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सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के हरियाणा सरकार द्वारा फंडिड निर्माण कार्यो की जांच भी क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी समय समय पर करेगा
क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कमियों पर कार्रवाई के दिए निर्देश
क्यूएए की बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया गया ब्यौरा
चंडीगढ़, 14 जुलाई। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में होने वाले सभी सरकारी निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार पूरे होने चाहिए। बात सरकारी ईमारतों की हो या फिर सड़क इत्यादि की। विशेषतौर पर सड़कों की लेयरिंग पर भी संबंधित विभाग फोक्स करें, टेंडर में जो पैमाने लिखे गए है, उनकी हर हाल में पालना सुनिश्चित हो। निर्माण कार्य में कहीं भी लापरवाही, निम्न गुणवत्ता या नियमों की अनदेखी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री मंगलवार को क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) द्वारा सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और विभिन्न विभागों में किए जा रहे तकनीकी ऑडिट की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) के अध्यक्ष श्री राजीव अरोड़ा (सेवानिवृत्त आईएएस) ने पिछली समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों पर हुई कार्रवाई, विभिन्न विभागों की प्रगति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने राज्य में चल रही विभिन्न निर्माण परियोजनाओं के तकनीकी ऑडिट की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। फोटो और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के माध्यम से निर्माण कार्यों की योजना, काम की गुणवत्ता, तय मानकों के पालन और अन्य कमियों की जानकारी दी गई।
बैठक में मुख्य रूप से हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएमबी), सिंचाई, पीडब्लयूडी, विद्युत और जनस्वास्थ्य एवं आभियांत्रिकी विभाग के बारे में चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के विभागों द्वारा करवाये जा रहे निर्माण कार्यो के अलावा केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा किए गए निर्माण कार्यो की जांच भी क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) समय—समय पर करे। साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार हरियाणा में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने सभी विभागों को बेहतर कार्यप्रणाली अपनाने, जवाबदेही तय करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि जनता के धन का हर रुपया टिकाऊ, गुणवत्तापूर्ण और जनहित के कार्यों पर खर्च हो।
मुख्यमंत्री ने क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि जहां भी लापरवाही या तय मानकों का उल्लंघन पाया गया है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तय समय में सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऑडिट में बताई गई सभी कमियों को जल्द दूर किया जाए ताकि भविष्य की परियोजनाओं में ऐसी समस्याएं दोबारा न आएं।
*मिलेंगे एसडीओ, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एवं मॉनिटरिंग एजेंसियों की नियुक्ति भी होगी—*
बैठक में पिछली समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) के अधिकारियों ने बताया कि डीपीआर और डिजाइन कंसल्टेंट की नियुक्ति, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एवं मॉनिटरिंग एजेंसियों (TPIMA) की नियुक्ति, क्यूआर कोड के माध्यम से परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) द्वारा हरियाणा सरकार द्वारा फंडिड किए गए कार्यों के ऑडिट, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग एंड मॉनिटरिंग प्रोसीजर्स (SOMPs) के आधार पर एक समान मूल्यांकन प्रणाली लागू करने तथा इंजीनियरिंग अनुबंधों से आर्बिट्रेशन क्लॉज हटाने संबंधी निर्देश जारी किए जा चुके हैं। क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी इन सभी निर्देशों के पालन की लगातार निगरानी कर रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पीडब्लयूडी, एचएसएमबी सहित कई अन्य विभागों में एसडीओ, जेई इत्यादि के पदों पर नियुक्ति करने के निर्देश भी दिए है।
बैठक में हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स (HEW) पोर्टल और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के साथ तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट जोड़ने, पुलों और बहुमंजिला इमारतों के लिए नीति बनाने, गुणवत्ता नियंत्रण शाखाओं को मजबूत करने, राइट ऑफ वे (ROW) की सुरक्षा, ड्रेनेज एवं पानी निकासी की योजनाएं तैयार करने तथा तकनीकी स्टाफ बढ़ाने जैसे विषयों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को इन सभी कार्यों को तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी को और बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए। इनमें बड़ी परियोजनाओं के लिए सोशल कॉस्ट-बेनेफिट एनालिसिस, पर्यावरणीय प्रभाव का आंकलन, गुणवत्ता के आधार पर ठेकेदारों को भुगतान, हर छह महीने में हरियाणा शेड्यूल ऑफ रेट्स (HSR) की समीक्षा, निजी विशेषकर बहुमंजिला भवनों की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए नीति बनाना, योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियरों का पैनल तैयार करना तथा GATE-योग्य यंग क्वालिटी मॉनिटर्स की भर्ती जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को इन सभी प्रस्तावों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
