Sunday, February 1, 2026
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आप’ ने पंजाब में पारदर्शी और शांतिपूर्ण स्थानीय चुनाव कराए: बलतेज पन्नू

आप’ ने पंजाब में पारदर्शी और शांतिपूर्ण स्थानीय चुनाव कराए: बलतेज पन्नू

 

*कांग्रेस और अकाली दल हमेशा इन चुनावों को प्रभावित करने के लिए हिंसा और डराने-धमकाने का रास्त आपनाते थे: पन्नू*

 

*इस बार विपक्ष हार के डर से शोर मचा रहा है: पन्नू*

 

चंडीगढ़, 15 दिसंबर

 

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के महासचिव और मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने हाल ही में हुए जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को लेकर विपक्षी पार्टियों के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने झूठा प्रचार इसलिए शुरू किया है क्योंकि उन्हें साफ तौर पर बड़ी हार नजर आ रही है।

 

मीडिया को संबोधित करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि पंजाब में कई दशकों बाद पहली बार स्थानीय चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि लोगों ने बिना किसी डर या दबाव के उत्साह से हिस्सा लिया और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग किया।

 

पन्नू ने कहा कि कई सालों बाद जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में लोग लंबी कतारों में खड़े होकर वोट डालते दिखे। यह अपने आप में साबित करता है कि माहौल आजाद, निष्पक्ष और भय-मुक्त था। मतदाता अब इन जमीनी स्तर की संस्थाओं के महत्व को समझने लगे हैं।

 

विपक्षी पार्टियों पर तीखा हमला करते हुए पन्नू ने कहा कि बूथ कैप्चरिंग, धांधली और डराने-धमकाने के उनके दावे बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं।

 

उन्होंने आगे कहा कि पहले इन पार्टियों ने आरोप लगाया था कि उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया गया। लेकिन अब जब अंतिम सूची सामने आई है तो यह साफ दिखाती है कि सभी राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों ने चुनाव लड़े हैं। यह विपक्ष के झूठ को उजागर करता है।

 

पन्नू ने कहा कि विपक्ष ने नतीजों से पहले ही शोर मचाना शुरू कर दिया है क्योंकि वह जनता के फैसले से पूरी तरह वाकिफ है। उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि वे बुरी तरह हार रहे हैं, इसलिए 17 तारीख को नतीजों की घोषणा से पहले अफवाहें फैलाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

पंजाब में स्थानीय चुनावों के इतिहास का हवाला देते हुए बलतेज पन्नू ने याद दिलाया कि साल 2008 और 2013 में अकाली-भाजपा गठबंधन के शासन में और फिर 2018 में कांग्रेस सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और हत्याओं की घटनाएं हुई थीं।

 

पन्नू ने कहा कि ऑनलाइन बहुत सारा डेटा मौजूद है। 2008 और 2013 में अकाली-भाजपा ने खुली गुंडागर्दी की थी। विरोधी उम्मीदवारों को पोलिंग बूथों तक पहुंचने नहीं दिया गया, नामांकन पत्र जबरदस्ती रोके गए और हिंसा व हत्याएं हुईं। 2018 में कांग्रेस ने नगर निगम, जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में यही शर्मनाक रवैया अपनाया।

 

उन्होंने बताया कि पिछले चुनावों में विपक्षी पार्टियों ने अकाली-भाजपा सरकारों के तहत बूथ कैप्चरिंग और हिंसा के आरोप लगाते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच की थी। लेकिन इस बार पंजाब में कहीं भी बूथ कैप्चरिंग, हिंसा या जान-माल के नुकसान की एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई है।

 

कुछ बूथों पर दोबारा मतदान की खबरों के बारे में स्पष्ट करते हुए पन्नू ने बताया कि सिर्फ 16 बूथों पर चुनाव तकनीकी कारणों से रद्द किए गए, जैसे चुनाव चिन्हों या उम्मीदवारों के नामों की गलत छपाई, न कि हिंसा के कारण।

 

पन्नू ने कहा कि 17 दिसंबर को जब सही आंकड़े सामने आएंगे तो हर कोई देखेगा कि विपक्ष को कितने प्रतिशत वोट मिले और लोगों ने ‘आप’ सरकार के प्रदर्शन की वजह से कितने बड़े पैमाने पर वोट दिए। विपक्ष की यह घबराहट जनता के फैसले को साफ तौर पर दर्शाती है।

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