चंडीगढ़।
पंजाब में 328 श्री गुरु ग्रंथ साहिब स्वरूप गायब, SGPC पर सवाल, राजनीति गरमाई
पंजाब में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अधीन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 गायब स्वरूपों का मामला अब सिख कौम के लिए एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मुद्दा बन चुका है। यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सिख आस्था, पंथक जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।
दिसंबर माह में इस प्रकरण में 16 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद विवाद और तेज हो गया। पंजाब पुलिस इस मामले को गंभीर आपराधिक कृत्य मानते हुए जांच को आगे बढ़ा रही है, जबकि एसजीपीसी इसे अपना आंतरिक मामला बताकर एफआईआर का विरोध कर रही है। एसजीपीसी का कहना है कि आरोपियों को धार्मिक स्तर पर पहले ही दंडित किया जा चुका है और सरकार जानबूझकर हस्तक्षेप कर रही है।
पूर्व सीए सतिंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है। पंथक हलकों में यह सवाल गूंजने लगा है कि इतने बड़े पैमाने पर स्वरूपों के गायब होने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और यह विषय वर्षों तक दबा क्यों रहा।
इस मुद्दे पर विभिन्न सिख संगठनों और पंथक नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के भाई मंजीत सिंह भोमा, हरियाणा एसजीपीसी के जगदीश सिंह झींडा, सरबत खालसा के जरनैल सिंह सखीरा और संयुक्त अकाली दल के मोहकम सिंह सहित कई नेताओं ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
वहीं, पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और संगत की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। कुल मिलाकर यह मामला अब सिख कौम की आस्था और पंथक मर्यादा की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
— Priyanka Thakur