*क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी अधिनियम की हुई समीक्षा:*
मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी अधिनियम (QAA Act) की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभागों से विचार-विमर्श कर विधेयक का मसौदा जल्द अंतिम रूप दिया जाए, ताकि इसे हरियाणा विधानसभा के अगले सत्र में पेश किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूती मिलेगी।
*क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी का मकसद सिर्फ कमियां बताना नहीं, बल्कि इंजीनियरों को बेहतर तरीके से तैयार करना है: राजीव अरोड़ा*
बैठक के दौरान इंजीनियरों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (QAA) के अध्यक्ष श्री राजीव अरोड़ा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अगला चरण 5 अगस्त, 2026 से शुरू होगा। पहले चरण में पंचायती राज विभाग के करीब 400 जूनियर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद अन्य विभागों, विशेषकर हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के इंजीनियरों को भी प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। श्री राजीव अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा का इंफ्रास्ट्रक्चर देश में एक नई पहचान बनाए, इसके लिए केवल निर्माण कार्य कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी सर्वोच्च स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय पुरानी कार्यशैली से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीक, बेहतर योजना और मजबूत गुणवत्ता निगरानी को अपनाने का है। उन्होंने कहा कि क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी का मकसद सिर्फ कमियां बताना नहीं, बल्कि इंजीनियरों को बेहतर तरीके से तैयार करना है, ताकि हर सरकारी निर्माण काम तय मानकों के अनुसार हो और जनता को लंबे समय तक टिकाऊ एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं मिल सकें।
इस दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री एके सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरूण गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अनुराग अग्रवाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्रा कुमार, हरियाणा पावर यूटिलिटी की चेयरपर्सन श्रीमती आशीमा बराड़ सहित अधिकारीगण मौजूद थे।
क्रमांक – 2026
स्वदेशी तकनीक और डिजाइन का अनूठा उदाहरण है देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेनसेट: मुख्यमंत्री
पीएम मोदी देंगे ग्रीन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने वाले प्रोजेक्ट की सौगात
कहा: जींद में प्रधानमंत्री 17 जुलाई को करेंगे शुभारंभ
चंडीगढ़, 14 जुलाई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा एक बार फिर देश की तकनीकी प्रगति और आधुनिक आधारभूत ढांचे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल का साक्षी बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेनसेट परियोजना का शुभारंभ करेंगे। यह परियोजना भारतीय रेल को स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की दिशा में आगे ले जाने के साथ-साथ विकसित भारत, ग्रीन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेनसेट परियोजना भारतीय रेल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके माध्यम से भारत हाइड्रोजन ईंधन आधारित रेल परिवहन के क्षेत्र में निर्णायक कदम रख रहा है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में दूरगामी परिणाम देने वाली सिद्ध होगी।
उन्होंने कहा कि ब्रॉड गेज पर संचालित होने वाला यह ट्रेनसेट दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन संचालित ट्रेनों में से एक होगा। इसमें दो ड्राइविंग पावर कार तथा आठ यात्री कोच सहित कुल दस कोच होंगे। लगभग 2,400 किलोवाट की संयुक्त शक्ति क्षमता से लैस यह ट्रेन भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता और आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ट्रेन का डिजाइन, निर्माण और रूपांतरण पूर्णतः स्वदेशी है। यह उपलब्धि मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाने के साथ भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की दक्षता को भी रेखांकित करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से हरियाणा, विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़े इलाकों की रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। यात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। बेहतर संपर्क से उद्योग, व्यापार, निवेश, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास को नई ऊर्जा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत भी इसी दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और हाइड्रोजन ट्रेनसेट परियोजना इस परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने तथा भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के साथ-साथ हरित परिवहन व्यवस्था को नई पहचान देगी और आने वाले समय में देश के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
