चंडीगढ़/जालंधर, 7 फरवरी:
राजनीतिक धोखाधड़ी पर लगाम कसने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्यसभा सांसद और पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने राज्यसभा में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (संशोधन) विधेयक–2025 को प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य चुनावी घोषणापत्रों को कानूनी दायरे में लाकर राजनीतिक दलों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
संत सीचेवाल ने कहा कि यदि यह विधेयक पारित होता है, तो चुनावी घोषणापत्र केवल भाषणों और काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें लागू करना सरकारों की कानूनी जिम्मेदारी बन जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्षों से राजनीतिक दल जनता से बड़े-बड़े वादे करते आ रहे हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी कोई जवाबदेही तय नहीं होती, जिससे लोकतंत्र में जनता का भरोसा कमजोर हुआ है।
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक राजनीतिक दल या गठबंधन को अपना चुनावी घोषणापत्र अनिवार्य रूप से चुनाव आयोग के पास जमा कराना होगा। घोषणापत्र में किए गए वादों को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। साथ ही उनकी समय-सीमा, अनुमानित लागत, धन के स्रोत और अपेक्षित परिणामों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
इसके अलावा, सरकारों को वादों की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से देनी होगी, जिसे एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक किया जाएगा। वादों की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित की जाएगी, जो हर वर्ष संसद में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
विधेयक में वादे पूरे न करने पर चेतावनी, आर्थिक जुर्माना और जानबूझकर गलत जानकारी देने पर सख़्त दंड का प्रावधान भी किया गया है। संत सीचेवाल ने कहा कि यह कानून चुनावी घोषणापत्र को जनता के साथ एक कानूनी अनुबंध का रूप देगा।


