चंडीगढ़:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के दूसरे चरण की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह चरण नशे के खतरे की जड़ पर सबसे बड़ा और निर्णायक प्रहार करेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस मुहिम को गांव-गांव तक जन-आंदोलन के रूप में मजबूत कर रही है, ताकि पंजाब को नशा-मुक्त बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ को और अधिक गति देने के लिए अगले माह ग्राम रक्षा समितियों (वीडीसी) की एक अहम राज्य-स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में वीडीसी सदस्य अपने-अपने गांवों को नशा-मुक्त बनाने का संकल्प लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बैठक नशा विरोधी अभियान को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी।
समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा एक वैश्विक समस्या है, लेकिन पंजाब में इसके खिलाफ जिस स्तर पर संगठित और सशक्त लड़ाई लड़ी जा रही है, वह अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने बताया कि राज्य में 1.50 लाख सदस्यों वाली ग्राम रक्षा समितियां गठित की गई हैं, जो “गांवों के पहरेदार” बनकर नशे के खिलाफ मोर्चा संभाल रही हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वीडीसी सदस्यों को शीघ्र पहचान पत्र जारी किए जाएं, ताकि उन्हें उनके सामाजिक योगदान के लिए उचित मान्यता मिल सके। उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर करती है और ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अब पूरी तरह एक जन-आंदोलन बन चुका है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विश्वास जताया कि जनता के सहयोग से अभियान का दूसरा चरण पहले चरण से भी अधिक प्रभावी साबित होगा और पंजाब नशा-मुक्त राज्य बनने की दिशा में नई उपलब्धियां हासिल करेगा। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।


