मुख्यमंत्री ने लखनऊ अग्निकांड पर दुख व्यक्त करते हुए जताई संवेदना
चंडीगढ़, 22 जून-हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए लखनऊ में हुए अग्निकांड पर दुख व्यक्त किया और इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति अपनी संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ने तुरंत घटनास्थल पर जाकर मौका मुआयना किया है और बचाव कार्यों का जायजा लिया है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हादसे के घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
मुख्यमंत्री ने एक अन्य प्रश्न के जवाब में कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से बचाव के लिए पर्यावरण संरक्षण करना बहुत जरूरी है जिसके लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए। हरियाणा सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। हरियाणा देश का पहला राज्य है जहां पुराने वृक्षों को पेंशन दी जाती है ताकि उनका उचित संरक्षण किया जा सके। उन्होंने कहा कि हर साल की भांति इस वर्ष मानसून सीजन में भी हरियाणा में ‘एक पेड़ मां के नाम’ योजना के तहत बड़ी संख्या में पौधारोपण किया जाएगा। इन पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड लगाए जाएंगे और इनकी देखभाल की जाएगी ताकि ये पूरी तरह से विकसित हो सकें।
इस अवसर पर पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता, मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू, ओएसडी श्री वीरेंद्र सिंह बड़खालसा, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के अतिरिक्त निदेशक कैप्टन मनीष कुमार लोहान तथा मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीन अत्रे भी मौजूद थे।
क्रमांक 2026
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र बनेगा ‘विकसित हरियाणा-2047′ का आधार: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने विधायकों के साथ किया ‘विकसित हरियाणा-2047’ पर चिंतन
हर विधानसभा क्षेत्र में जनभागीदारी से तैयार होगा 20 वर्षों का विकसित हरियाणा का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी
चंडीगढ़, 22 जून – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए हरियाणा सरकार ने ‘विकसित हरियाणा-2047’ के व्यापक विजन पर कार्य शुरू कर दिया है। इसी उद्देश्य से आज प्रदेश के सभी विधायकों के साथ आयोजित बैठक में ‘विकसित हरियाणा-2047’ के बारे में चिंतन किया गया। इस अभियान की थीम ‘मेरी विकसित विधानसभा’ रखी गई है, जिसके माध्यम से विकसित हरियाणा की शुरुआत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से होगी।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को हरियाणा निवास में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हरियाणा को समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने के लिए अगले 20 वर्षों का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र का ‘विजन चैंपियन’ बनकर क्षेत्र की समस्याओं, संभावनाओं और विकास की प्राथमिकताओं की पहचान करेगा तथा विकास की कार्ययोजना तैयार करेगा। इस अवसर पर पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री डॉ. अरविन्द शर्मा भी उपस्थित थे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2047 तक के लिए कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें हरियाणा की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक तक पहुंचाना, प्रति व्यक्ति वार्षिक आय को 40 लाख रुपये से अधिक करना, महिला श्रम भागीदारी को 45 प्रतिशत से ऊपर ले जाना तथा महिला साक्षरता को 100 प्रतिशत तक पहुंचाना शामिल है। इसके अलावा प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने तथा हर घर तक पाइप के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मेरी विकसित विधानसभा अभियान’ के अंतर्गत जुलाई और अगस्त माह में सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनता से सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान गांवों, वार्डों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, उद्योगों, स्वयं सहायता समूहों तथा सामाजिक संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे। इन सुझावों के आधार पर विकसित हरियाणा का जनभागीदारी आधारित रोडमैप तैयार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस अभियान में शिक्षा एवं कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण तथा जल, स्वच्छता एवं पर्यावरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक बेटी को शिक्षित, प्रत्येक युवा को कुशल और प्रत्येक हाथ को रोजगार उपलब्ध कराना है। रोजगार क्षमता को 95 प्रतिशत तक पहुंचाने तथा आईटीआई, पॉलीटेक्निक और कॉलेजों को उद्योगों से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर को 10 से कम तथा शिशु मृत्यु दर को 5 से कम करने, 100 प्रतिशत टीकाकरण और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं जल एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने तथा नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी को 70 प्रतिशत से अधिक करने का संकल्प लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल एक सरकार या एक कार्यकाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ष 2047 तक हरियाणा के भविष्य की दीर्घकालिक कार्ययोजना है। इससे पहले की सरकारों में केवल चुनावों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जाती थी, वे पार्टियां केवल 5 साल की सोच के साथ अपना घोषणापत्र जारी करती थी और उनमें से कुछ ही घोषणाओं पर काम होता था। शेष घोषणाओं को डेंटिंग-पेंटिंग करके अगले साल के लिए पुनः प्रस्तुत कर दिया जाता था। लेकिन हमारी सरकार 20-20 साल की योजनाएं बना रही हैं और इनके क्रियान्वयन के लिए ठोस कदम भी उठा रही है।
विकसित हरियाणा-2047 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रत्येक विभाग के वार्षिक लक्ष्य तय किए जाएंगे, उनकी नियमित समीक्षा की जाएगी तथा डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की प्रगति की व्यक्तिगत समीक्षा वे स्वयं करेंगे।
श्री नायब सिंह सैनी ने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित हरियाणा, विकसित भारत की प्राणशक्ति बनेगा और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में हरियाणा अग्रणी भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता, मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू, ओएसडी श्री वीरेंद्र सिंह बड़खालसा, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के अतिरिक्त निदेशक कैप्टन मनीष कुमार लोहान तथा मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीन अत्रे भी मौजूद थे।
क्रमांक 2026
कैबिनेट ने मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति, 2026 और शिक्षक स्थानांतरण नीति, 2026 को मंजूरी दी
चंडीगढ़, 22 जून -हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में मानव संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने, कर्मचारियों की संतुष्टि को बढ़ावा देने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और व्यापक जनहित में सार्वजनिक सेवा वितरण को मजबूत करने के उद्देश्य से मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति (MOTP), 2026 और शिक्षक स्थानांतरण नीति (TTP), 2026 को मंजूरी दे दी है।
ये संशोधित नीतियां पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों से प्राप्त फीडबैक पर उचित विचार करने के बाद तैयार की गई हैं।
माननीय न्यायालय ने, अन्य बातों के अलावा, पिछली स्थानांतरण व्यवस्था के तहत आयु को दिए गए महत्व (वेटेज) और दंपत्ति मामलों (couple cases) को दिए गए कम मेरिट अंकों आदि को लेकर चिंता व्यक्त की थी, जिसके बाद हितधारकों के फीडबैक को शामिल करते हुए इन चिंताओं को दूर करने के लिए नीतिगत ढांचे की व्यापक समीक्षा की गई है।
नई नीतियों के तहत, स्थानांतरण के उद्देश्यों के लिए कर्मचारी रैंकिंग एक संशोधित 120-अंकीय समग्र स्कोरिंग ढांचे के माध्यम से निर्धारित की जाएगी। इसमें आयु को दिए गए वेटेज को 75% से घटाकर 25% कर दिया गया है, जबकि व्यावसायिक अनुभव और सेवा की निरंतरता को मान्यता देने के लिए एक नया पैरामीटर “कैडर में अनुभव” शुरू किया गया है, जिसका वेटेज 25% होगा। इसके अलावा, विशेष कारकों के लिए आवंटित वेटेज को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है, जिससे वास्तविक कठिनाइयों और विशेष परिस्थितियों का सामना करने वाले कर्मचारियों को अधिक राहत मिलेगी। कर्मचारी कल्याण प्रावधानों के एक महत्वपूर्ण विस्तार के रूप में, मान्यता प्राप्त गंभीर बीमारियों की सूची को व्यापक बनाया गया है, जिसमें अब मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, बेहचेट रोग, और अग्न्याशय व बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसे निर्दिष्ट अंग प्रत्यारोपण मामलों को शामिल किया गया है। साथ ही, नीतियां एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय भी पेश करती हैं, जिसके तहत सेवानिवृत्ति के एक वर्ष के भीतर किसी भी कर्मचारी या शिक्षक का स्थानांतरण उनकी स्पष्ट लिखित सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।