क्रमांक – 2026
दिव्यांग विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मिलेगा 50 लाख तक का शिक्षा ऋण
हरियाणा पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम की योजना से जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
चण्डीगढ़, 14 जुलाई – हरियाणा सरकार ने दिव्यांग विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने, उच्च शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शिक्षा ऋण योजना लागू की है। वर्तमान समय में उच्च शिक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार की यह योजना ऐसे विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें बेहतर शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ाने का प्रयास है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम के माध्यम से पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को भारत और विदेश के शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए 50 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी दिव्यांग विद्यार्थी प्रवेश लेने के बाद अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़े। योजना का लाभ भारत के साथ-साथ विदेशों में अध्ययन करने वाले पात्र विद्यार्थियों को भी मिलेगा।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हरियाणा का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। उसकी दिव्यांगता कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए। सामान्य श्रेणी के आवेदकों की आयु 18 से 55 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, जबकि मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष रखी गई है। आवेदक के पास भारत या विदेश के किसी मान्यता प्राप्त व्यावसायिक अथवा तकनीकी पाठ्यक्रम में प्रवेश होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, परिवार पहचान पत्र अनिवार्य है। यदि शिक्षा ऋण की राशि 15 लाख रुपये या उससे अधिक है तो भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तहत जारी यूडीआईडी पंजीकरण भी अनिवार्य होगा। योजना के तहत भारत और विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को ट्यूशन फीस, शैक्षणिक खर्च और अध्ययन से जुड़े अन्य आवश्यक व्ययों की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।
प्रवक्ता ने बताया कि आवेदन करते समय आवेदक को पहचान, नागरिकता एवं आयु का प्रमाण, आधार कार्ड, हरियाणा का अधिवास प्रमाण-पत्र, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट फोटो, परिवार पहचान पत्र, प्रवेश पत्र, कोर्स की अवधि का विवरण, संबंधित संस्थान की फीस संरचना तथा पिछली शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण-पत्र जमा करने होंगे। निगम द्वारा समय-समय पर इस शिक्षा ऋण योजना के तहत आवेदन मांगे जाते हैं। योग्य आवेदक समय-समय पर विभाग की वेबसाइट पर विजिट कर योजना संबंधित और अधिक जानकारी प्राप्त करते हुए निर्धारित आवेदन तिथि में अप्लाई कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम द्वारा यह योजना दिव्यांग को शिक्षा, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद ये विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे और समाज की मुख्यधारा में अधिक प्रभावी भूमिका निभा पाएंगे। निगम की पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हुए आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करें और इस योजना का लाभ उठाएं।
क्रमांक – 2026
प्रधानमंत्री मोदी का 17 जुलाई का दौरा हरियाणा के विकास को देगा नई रफ्तार: डॉ. अरविंद शर्मा
गोहाना में सहकारिता मंत्री ने कहा – हाइड्रोजन ट्रेन से शुरू होगा स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक परिवहन का नया युग
ईको फ्रेंडली रेल के साथ-साथ रैली भी होगी ईको फ्रेंडली
चंडीगढ़, 14 जुलाई — हरियाणा के सहकारिता मंत्री डाॅ. अरविंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का 17 जुलाई को जींद आगमन हरियाणा के विकास इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। प्रधानमंत्री जींद की धरती से प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे और देश की पहली हाइड्रोजन आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर भारत को हरित एवं आधुनिक परिवहन के नए युग में प्रवेश कराएंगे। उन्होंने कहा कि जींद में पहली बार इको फ्रेंडली रैली होगी, जिसको लेकर आमजन, कार्यकर्ताओं में भरपूर जोश और उत्साह है।
सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा गोहाना में मंगलवार को विश्राम गृह मे पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है।
