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जज स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश नहीं होंगे अरविंद केजरीवाल, सत्याग्रह का ऐलान

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बड़ा और विवादास्पद फैसला लेते हुए घोषणा की है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रहे अपने मामले में न तो पेश होंगे और न ही अपनी ओर से कोई दलील रखेंगे।

केजरीवाल ने कहा कि उन्हें इस मामले में न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों और सत्याग्रह की भावना को अपनाते हुए यह निर्णय लिया है। इस संबंध में उन्होंने जज को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी भी दे दी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में हितों का टकराव है। केजरीवाल के अनुसार, उन्होंने जज से अनुरोध किया था कि वह खुद को इस केस से अलग कर लें, लेकिन उन्होंने स्वयं ही इस मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वह उसका सम्मान करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी न्यायपालिका ने उन्हें न्याय दिया है और झूठे मामलों से मुक्त किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को चुनौती देना नहीं है, बल्कि लोगों के विश्वास को मजबूत करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत द्वारा दिए जाने वाले किसी भी फैसले के खिलाफ वह अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे, जिसमें उच्चतम न्यायालय का रुख करना भी शामिल है।

केजरीवाल ने कहा कि यह मुद्दा अब केवल उनके व्यक्तिगत केस तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की न्याय प्रणाली में लोगों के विश्वास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपने कदम को अहिंसक और शांतिपूर्ण विरोध बताया।

राजनीतिक और कानूनी हलकों में केजरीवाल के इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

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