इस वर्ष हरियाणा में अनाज भंडारण के लिए 20 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदाम बनाए जाएंगे: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विजन-2047 के तहत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अगले 5 साल के रोडमैप व कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में दिए विस्तृत दिशा-निर्देश
चंडीगढ़, 2 जून- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसान द्वारा मेहनत से उगाए गए अनाज को खराब होने से बचाने के लिए हरियाणा में अनाज भंडारण की समुचित व्यवस्था की जाएगी। इसके अंतर्गत इस साल हरियाणा में 20 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदाम बनाए जाएंगे जिसके लिए अधिकारी पूरी तैयारी करके लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में जुट जाएं।
मुख्यमंत्री ने यह निर्देश मंगलवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन-2047 के तहत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अगले 5 साल के रोडमैप व कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री जे गणेशन ने बताया कि अनाज का खुले में भंडारण अथवा उचित भंडारण के अभाव के कारण प्रदेश में अनाज का 4 से 5 प्रतिशत तक नुकसान हो जाता है। इस नुकसान से बचने के लिए कवर्ड स्टोरेज की व्यवस्था करनी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस समय प्रदेश में गेहूं का 115 लाख मीट्रिक टन, चावल का 71 लाख एमटी, फल व सब्जियों का 110 लाख एमटी तथा दूध व अन्य डेयरी उत्पादों का 115 लाख एमटी उत्पादन होता है। राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा में हरियाणा का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है। इस समय हरियाणा में 66 लाख मीट्रिक टन अनाज भंडारण की क्षमता है जिसे 130 लाख एमटी तक बढ़ाने की आवश्यकता है।
इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्यान्न के नुकसान पर रोक लगाने के लिए कवर्ड स्टोरेज के निर्माण, कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों का उचित इस्तेमाल करने की कार्ययोजना बनाई जाए। सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय के साथ इस वर्ष पीपीपी मोड में 20 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाने का लक्ष्य पूरा किया जाए ताकि अनाज को खराब होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनाज, बागवानी फसलों, सब्जियों तथा फलों के उचित भंडारण के लिए अगले 5 साल के भीतर एक ऐसी कार्ययोजना को मूर्त रूप दिया जाएगा जिससे उत्पादित खाद्यान्न का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बने गोदामों को ऊर्जा उत्पादन का भी माध्यम बनाया जाए। सभी गोदामों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर इन्हें ग्रिड से जोड़ा जाए ताकि बिजली का उत्पादन बढ़ाया जा सके। इसी प्रकार मंडियों व गोदामों में मजदूर की पीठ पर बोरी लादने की बजाय इस कार्य के लिए कन्वेयर बैल्ट अथवा अन्य तकनीकी व्यवस्था के लिए पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री जे गणेशन ने फसल के नुकसान पर रोक लगाने तथा मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विभाग द्वारा अगले 5 वर्षों के दौरान किए जाने वाले कार्यों का खाका प्रस्तुत करते हुए बताया कि इससे 3000 से 5000 करोड़ रुपये के नुकसान को रोका जा सकेगा।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री जे गणेशन, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव श्रीमती अमनीत पी कुमार, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव श्री यशपाल यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
क्रमांक-2026
हरियाणा की चीनी मिलों को एक साल में घाटे से लाभ में लाना सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विजन-2047 के तहत सहकारिता विभाग के अगले 5 साले के रोडमैप व कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में दिए विस्तृत दिशा-निर्देश
चंडीगढ़, 2 जून- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की सभी सहकारी चीनी मिलों की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए इन्हें अगले एक साल में घाटे से निकालकर लाभ की स्थिति में लाना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए उच्चाधिकारी एक-एक मिल की स्थिति की गहन समीक्षा करें और सभी कमियों को दूर करें।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने यह निर्देश मंगलवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन-2047 के तहत सहकारिता विभाग के अगले 5 साल के रोडमैप व कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि वे तीन माह बाद विभाग की कार्य योजना की पुनः समीक्षा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की सहकारी चीनी मिलों से किसानों के हित जुड़े हैं इसलिए इनका लाभकारी स्थिति में होना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब हरियाणा में निजी चीनी मिले लाभ की स्थिति में चल रही हैं तो फिर सहकारी चीनी मिलें घाटे में क्यों चल रही हैं। सरकार ने इस साल चीनी मिलों को 632 करोड़ रुपये की सहायता दी है। उन्होंने सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज यादव को सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली और मानव संसाधन का गहन विश्लेषण करते हुए विभाग का पूर्ण रूप से कायाकल्प करने को कहा। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि सहकारी चीनी मिलों में बैठे निठल्ले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने समय-समय पर मिलों को अपडेट करने तथा एथनोल प्लांट्स लगाने के संबंध में भी व्यापक निर्देश दिए।