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फरीदाबाद की ग्लोबल सिटी में विश्व स्तर का आईकॉनिक टावर बनाने की कार्य योजना की जाए तैयार – मुख्यमंत्री  

फरीदाबाद की ग्लोबल सिटी में विश्व स्तर का आईकॉनिक टावर बनाने की कार्य योजना की जाए तैयार – मुख्यमंत्री

 

पिंजौर की हवाई पट्टी का किया जाएगा विस्तार

 

चण्डीगढ, 12 अगस्त – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार द्वारा फरीदाबाद में विकसित की जा रही ग्लोबल सिटी के अन्दर तीन माह में बिजली, पानी आदि मूलभूत योजनाएं पूरी करने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जाए। इसके अलावा ग्लोबल सिटी में विश्व स्तर का आईकॉनिक टावर बनाने के लिए कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने पिंजौर की हवाई पट्टी का विस्तार करने के लिए भी कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री बुधवार को चंडीगढ़ में राज्य प्रगति पोर्टल समीक्षा की चौथी मिटिंग की अध्यक्षता कर रहे थे।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ग्लोबल सिटी के पूर्ण हो जाने के बाद इसमें मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सुलभ हो सकेंगे। इस 1000 एकड़ में विकसित की जा रही ग्लोबल सिटी में 1000 करोड़ रुपए की लागत से भौंतिक प्रगति का 80 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष कार्य आगामी दिसम्बर माह तक पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट एवं सुव्यवस्थित योजना पर आधारित विकसित की जा रही ग्लोबल सिटी में शिक्षण, स्वास्थय संस्थानों के अलावा मॉल, थिएटर, लग्जरी होटल, सामुदायिक केन्द्र, मेरिज पैलेस आदि बनाने के अलावा नमो भारत मैट्रो ट्रेन भी चलाई जाएगी। इसके अलावा विशेष वाटर ट्रीटमेंट प्लांट  तथा ग्रीन लेक भी बनाई जाएगी तथा इस सिटी को द्वारका एक्सप्रेस वे से जोड़ने का कार्य किया जाएगा ताकि आवागमन सुगम हो सके।

 

नांगल चौधरी के लॉजिस्टिक हब में 23 अगस्त से चलेगी ट्रेन

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि नांगल चौधरी में एकीकृत बहु मॉडल लॉजिस्टिक हब परियोजना विकसित की गई है। इसमें बिजली, सिंचाई, सड़कें, बाहरी रेल साईडिंग, आंतरिक रेल यार्ड बनाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा आंतरिक इन मोशन वे ब्रिज भी स्थापित किया जा रहा है जो आगामी 6 माह में बनकर तैयार हो जाएगा। इस पर चलने वाली विशेष ट्रेन का मुख्यमंत्री 23 अगस्त को स्वागत करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिसार में बनाए जा रहे आईएमसी में व्यापक स्तर पर  बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इण्डस्ट्रीयल मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर में स्किल डिवेलेपमेंट सेंटर, कन्वेंशन सेंटर एवं एग्जीबिशन हॉल, लोजिस्टिक पार्क तथा मल्टी स्पेशलिस्ट होस्पीटल, डिफेंस एयरो स्पेस, एग्रो फुड प्रोसेसिंग युनिट, गारमेंट टैक्सटाईल, उद्योग भी विकसित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएमसी में एयरपोर्ट के लिए वाटर सप्लाई, 220 केवी का बिजली घर बनाया जा रहा है। एयरपोर्ट की प्रथम चरण में 1578 एकड़ भूमि की चारदिवारी बनाने का कार्य भी जारी है।

 

यादविन्द्रा गार्डन में बनेगा 100 कमरों का फाईव स्टार होटल

 

टिक्करताल में बनेगा एडवेंचर पार्क

 

उन्होंने बताया कि स्वदेश योजना 2 के तहत पंचकूला के यादविन्द्रा गार्डन को रोजगार सृजन एवं पर्यटक केन्द्र के रूप ओर अधिक विकसित किया जाएगा। गार्डन का नवीनीकरण करने के अलावा इसमें उच्च स्तरीय एकीकृत वेडिंग, कन्वेंशन एवं हॉस्पिटेलिटी डेस्टीनेशन बनाए जाएगें। इसके अलावा 100 कमरों का होटल बनाने के साथ पिंजौर की हवाई पट्टी का भी विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि टिक्करताल में भी एडवेंचर पार्क बनाने का कार्य किया जाएगा तथा थापली के एडवेंचर पार्क को भी विकसित किया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरूण गुप्ता, आयुक्त एवं सचिव उद्योग एवं वाणिज्य डा. अमित अग्रवाल, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के आयुक्त एवं सचिव के मकरंद पांडुरंग, विशेष सचिव मोनिटरिंग एवं कोर्डिनेशन प्रियकां सोनी, एमडी एचएसआईडीसी सुशील सारवान, निदेशक पर्यटन विभाग पार्थ गुप्ता के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी भाग ले रहे थे।

