चंडीगढ़, 22 मार्च:
पंजाब लोक भवन में बिहार स्थापना दिवस बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया, जिसमें पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया अपनी पत्नी अनीता कटारिया के साथ शामिल हुए।
इस अवसर पर राज्यपाल ने बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को रेखांकित करते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने राज्य की निरंतर प्रगति, एकता और समृद्धि की कामना करते हुए ‘एकता में विविधता’ के महत्व पर विशेष जोर दिया।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार की संस्कृति को विभिन्न रंगारंग प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया गया। झिझिया, जट-जटिन और छठ पूजा जैसे पारंपरिक लोक नृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा प्रस्तुत इन कार्यक्रमों ने बिहार की विविध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान बिहार के राज्यपाल का वीडियो संदेश और राज्य पर आधारित एक वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को बिहार के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराया।
अपने संबोधन में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाने से न केवल सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिलता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता भी मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन राज्यों के बीच आपसी सम्मान, सहयोग और भाईचारे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बिहार के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह राज्य शिक्षा, दर्शन और सामाजिक चिंतन का प्रमुख केंद्र रहा है। साथ ही यह बौद्ध, जैन, सिख और हिंदू धर्मों का संगम स्थल भी है।
पंजाब और बिहार के संबंधों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि तख्त पटना साहिब, जो गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मस्थान है, दोनों राज्यों के बीच गहरे आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है। यह संबंध साहस, भक्ति और सेवा की साझा परंपरा को दर्शाता है।
इस अवसर पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन, पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक प्रताप सिंह और यू.टी. चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।