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अगले वित्त वर्ष तक सभी सहकारी मिलों में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने का उद्देश्य भी पूरा किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि सहकारी मिलों में कार्यकुशल कर्मचारियों की कमी है, क्योंकि कई कार्यों से संबंधित पढ़ाई केवल पुणे या कानपुर में होती है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों को कुशल युवा उपलब्ध करवाने के लिए आईटीआई में इससे संबंधित कोर्स शुरू करवाए जाएंगे। उन्होंने गन्ना बेचने आए किसानों का प्रतीक्षा समय कम होने पर संतुष्टि जाहिर की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके लिए उन्होंने नई डेयरी को-ओपरेटिव सोसायटी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को डेयरी शुरू करने व हरा चारा उगाने के लिए पंचायत की जमीन लीज पर दी जाए। इसके लिए उन्होंने पंचायत विभाग, पशुपालन विभाग तथा सहकारिता विभाग की संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने प्रदेश में पशुधन के लिए भविष्य में हरे व सूखे चारे की समुचित उपलब्धता के लिए भी व्यापक योजना बनाने के निर्देश दिए।
श्री नायब सिंह सैनी ने हरको बैंक में 100 प्रतिशत पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने के निर्देश देते हुए सहकारी बैंकों में महिलाओं के खातों की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि सहकारी बैंकों में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 15 हजार खाते हैं जिन्हें बढ़ाने के प्रतिवर्ष के लक्ष्य रखे गए हैं। स्वयं सहायता समूहों व ज्वाइंट लायबिलिटी गु्रप की महिलाओं को क्रेडिट सुविधा प्रदान की गई है और 145 करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने लेबर एंड कंस्ट्रक्शन फेडरेशन के कार्यों की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि कुछ सोसायटीज को अधिक ऋण देने की बजाय अधिक सोसायटीज को ऋण उपलब्ध करवाया जाए ताकि अधिक लोगों को लाभ मिले। इसके लिए नियमों को लचीला बनाया जाए। अधिकारियों ने बताया कि अभी 3000 सोसायटीज के माध्यम से 2000 करोड़ रुपये के कार्य करवाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य संबंधित विभागों के समन्वय के साथ लक्ष्यों की प्राप्ति की योजना बनाई जाए। सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ऋण वितरण का दायरा 130 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये करने तथा कम से कम 100 पैक्स को इसी साल लाभ की स्थिति में लाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा को-ओपरेटिव हाउसिंग फेडरेशन के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के परिवारों के लिए आवास बनाने हेतु प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध करवाया जाता है। इस पर संबंधित परिवार को 7 प्रतिशत साधारण ब्याज अदा करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कम आय वर्ग के ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए ब्याज की दर को 7 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया जाए।
इनके अलावा मुख्यमंत्री ने हरकोफैड, हैफेड व रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसायटी सहित सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाले अन्य उपक्रमों के कार्यों व भविष्य की योजनाओं की भी समीक्षा की तथा अगले 5 वर्षों में इनकी कायापलट के संबंध में अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव श्रीमती अमनीत पी कुमार, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव श्री यशपाल यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
क्रमांक-2026
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने तेलंगाना स्थापना दिवस पर दी शुभकामनाएं
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में तेलंगाना और हरियाणा की महत्वपूर्ण भूमिका – राज्यपाल
चंडीगढ़, 2 जून – हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने तेलंगाना राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हुए कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेलंगाना और हरियाणा दोनों राज्य महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
राज्यपाल आज यहां हरियाणा लोक भवन में तेलंगाना स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों एवं तेलंगाना समुदाय के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारियों सहित हरियाणा में निवास कर रहे तेलंगाना समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।
प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि 2 जून, 2014 को तेलंगाना राज्य का गठन लाखों लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की पूर्ति का ऐतिहासिक क्षण था। स्थापना के बाद से तेलंगाना देश के सबसे गतिशील और प्रगतिशील राज्यों में से एक के रूप में उभरा है तथा कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना के लोगों की मेहनत, नवाचार और दृढ़ संकल्प ने राज्य को देश की आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास में अग्रणी योगदानकर्ताओं में शामिल कर दिया है। तेलंगाना की विकास यात्रा न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक एवं संघीय व्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है।