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि जींद से गोहाना होते हुए सोनीपत तक चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के लिए गौरव का विषय है। यह केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन टेक्नोलॉजी की दिशा में भारत के बढ़ते कदमों का प्रतीक है। हाइड्रोजन ट्रेन के माध्यम से हरियाणा देश के हाइड्रोजन हब के रूप में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का हरियाणा दौरा प्रदेश में रिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की निरंतरता को दर्शाता है। रेल, सड़क, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक साथ बड़े प्रोजेक्ट शुरू होने से हरियाणा के विकास को नई गति मिलेगी। इन परियोजनाओं से उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों में तेजी से वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज और नारनौल में महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को ऐतिहासिक मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र एलिवेटेड रेलवे ट्रैक परियोजना शुरू होने से लंबे समय से चली आ रही यातायात और जाम की समस्या का स्थायी समाधान होगा। वहीं कुरुक्षेत्र में बनने वाला आधुनिक सिख म्यूजियम धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों को नई पहचान देगा।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे का हरियाणा खंड, अंबाला-काला अम्ब ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर, जींद-गोहाना राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-352ए) ग्रीनफील्ड कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं प्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी। इनसे यात्रा का समय कम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हांसी-बरवाला फोरलेन और बीकानेर-सिवानी-सोनीपत सड़क परियोजनाएं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेंगी। मजबूत सड़क नेटवर्क प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों का आधार बनेगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित रहने वाली सरकार नहीं है, बल्कि योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कर जनता को उसका लाभ पहुंचाने में विश्वास रखती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हरियाणा आधुनिक आधारभूत ढांचे, पारदर्शी प्रशासन और सुशासन का मॉडल बन रहा है। प्रधानमंत्री की सोच है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चलें। हाइड्रोजन ट्रेन इसी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो आने वाले समय में परिवहन क्षेत्र में नई क्रांति का आधार बनेगी। उन्होंने कहा कि 17 जुलाई को जींद में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा विकास, विश्वास और जनभागीदारी का बड़ा संदेश देगी। यह दिन हरियाणा के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा, जब प्रदेश को नई ऊर्जा, नई गति और नए अवसरों की सौगात मिलेगी।
क्रमांक – 2026
38 चिकित्सा अधिकारी प्रमोट होकर बने वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
“हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन” की वर्षों पुरानी मांग पूरी
चंडीगढ़, 14 जुलाई – हरियाणा सरकार ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने राज्य के 38 चिकित्सा अधिकारियों को पदोन्नत कर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्त कर दिया है। सरकार के इस कदम से “हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन” की एक बहुत पुरानी और चीर लंबित मांग पूरी हो गई है, जिससे राज्य के सरकारी डॉक्टरों में खुशी की लहर है।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पिछले दिनों एसोसिएशन के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चिकित्सा अधिकारियों की पदोन्नति में आ रही बाधाओं और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के पद पर प्रमोशन की मांग को प्रमुखता से उनके सामने रखा था। डॉक्टरों की जायज मांगों और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने इस पर तुरंत सकारात्मक रुख अपनाया और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस संबंध में फाइल पर तेजी से काम करते हुए त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के बाद विभाग ने तत्परता से काम किया और आधिकारिक तौर पर 38 चिकित्सा अधिकारियों को एसएमओ (SMO) के पद पर प्रमोट करने के आदेश जारी कर दिए। सरकार के इस फैसले से न केवल डॉक्टरों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि विभिन्न सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी मिलने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। एसोसिएशन ने सरकार के इस त्वरित फैसले का स्वागत करते हुए स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त किया है।
क्रमांक -2026
जंगबीर सिंह