नियमित सरकारी सेवा करने वाले जोड़ों के लिए समर्थन को और मजबूत करते हुए दंपत्ति मामले की श्रेणी के तहत मिलने वाले मेरिट अंकों को 5 से बढ़ाकर 10 अंक कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, पात्र संगठनों की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें किसी भी सरकार के नियमित कर्मचारियों को शामिल किया गया है, बशर्ते वे हरियाणा, चंडीगढ़ या दिल्ली में तैनात हों। प्रक्रियात्मक दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के लिए, ये नीतियां सुव्यवस्थित समय-सीमा प्रदान करती हैं और “श्रेणी” की अवधारणा पेश करती हैं, जिससे स्थानांतरण अभियानों के दौरान भाग लेने वाले और भाग न लेने वाले कर्मचारियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सके।
इन नीतियों की अधिसूचना के साथ ही, मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति, 2025 और शिक्षक स्थानांतरण नीति, 2025 के प्रावधानों के तहत शुरू किए गए कोई भी स्थानांतरण अभियान बंद माने जाएंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी पात्र कर्मचारियों को 2026 के नीतिगत ढांचे के तहत स्थापित अधिक निष्पक्ष और संतुलित मानदंडों का लाभ मिले।
कैबिनेट ने मानव संसाधन विभाग को MOTP, 2026 के तहत पहले ऑनलाइन स्थानांतरण अभियान के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए अधिकृत किया है, विशेष रूप से ‘नोशनल श्रेणी’ और उन कैडरों के संबंध में जहां वर्तमान कर्तव्य प्रभार (CDC) व्यवस्थाएं लागू हैं। ये पुनर्गठित नीतियां प्रशासनिक दक्षता और कर्मचारी कल्याण को सुनिश्चित करते हुए एक निष्पक्ष, पारदर्शी, वस्तुनिष्ठ और तकनीक-संचालित स्थानांतरण प्रणाली के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराती हैं।
क्रमांक -2026
चंडीगढ़, 22 जून – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास (एच०पी०एस०एन०) की दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालू-Ⅰ) में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई।
योजना में संशोधन के अनुसार दावा प्रस्तुत करने की अवधि का विस्तार तथा पूर्वव्यापी राहत देते हुए अब सभी भविष्य के दावों के लिए दावा भरने की अवधि को मृत्यु / विकलांगता की तारीख से 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने करना और आज तक दायर किए गए सभी दावों के लिए 3 महीने की पूर्वव्यापी छूट (यानी मृत्यु / विकलांगता की तारीख से 6 महीने तक) की अवधि होगी।
इसके साथ ही स्तरीकृत विलालम्ब क्षमा तंत्र में अब भविष्य के सभी दावों के लिए निम्नानुसार प्रत्यायोजित शक्तियों के साथ एस स्तरित विलम्ब क्षमा तंत्र होगा। इसके तहत 6 महीने से अधिक और 7 महीने तक की देरी के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एचपीएसएन और 7 महीने से अधिक और 9 महीने तक की देरी के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त विभाग तथा 9 महीने से अधिक और 12 महीने तक की देरी के लिए वित्तमंत्री को शक्तियां दी गई है।
योजना में अब एक संरचित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाएगा जिसमें उपायुक्त (डीसी) क्षेत्र स्तर के अधिकारियों के रूप में कार्य करेंगे और मुख्यालय स्तर पर मौजूदा अधिकारियों के अतिरिक्त अ०सां०का०वि० के जिला सांख्यिकीय अधिकारी (जि०स०अ०) जिला स्तर पर दयालू-1 योजना के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
क्रमांक -2026
चंडीगढ़, 22 जून – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की सहायता योजना के तहत राज्य के एनसीआर जिलों में पुराने ट्रकों एवं बसों (बीएस-IV अथवा उससे पूर्व उत्सर्जन मानकों वाले) के प्रतिस्थापन पर मोटर वाहन कर में छूट प्रदान करने को मंजूरी दी गई।