हरियाणा और तेलंगाना के बीच मजबूत संबंधों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों राज्य समावेशी विकास, किसानों और युवाओं के कल्याण तथा प्रत्येक नागरिक की उन्नति एवं प्रगति के साझा उद्देश्य से जुड़े हैं।
प्रो. असीम कुमार घोष ने विश्वास व्यक्त किया कि तेलंगाना के लोग भविष्य में भी नई उपलब्धियां हासिल करते रहेंगे और राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि तथा गौरव में अपना अमूल्य योगदान देते रहेंगे।
इस अवसर पर हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त श्री टी.वी.एस.एन. प्रसाद, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजा शेखर वुंदरु, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मानवाधिकार एवं वाद-विवाद) डॉ. सी.एस. राव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, डॉ. एम. रवि किरण, राज्यपाल के सचिव श्री विजयकुमार भाविकट्टी, राज्यपाल के एडीसी श्री धीरज सेतिया व श्री पी. भरत, अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा हरियाणा में निवास कर रहे तेलंगाना समुदाय के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
क्रमांक – 2026
मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र में हरियाणा राजस्व प्रशिक्षण अकादमी को दी मंजूरी
गांव उमरी में 14 एकड़ भूमि की हुई पहचान
राजस्व अधिकारियों, पटवारियों और फील्ड कर्मचारियों के लिए समर्पित ट्रेनिंग
हब बनाने हेतु 100 करोड़ रुपये की परियोजना
चंडीगढ़, 2 जून — हरियाणा के राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने और संस्थागत क्षमता निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र जिले के गांव उमरी में ‘हरियाणा राजस्व प्रशिक्षण अकादमी’ की स्थापना को मंजूरी दे दी है। लगभग 100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 14 एकड़ भूमि पर इस परियोजना को विकसित किया जाएगा। यह अकादमी राज्य के राजस्व अधिकारियों और फील्ड स्तर के कर्मचारियों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में काम करेगी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह अकादमी राजस्व अधिकारियों की पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाने और उन्हें भूमि प्रशासन, आपदा प्रबंधन तथा सार्वजनिक सेवा वितरण की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह निर्णय राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा अकादमी के लिए एक उपयुक्त स्थान की पहचान करने हेतु की गई विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है, जिसकी घोषणा हरियाणा बजट 2026-27 में की गई थी। कुरुक्षेत्र जिले से प्राप्त कई प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के बाद सरकार ने इस परियोजना के लिए ग्राम पंचायत उमरी को सबसे उपयुक्त स्थान के रूप में चुना है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि उमरी में प्रस्तावित स्थल के कई राजनीतिक और प्रशासनिक लाभ हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर स्थित होने के कारण, यह भूमि हरियाणा के सभी हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी बेहतरीन कनेक्टिविटी प्रदान करती है। यह स्थल मिनी सचिवालय और तहसील परिसर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे प्रमुख प्रशासनिक कार्यालयों और सरकारी विभागों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।
अकादमी का यह स्थल कुरुक्षेत्र शहर के भी करीब है और आयुष विश्वविद्यालय से लगभग एक किलोमीटर दूर है, जिससे यह तेजी से विकसित हो रहे शैक्षणिक और संस्थागत कॉरिडोर के भीतर आता है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि हरियाणा राजस्व प्रशिक्षण अकादमी को एक अत्याधुनिक संस्थान के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो राजस्व अधिकारियों, पटवारियों, कानूनगो और अन्य फील्ड-स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए समर्पित होगा। अकादमी आधुनिक भूमि शासन प्रथाओं, भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, राजस्व कानूनों, विवाद समाधान तंत्र, भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक प्रशासन में उभरती चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
उम्मीद है कि यह संस्थान पेशेवर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए एक ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (Centre of Excellence) के रूप में उभरेगा, जिससे पूरे हरियाणा में राजस्व प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करने में मदद मिलेगी।
राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की रीढ़ के रूप में, राजस्व विभाग भूमि शासन, राजस्व प्रशासन, आपदा प्रबंधन और नागरिक सेवाओं के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पिछले कुछ वर्षों में, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड, ऑनलाइन सेवा वितरण प्लेटफॉर्म और तकनीक-सक्षम शासन प्रणालियों की शुरुआत के साथ इसकी जिम्मेदारियों का दायरा और जटिलता काफी बढ़ गई है। इन बदलावों के बावजूद, एक समर्पित प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र की कमी एक बड़ी कमी बनी हुई थी। हरियाणा राजस्व प्रशिक्षण अकादमी विश्व स्तरीय क्षमता निर्माण केंद्र बनकर इस कमी को पूरा करेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि राजस्व अधिकारी डिजिटल युग में कुशल, पारदर्शी और संवेदनशील प्रशासन के लिए आवश्यक आधुनिक ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और व्यावहारिक कौशल से लैस हों।
क्रमांक -2026


