Tuesday, January 20, 2026
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श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज में दल खालसा और सरकार-ए-खालसा के ऐतिहासिक सिक्कों पर एक दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित

श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज में दल खालसा और सरकार-ए-खालसा के ऐतिहासिक सिक्कों पर एक दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित 

चण्डीगढ़ : श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, चण्डीगढ़ में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग द्वारा दल खालसा और सरकार-ए-खालसा के ऐतिहासिक सिक्कों पर एक दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का क्यूरेशन प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री एस. दविंदर सिंह द्वारा किया गया। प्रदर्शनी ने आगंतुकों को सिखों की समृद्ध मुद्रात्मक विरासत की दुर्लभ झलक प्रदान की और उन्हें प्रामाणिक एवं ऐतिहासिक वस्तुओं के माध्यम से सिक्ख इतिहास से जुड़ने का अवसर मिला।

प्रदर्शनी में सिख राज के सिक्कों का एक प्रभावशाली संग्रह प्रदर्शित किया गया, जिनकी राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्ता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। दल खालसा, सिख मिसलों, महाराजा रणजीत सिंह एवं उनके उत्तराधिकारियों के काल में जारी किए गए सिक्कों पर विशेष ध्यान दिया गया। इनमें लाहौर, पेशावर और कश्मीर जैसी प्रमुख टकसालों में ढाले गए सिक्के, सिख मिसलों के सिक्के तथा प्रसिद्ध ‘नानकशाही सिक्का’ शामिल थे। इसके अतिरिक्त, हरि सिंह नलवा जैसे प्रसिद्ध सिख सेनापतियों से जुड़े दुर्लभ सिक्के भी प्रदर्शनी का आकर्षण रहे। इस प्रदर्शनी में छात्रों, शिक्षकों और इतिहास प्रेमियों सहित लगभग 450 आगंतुकों ने भाग लिया।

इस अवसर पर सिक्ख एजुकेशनल सोसाइटी के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें अध्यक्ष सरदार गुरदेव सिंह बराड़ (सेवानिवृत्त आईएएस), सचिव कर्नल (सेवानिवृत्त) सरदार जसमेर सिंह बाला तथा संयुक्त सचिव सरदार करनदीप सिंह चीमा शामिल थे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जसविंदर सिंह ने प्रदर्शनी के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन छात्रों को मूल ऐतिहासिक वस्तुओं के माध्यम से सिख इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशिष्ट अतिथियों ने इतिहास विभाग के अध्यक्ष श्री भूपिंदर सिंह एवं विभाग की सराहना की, जिन्होंने शैक्षणिक अध्ययन और सांस्कृतिक चेतना को एक साथ जोड़ने वाला यह सार्थक मंच तैयार किया।

प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण खालसा सिक्कों पर अंकित प्रतीकों और लेखों (इंसक्रिप्शन्स) का विस्तृत प्रस्तुतीकरण रहा, जिससे आगंतुकों को यह समझने में सहायता मिली कि किस प्रकार विचारधारा, आस्था और संप्रभुता सिख सिक्कों में प्रतिबिंबित होती थी।

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