हरियाणा में जलापूर्ति एवं सीवरेज व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती, 2,534.39 करोड़ रुपये की 712 परियोजनाओं को मंजूरी : कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा
कहा: डबल इंजन सरकार प्रदेश में जलापूर्ति, सीवरेज और स्वच्छता सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है
हरियाणा के अलग अलग इलाकों में नई जलापूर्ति, सीवरेज एवं बरसाती जल निकासी व्यवस्था की मिलेगी सुविधा
बहादुरगढ़, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, जगाधरी और रोहतक के लिए भी प्रमुख परियोजनाएं को मिली स्वीकृति
चंडीगढ़,14 जुलाई- हरियाणा के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि प्रदेश में पेयजल, सीवरेज एवं स्वच्छता संबंधी आधारभूत ढांचे को मजबूत करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026-27 के लिए 2,534.39 करोड़ रुपये की लागत से 712 नई जलापूर्ति, सीवरेज एवं बरसाती जल निकासी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके तहत हरियाणा के अलग अलग इलाकों में नई जलापूर्ति, सीवरेज एवं बरसाती जल निकासी संबंधित परियोजनाओं में अब तेजी से काम पूरा होगा, इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि आमजन को बेहतर से बेहतर सुविधा मिले।
कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार प्रदेश में जलापूर्ति, सीवरेज और स्वच्छता सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना, बेहतर सीवरेज व्यवस्था उपलब्ध कराना और जल प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाना है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आमजन को बेहतर सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (WSSB) की 59वीं बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए 2,534.39 करोड़ रुपये की लागत से 712 नई जलापूर्ति, सीवरेज एवं बरसाती जल निकासी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके तहत तेजी से विकसित हो रहे शहरों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 603.32 करोड़ रुपये की लागत से 69 जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी और कुरुक्षेत्र की प्रमुख जलापूर्ति योजनाएं शामिल हैं।
मंत्री ने बताया कि शहरी सीवरेज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 526.49 करोड़ रुपये की लागत से 18 सीवरेज परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें बहादुरगढ़, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, जगाधरी और रोहतक की प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ऐलनाबाद और बवानी खेड़ा में बरसाती जल निकासी व्यवस्था में सुधार के लिए 19.11 करोड़ रुपये की लागत से 2 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 1,108.28 करोड़ रुपये की लागत से 603 नई जलापूर्ति संवर्धन एवं सुधार योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं के तहत नए नलकूप लगाए जाएंगे, नहर आधारित जल घर बनाए जाएंगे, मौजूदा नहर आधारित जल घरों का संवर्धन किया जाएगा, विभिन्न बूस्टिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, नए विकसित क्षेत्रों में नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी तथा पुरानी पाइप लाइनों को बदला जाएगा।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सीवरेज सुविधाओं के विस्तार के लिए 203.58 करोड़ रुपये की लागत से 13 महाग्राम सीवरेज परियोजनाओं तथा 71.58 करोड़ रुपये की लागत से 3 महाग्राम जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें उज्जीना, बबाइन तथा रामसरण माजरा, उमरी एवं टिकली समूह के 5 गांवों की प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त ग्रामीण बस्तियों में पेयजल आपूर्ति के लिए 2 कार्यों को 0.44 करोड़ रुपये तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए 2 कार्यों को 1.58 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विभाग को सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में पूरा करने, विभागीय प्रतिष्ठानों पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने तथा जल शुल्क संग्रहण में सुधार लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 31 मार्च, 2027 तक शहरी जल कनेक्शनों का दायरा 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 93 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि सुरक्षित पेयजल, प्रभावी सीवरेज व्यवस्था और सतत जल प्रबंधन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल, बेहतर स्वच्छता सुविधाएं तथा आधुनिक जल प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतया प्रतिबद्ध है।
क्रमांक-2026
‘एक पेड़ मां के नाम’ बने जनआंदोलन, हर व्यक्ति लगाए और संभाले एक पौधा: राव नरबीर सिंह
77वें वन महोत्सव से हरियाणा देगा हरित भविष्य का संदेश, 2.10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
पर्यावरण संरक्षण के लिए हरियाणा का बड़ा कदम, 100 करोड़ रुपये का ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड
पौधारोपण ही नहीं, पौधों का संरक्षण भी जरूरी: राव नरबीर सिंह
