Tuesday, March 24, 2026
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वित्तीय बिल 2026 पर मालविंदर कंग का हमला, केंद्र के दावों को बताया खोखला

News Written By:
प्रियंका ठाकुर


वित्तीय बिल 2026 पर कंग का हमला, सरकार के दावों को बताया ज़मीनी हकीकत से दूर

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 24 मार्च — मालविंदर सिंह कंग ने वित्तीय बिल 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार के आर्थिक विकास के दावे जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते और आम जनता लगातार मुश्किलों का सामना कर रही है।

कंग ने महंगाई, गिरते रुपये और बढ़ती बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि देश में जीवन यापन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जबकि आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।

किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कंग ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरा नहीं हुआ, बल्कि खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने कीटनाशकों और खाद की कीमतों में वृद्धि को किसानों के लिए बड़ी चुनौती बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को ‘टॉप 5 अर्थव्यवस्था’ बताया जा रहा है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश 142वें स्थान पर पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है।

प्रो-कॉर्पोरेट नीतियों पर सवाल उठाते हुए कंग ने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए गए हैं, जबकि किसान अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

वाघा बॉर्डर खोलने की मांग करते हुए कंग ने कहा कि इससे पंजाब सहित उत्तर भारत के किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि जहां मुंबई-कराची रूट से व्यापार जारी है, वहीं अमृतसर-लाहौर मार्ग बंद होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अग्निवीर योजना की आलोचना करते हुए कंग ने कहा कि यह योजना युवाओं के भविष्य को अनिश्चित बना रही है और बेरोजगारी बढ़ा रही है।

साथ ही, मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चिंता जताते हुए कंग ने कहा कि इससे किसानों, खासकर डेयरी और फसल उत्पादकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अपने संबोधन के अंत में कंग ने कहा कि देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब किसान, मजदूर और युवा सुरक्षित और सशक्त होंगे। उन्होंने सरकार से नीतियों में बदलाव कर आम जनता के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।

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