को ध्यान में रखते हुए लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने संयुक्त रूप से उच्च-स्तरीय राज्य टास्क फोर्स बैठक की अध्यक्षता की, ताकि पूरे राज्य में वेक्टर जनित, जलजनित और जूनोटिक बीमारियों के खिलाफ एकीकृत प्रतिक्रिया तैयार की जा सके।
संबंधित विभागों की बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, रेबीज और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों से निपटने के लिए मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य रणनीतियों को एकीकृत करने वाली ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पंजाब ने अपने डायग्नोस्टिक ढांचे को काफी मजबूत किया है, जिसके तहत अब 47 सेंटिनल निगरानी अस्पतालों में डेंगू और चिकनगुनिया के लिए मुफ्त एलिसा टेस्ट उपलब्ध है और सभी आम आदमी क्लीनिकों में मलेरिया आरडीटी तथा डेंगू जांच का विस्तार किया जा रहा है।
विभाग के प्रयासों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में डेंगू के 23,389 मामले सामने आए थे, जो वर्ष 2025 में घटकर 4,981 रह गए हैं, जबकि इस दौरान संबंधित मौतों की संख्या 55 से घटकर केवल 8 रह गई है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट विभाग द्वारा घर-घर निगरानी और पिछले सीजन के दौरान 15 मिलियन दौरों की रणनीतिक पहल का प्रत्यक्ष परिणाम है।
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए कि ‘हर शुक्रवार डेंगू ते वार’ अभियान (हर शुक्रवार सुबह 8 से 9 बजे) को जन आंदोलन बनाया जाए, जिसमें छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि कूलर, गमलों और ओवरहेड टैंकों में जमा पानी जैसे मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म किया जा सके। उन्होंने चिंता जताई कि डेंगू अब केवल शहरी बीमारी नहीं रही, क्योंकि 2025 में लगभग 42प्रतिशत मामले ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आए। इस कारण फॉगिंग, गांवों के तालाबों में लार्वीसाइडल स्प्रे और मच्छरों के नियंत्रण के लिए गैंबूसिया मछली छोड़ने पर ध्यान केंद्रीत करने की जरूरत है।
ज़ूनोटिक खतरों पर एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम पर चर्चा की और कहा कि राज्य भर में 746 सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में एंटी-रेबीज टीके उपलब्ध हैं, विभागों को कुत्तों की आबादी में 70 प्रतिशत हर्ड इम्युनिटी के लिए जिला-वार पशु जन्म नियंत्रण सुविधाओं के सृजन में तेजी लानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम अब बीमारी के प्रसार की वास्तविक-समय रिपोर्टिंग के लिए आईएचआईपी पोर्टल का उपयोग कर रहा है और उन्होंने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से यह सुनिश्चित करने को कहा कि निजी प्रैक्टिशनर सभी अधिसूचित बीमारियों की तुरंत रिपोर्ट करें ताकि प्रांत में समय पर उपचारात्मक कार्रवाइयों को अमल में लाया जा सके।
बैठक के दौरान डॉ. बलबीर सिंह ने पानी से होने वाली बीमारियों पर चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय निकाय और जल आपूर्ति विभागों को निर्देश दिया कि पीने के पानी की 100 प्रतिशत क्लोरीनीकरण सुनिश्चित की जाए और हेपेटाइटिस ए, ई, डायरिया और हैजा के प्रकोप को रोकने के लिए विशेष रूप से पहचाने गए हॉटस्पॉट पर नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए।
जिला फिरोजपुर के गांव हजारा सिंह वाला में हाल ही में फैले लेप्टोस्पायरोसिस के प्रकोप पर चिंता जाहिर करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि वे इस प्रकोप के कारणों का पता लगाकर इस संबंध में उचित सुधारों को सुनिश्चित करने के लिए डिप्टी कमिश्नर के साथ गांव का दौरा करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब में ऐसी किसी भी बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए ऐसे मामलों में मॉडल एसओपी तैयार की जाएगी।
वित्त और परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भरोसा दिलाया कि वित्त विभाग स्थिति में सुधार को बनाए रखने के लिए हर आवश्यक सहायता प्रदान करेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सभी पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी वर्कशॉपों को एडीज मच्छर के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बनने वाले टायरों और वाहनों के रद्दी पुर्जों के समय पर निपटान को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने सभी भागीदारों से वर्ष 2026 में बीमारी मुक्त पंजाब के सृजन के लिए प्रयासों की गति को बनाए रखने की अपील की।
बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कुमार राहुल, सदस्य पंजाब विकास आयोग अनुराग कुंडू, एमडी पीएचएससी अमित तलवार, सचिव स्थानीय निकाय मनजीत सिंह बराड़, डायरेक्टर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. हितिंदर कौर, डायरेक्टर स्वास्थ्य सेवाएं (परिवार कल्याण) डॉ. अदिति सलारिया, डायरेक्टर (ई.एस.आई.) डॉ. अनिल कुमार गोयल, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. मंजू बांसल, सहायक डायरेक्टर डॉ. मनमीत कौर, स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर एन.वी.बी.डी.सी.पी. डॉ. अरशदीप कौर, डॉ. प्रभलीन कौर और संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


