नई दिल्ली/चंडीगढ़, 9 फरवरी:
चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में वायु गुणवत्ता और वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार की रणनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स को नियंत्रित करने में विफल रहने को लेकर सीधे सवाल पूछे।
लोकसभा में प्रश्न संख्या 137 के तहत तिवारी ने कहा कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान लागू होने के बावजूद एनसीआर क्षेत्र लगभग तीन महीनों तक 400 या उससे अधिक के ‘गंभीर’ वायु प्रदूषण स्तर पर बना रहा। उन्होंने इसे नीति और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर गंभीर विफलता बताया।
तिवारी ने यह भी जानना चाहा कि देश के प्रमुख शहरों में पीएम 2.5, पीएम 10 और अन्य प्रदूषकों का वर्तमान स्तर क्या है और यह राष्ट्रीय मानकों व विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों से कितना अधिक है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि वे किस हद तक प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं।
उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल वायु गुणवत्ता मॉडलों का अध्ययन किया गया है। तिवारी ने बीजिंग का उदाहरण देते हुए कोयले के उपयोग में कमी, लो-एमिशन जोन और सख्त अनुपालन व्यवस्था जैसे उपायों का उल्लेख किया और पूछा कि क्या भारत ऐसे कदम उठाने को तैयार है।
सांसद ने यह भी चिंता जताई कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों का बोझ कमजोर वर्गों पर न पड़े। साथ ही उन्होंने वायु प्रदूषण कानून की समीक्षा, शहर-वार समयबद्ध कार्ययोजना, स्वतंत्र निगरानी और सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की।
हालांकि मंत्री का जवाब विस्तृत रहा, लेकिन तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार ने मूल प्रश्नों के बजाय केवल मौजूदा योजनाओं और उपलब्धियों की सूची पेश की और ठोस समाधान से बचती नजर आई।