क्रमांक 2026

 

 

 

 

 

 

 

बारिश को देखते हुए अधिकारी मुख्यालय न छोड़ें, जल निकासी के लिए मशीनरी व अन्य इंतजाम पूरी तरह तैयार रखें : कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा

 

पुराने व खराब वाटर टैंकों के अपग्रेडेशन के लिए सर्किल वाइज डाटा व एस्टीमेट तुरंत मुख्यालय भेजने के निर्देश

 

सड़कों की तर्ज पर जन स्वास्थ्य विभाग भी बनाए सर्किल वाइज इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, लाइफ स्पैन पूरी होने से पहले हो रखरखाव व बदलाव

 

चंडीगढ़, 12 अगस्त। हरियाणा के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण (भवन एवं सड़क) मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने बारिश के मौसम को देखते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को मुख्यालय न छोड़ने तथा जल निकासी की व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए मशीनरी, पाइप, मोटर तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा बुधवार को अपने कार्यालय में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर बारिश के दौरान जल निकासी, पेयजल व्यवस्था, वाटर टैंकों, विभागीय इंफ्रास्ट्रक्चर तथा जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने हाल ही में हुई बारिश के दौरान प्रदेश के विभिन्न सर्किलों में पानी की निकासी के लिए किए गए इंतजामों की सर्किल वाइज जानकारी भी हासिल की। इस दौरान विभाग के प्रमुख अभियंता श्री देवेंद्र दहिया, मुख्य अभियंता मौजूद थे। जबकि प्रदेश भर के एसई, एसडीओ और अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े थे।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल निकासी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुपर सकर मशीन, जेटिंग मशीन सहित उपलब्ध अन्य मशीनरी का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए। इसके साथ ही पाइप, मोटर और अन्य आवश्यक उपकरण पर्याप्त मात्रा में तैयार रखे जाएं, ताकि बारिश के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या आने पर मौके पर ही तत्काल कार्रवाई की जा सके।

मंत्री श्री गंगवा ने कहा कि सावन के महीने और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए अधिकारी किसी भी सूरत में मुख्यालय न छोड़ें और अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करें। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान जलभराव अथवा जल निकासी से संबंधित कोई समस्या सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।

 

पुराने वाटर टैंकों के अपग्रेडेशन के लिए बनेगा प्लान

कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने प्रदेशभर में खराब हो चुके वाटर टैंकों तथा पुराने ईंटों से बने वाटर टैंकों की स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को इनका सर्किल वाइज डाटा तत्काल मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे वाटर टैंकों के अपग्रेडेशन के लिए एस्टीमेट भी तुरंत तैयार किए जाएं, ताकि विभागीय स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर इनके सुधार एवं अपग्रेडेशन का कार्य जल्द शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे आमजन को बेहतर एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।

 

सड़कों की तर्ज पर पीएचई बनाए इंफ्रास्ट्रक्चर की लाइफ-साइकिल प्लानिंग

कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि जिस प्रकार लोक निर्माण विभाग में सड़कों के लिए पहले से प्लानिंग की जाती है कि किस सड़क की कितने समय बाद कारपेटिंग, मरम्मत या नवीनीकरण की आवश्यकता होगी और उसकी डीएलपी (Defect Liability Period) क्या है, उसी प्रकार जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को भी सर्किल वाइज अपनी पूरी आधारभूत संरचना की लाइफ-साइकिल प्लानिंग तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग की किसी भी व्यवस्था के खराब होने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर की निर्धारित लाइफ स्पैन को ध्यान में रखते हुए समय रहते उसकी मरम्मत, रखरखाव अथवा बदलाव एवं नवीनीकरण की कार्ययोजना तैयार होनी चाहिए, ताकि आमजन को सेवाएं प्रभावित न हों।

 