ट्रकों एवं बसों के लिए पात्र लाभार्थियों को नए बीएस-VI अथवा उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले, इलेक्ट्रिक (EV) तथा सीएनजी ट्रकों एवं बसों की खरीद पर मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, ट्रकों एवं बसों के लिए योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को पुराने (Used) बीएस-VI अथवा उससे कड़े उत्सर्जन मानकों वाले, इलेक्ट्रिक (EV) तथा सीएनजी ट्रकों एवं बसों की खरीद पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। दोनों ही मामलों में मोटर वाहन कर में यह छूट 10 वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगी।
इसके अलावा, योजना के तहत खरीदे गए नए वाहनों के पंजीकरण पर पंजीकरण शुल्क में भी छूट प्रदान की जाएगी। साथ ही, योजना में पुराने ट्रकों एवं बसों के साथ भाग लेने वाले लाभार्थियों को एक वर्ष से अधिक समय से लंबित देनदारियों में छूट प्रदान की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा के राज्यपाल ने भी राज्य के एनसीआर जिलों में पंजीकृत पुराने बीएस-IV अथवा उससे पूर्व उत्सर्जन मानकों के अनुरूप ट्रकों एवं बसों के संबंध में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित बकाया देनदारियों में छूट प्रदान की है।
इस प्रोत्साहन से वाहन बेड़े के आधुनिकीकरण में तेजी आने, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने तथा राज्य के एनसीआर जिलों में वायु गुणवत्ता में सुधार होने की अपेक्षा है, जिसमें 93458 ट्रक और 16329 बसें शामिल है।
क्रमांक -2026
चंडीगढ़, 22 जून- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा बागवानी नर्सरी अधिनियम, 2025 (2025 का हरियाणा अधिनियम संख्या 17) की धारा 22(1) के तहत हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम, 2026 को मंजूरी दी गई।
नए स्वीकृत हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम, 2026 राज्य में बागवानी नर्सरियों के प्रबंधन और निगरानी के लिए एक पूर्ण नियामक प्रणाली प्रदान करते हैं।
ये नियम नर्सरी लाइसेंस के आवेदन, अनुदान, नवीनीकरण और श्रेणियों को जोड़ने की प्रक्रिया को निर्दिष्ट करते हैं। वे न्यूनतम नर्सरी मानकों, रिकॉर्ड रखने और बेची जाने वाली रोपण सामग्री के क्यूआर-आधारित प्रकटीकरण को भी परिभाषित करते हैं।
यह नियम फलदार पौधों, सब्जियों, कंद, मसालों, सीज़निंग, फूलों, सजावटी पौधों, औषधीय और सुगंधित फसलों, तथा सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से बागवानी पौधों के रूप में घोषित किए जाने वाले अन्य पौधों से संबंधित बागवानी नर्सरियों पर लागू होंगे। इन नियमों का उद्देश्य प्रदेश में सभी प्रमुख बागवानी फसलों के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उत्पादन और उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
किसानों को अपनी किस्म के अच्छी गुणवता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। ये पौधे बीमारी और कृमि से मुक्त होंगे। अगर विक्रेता (नर्सरी संचालक) खरीदार को खराब क्वालिटी, घटिया निम्न गुणवता वाले पौधे बेचता है, तो किसानों को खेती की लागत से दोगुना मुआवजा देने का प्रावधान है।
नियमों में नर्सरियों के नियमित निरीक्षण, लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण सहित उल्लंघन के मामले में कार्रवाई और कीटों व बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित या अवैध रोपण स्टॉक को अनिवार्य रूप से नष्ट करने का भी प्रावधान है। इसके अलावा शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक समयबद्ध अपील प्रणाली का प्रस्ताव किया गया है।
अधिनियम को लागू करने, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने, नर्सरी संचालन में जवाबदेही बनाए रखने, पौधों के माध्यम से कीट-जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने और किसानों व खरीदारों के हितों की रक्षा करने के लिए ये नियम अति आवश्यक हैं।
क्रमांक -2026
चंडीगढ़, 22 जून – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा नगर पालिका संशोधन अध्यादेश 2026 और हरियाणा नगर निगम संशोधन अध्यादेश 2026 को मंजूरी दी है।
इस अध्यादेशों के माध्यम से मंत्रिमंडल ने हरियाणा नगर पालिका अधिनियम, 1973 की धारा 200 की उपधारा (1) तथा हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 329 की उपधारा (1) में संशोधन को मंजूरी दी है। भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के डी-रेगुलेशन सेल द्वारा दोहरे लाइसेंस समाप्त करने के निर्देशानुसार यह निर्णय लिया गया है। संशोधन में उन प्रावधानों को हटाया गया है,
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