चंडीगढ़, 15 जुलाई -हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने प्रदेश के लोगों से आह्वान किया है कि मानसून के दौरान हर वर्ष मनाए जा रहे वन महोत्सव के दौरान पौधारोपण करें और प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ संकल्प को पूरा करें। देश में जलवायु परिवर्तन आज एक वैश्विक समस्या बन गई है। हर कोई देश अपने – अपने तरीकों से वैज्ञानिक अनुसंधान के कार्यक्रम चलाकर पर्यावरण संतुलन पर जोर दे रहा है और इसी को देखते हुए हरियाणा ने पहली बार 100 करोड़ रुपये के ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड का किया गया बजट प्रावधान किया है। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 2 करोड़ 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। यह अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत चलाया जा रहा है।इसके अलावा, राज्य में ‘कैंपा’ (CAMPA) योजना के तहत भी 20 लाख और पौधे लगाने की मंजूरी दी गई है।
मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि पौधा लगाना ही काफी नहीं है बल्कि जब तक पौधा जड़ पकड़कर पेड़ का रुप ना ले तब तक उसकी देखभाल करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश में वन महोत्सव बनाने की शुरुआत वर्ष 1950 में की गई थी और हर वर्ष नए थीम के साथ सभी राज्य अपने यहां मानसून के दौरान लगभग एक महीने तक कार्यक्रम चलाते हैं। इस वर्ष 77 वें वन महोत्सव के दौरान हरियाणा में भी राज्यस्तरीय व जिला स्तरीय अनेक आयोजन किए जाएंगे। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने कैच द रेन अभियान चलाया है ताकि लोग बारिश के पानी की एक-एक बूंद बचाकर जल संचय का संकल्प लें। मानसून के जल का अधिकतम संचय हो इस लिए आस-पास के तालाबों और जलाशयों को संवारें और इस्तेमाल के योग्य बनाएं।
उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस-2026 भी हरियाणा के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण साबित हुआ। एक ओर जहां पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़कर हरियाणा को हरित और पर्यावरण-अनुकूल राज्य बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार पर्यावरण संरक्षण, हरित ऊर्जा और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दूरदर्शी एवं प्रभावी कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भावी पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण और गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना भी है। पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति एक-दूसरे के पूरक हैं तथा हरित प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1972 में पर्यावरण संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 1973 में ‘ओनली वन अर्थ’ थीम के साथ इसका पहला आयोजन हुआ था। इसके बाद जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, वनों की कटाई, खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन जैसे विषयों को केंद्र में रखकर यह दिवस मनाया जाता रहा है। इस वर्ष की थीम ‘प्रकृति से प्रेरित—जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए’ निर्धारित की गई है, जो प्रकृति आधारित समाधानों के माध्यम से जलवायु चुनौतियों का सामना करने का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित 100 करोड़ रुपये का ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड हरियाणा में शून्य-उत्सर्जन वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, शहरी हरितीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि तथा प्रकृति-आधारित समाधानों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से वायु एवं जल प्रदूषण की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार आधारित निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।
क्रमांक-2026
सत्यव्रत/सोनिया
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पर जाना आवश्यक, इसलिए प्रधानमंत्री सौर, वायु और हाइड्रोजन ऊर्जा को दे रहे प्रोत्साहन – ऊर्जा मंत्री अनिल विज
चण्डीगढ, 14 जुलाई — देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ करने जा रहे हैं, इसको लेकर हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि वर्तमान में जिस प्रकार से मौजूदा परिस्थिति बनी हुई है तेल, कोयला जैसे स्रोत धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं तो वैकल्पिक स्रोत पर जाना बहुत आवश्यक है। इसलिए प्रधानमंत्री सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा और हाइड्रोजन ऊर्जा को बहुत प्रोत्साहन दे रहे हैं।
श्री विज आज पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश को नित नई ऊंचाइयों पर लेकर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन भी हरियाणा से होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मौजूदा परिस्थितियां बनी हुई हैं और तेल व कोयला जैसे स्रोत धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं तो वैकल्पिक स्रोतों पर जाना बहुत आवश्यक है। इसलिए प्रधानमंत्री सोलर ऊर्जा, वायु ऊर्जा को और हाइड्रोजन ऊर्जा को बहुत प्रोत्साहन दे रहे हैं।