जल संरक्षण और पानी के पुनः उपयोग पर भी जोर

बैठक में रिचार्ज बोरवेल, पानी के पुनः उपयोग तथा आरसीसी वाटर टैंकों के निर्माण से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। मंत्री श्री गंगवा ने जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और जहां संभव हो, पानी के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने वाटर वर्क्स की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि पेयजल से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी हो और लोगों को स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध करवाना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

 

बारिश के दौरान फील्ड में रहे अधिकारी

कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि वर्तमान मौसम को देखते हुए अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बारिश के दौरान वरिष्ठ अधिकारी मुख्यालय न छोड़ें और किसी भी आपात स्थिति में संबंधित अधिकारी एवं मशीनरी तुरंत मौके पर पहुंचे।

उन्होंने जिला स्तर पर होने वाली बैठकों में भी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आवश्यकता के अनुसार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकों में शामिल होकर विभागीय मुद्दों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बारिश के मौसम में जल निकासी से लेकर पेयजल आपूर्ति तक सभी व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त रहें और फील्ड में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यों में समयबद्धता, बेहतर सुपरविजन और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करते हुए आमजन को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं।

क्रमांक 2026

 

 

 

 

 

 

हरियाणा में प्राइम खसरों की पहचान और उन्हें चिन्हित करने के लिए आसान और डिजिटल व्यवस्था को मंजूरी

 

राजस्व विभाग ने भूमि अभिलेख प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए निर्धारित एसओपी और उपयोगकर्ता पुस्तिका को भी किया स्वीकृत

 

अधिकृत अधिकारी तय डिजिटल प्रक्रिया के तहत प्राइम खसरों का सत्यापन और निर्धारण कर सकेंगे

 

चंडीगढ़, 12 अगस्त- हरियाणा सरकार ने प्राइम खसरों की पहचान और उन्हें चिन्हित करने के लिए एक आसान और तय डिजिटल व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। इससे पूरे राज्य में प्राइम खसरा तय करने की प्रक्रिया एक समान तरीके से लागू की जा सकेगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्व हरियाणा पोर्टल पर प्राइम खसरा मॉड्यूल के साथ-साथ इसके संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और उपयोगकर्ता पुस्तिका को भी मंजूरी दी है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राइम खसरा मॉड्यूल को प्राइम खसरों की पहचान और चिन्हित करने के लिए विकसित किया गया है। इसके तहत अधिकृत राजस्व अधिकारी संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद प्राइम खसरे का चयन और निर्धारण कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना तथा भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल प्रबंधन को मजबूत करना है। इससे अधिकारियों को प्राइम खसरे के सत्यापन, दस्तावेज तैयार करने और उसे तय करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया मिलेगी। इससे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके अपनाने की जरूरत नहीं रहेगी।

क्रियान्वयन के लिए एसओपी और उपयोगकर्ता पुस्तिका मंजूर

सभी जिलों में इस मॉड्यूल का एक समान इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को मंजूरी दी है। इसमें पूरी प्रक्रिया और अधिकारियों की जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। अधिकारियों की सुविधा के लिए उपयोगकर्ता पुस्तिका के संस्करण 1.0 को भी मंजूरी दी गई है। इसमें मॉड्यूल चलाने के लिए आसान चरणबद्ध निर्देश और स्क्रीनशॉट दिए गए हैं। इन दस्तावेजों को विभागीय स्तर पर जांच के बाद तैयार किया गया है। मॉड्यूल का परीक्षण भी किया जा चुका है। इससे जुड़े परीक्षण मामलों और सुरक्षा प्रमाण-पत्र को भी दस्तावेजों के साथ शामिल किया गया है।

राजस्व अधिकारियों तक पहुंचाए जाएंगे दिशा-निर्देश

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि स्वीकृत एसओपी और उपयोगकर्ता पुस्तिका मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, उपमंडल अधिकारियों (नागरिक), तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भेजी जाएगी। इससे अधिकारियों को मॉड्यूल के इस्तेमाल और इसके तहत की जाने वाली कार्रवाई के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों को विभागीय पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा, ताकि अधिकारी इन्हें जरूरत के समय देख सकें और इसका इस्तेमाल प्रशिक्षण एवं क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जा सके।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि प्राइम खसरा मॉड्यूल को मंजूरी मिलना हरियाणा में डिजिटल राजस्व प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत प्राइम खसरा की पहचान के लिए एक तय और पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें रिकॉर्ड का सत्यापन और जरूरी दस्तावेज भी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।

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