चंडीगढ़, 22 जनवरी | रिपोर्ट: प्रियंका ठाकुर
भारत में मतगणना केवल एक औपचारिक या तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता के विश्वास को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह बात पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने नई दिल्ली में आयोजित लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आई.आई.सी.डी.ई.एम.) 2026 के दौरान कही।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की शुरुआत तक भारत में लगभग 991 मिलियन पंजीकृत मतदाता हैं, जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा और जटिल लोकतांत्रिक अभ्यास संचालित करता है। ऐसे में हर वोट की निष्पक्ष, सटीक और पारदर्शी गिनती लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि भारत में मतगणना एक मजबूत संवैधानिक ढांचे के तहत की जाती है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और आचरण निर्वाचन नियम, 1961 द्वारा संचालित है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पेपर बैलट से ईवीएम और वीवीपीएटी प्रणाली की ओर संक्रमण से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता विश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मतगणना एक नियंत्रित वातावरण में होती है, जहां उम्मीदवारों और उनके अधिकृत गणना एजेंटों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
उन्होंने कहा कि ईवीएम और वीवीपीएटी की सुरक्षा के लिए बहु-स्तरीय इंतजाम किए जाते हैं, जिनमें सीलिंग प्रोटोकॉल, सुरक्षित परिवहन, 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी और स्ट्रांग रूम में केंद्रीय व राज्य सुरक्षा बलों की तैनाती शामिल है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष निगरानी करते हैं।
अनिंदिता मित्रा ने कहा कि “हर वोट मायने रखता है” और बुजुर्गों, दिव्यांगों तथा हाशिए पर मौजूद वर्गों के मतों को भी पूरी गरिमा के साथ अंतिम परिणाम में शामिल किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में मतगणना लोकतंत्र में जनता के भरोसे को मजबूत करने वाली एक संस्थागत प्रक्रिया है।


