सूरजकुंड दिवाली मेले से स्वदेशी उत्पादों और कारीगरों को मिल रहा नया बाजारः मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*
*कहा, स्थानीय उत्पादों को अपनाना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को मजबूत करने का सशक्त माध्यम*
*सूरजकुंड दिवाली मेला भारतीय हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को करीब से जानने का अवसर: मुख्यमंत्री’*’
*स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 6 लाख से अधिक परिवार जुड़े, अब तक 596 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई*
*23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित होगा यह मेला*
चंडीगढ़, 23 अक्तूबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड दिवाली मेला आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी के संकल्प को साकार करने वाले श्रम साधकों, कारीगरों और कलाकारों को नया बाजार उपलब्ध करवाने का एक सार्थक प्रयास है। इस मेले का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे ग्राहकों तक पहुंचाना और कारीगरों को उनके परिश्रम का उचित लाभ दिलाना है। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय उत्पादों पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, तो कारीगरों को नए ग्राहक मिलेंगे और उनके काम को आगे बढ़ाने का उत्साह भी बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में दिवाली मेले के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समारोह में कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
श्री नायब सिंह सैनी ने मेले में आने वाले सभी आगंतुकों और पर्यटकों का स्वागत करते हुए उन्हें करवा चौथ, अहोई अष्टमी, धनतेरस, दीपावली, विश्वकर्मा पूजन, गोवर्धन पूजन, भाई दूज और छठ पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित यह मेला भारतीय हस्तशिल्प, लोक संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों के खानपान की विविधता को प्रदर्शित करेगा। यहां आने वाले परिवार देश की समृद्ध परंपराओं को करीब से जान सकेंगे और कारीगरों व शिल्पकारों के उत्पादों को खरीदने का अवसर भी प्राप्त करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आत्मनिर्भरता और ‘वोकल फॉर लोकल’ को जनभागीदारी से जोड़ना आवश्यक है। इसमें गांव के कुम्हार, बुनकर, बढ़ई, छोटे दुकानदार और महिला उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सूरजकुंड का दिवाली मेला इसी भागीदारी को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि दीपावली की सबसे सुंदर रोशनी वह है, जो हमारे घर के साथ-साथ किसी मेहनतकश परिवार के घर को भी रोशन करे। त्योहारों पर स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पाद खरीदने से उनके परिवारों की आजीविका को सहारा मिलता है। स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से कारीगरों को अगला काम शुरू करने की ताकत मिलती है, कच्चा माल खरीदने में मदद मिलती है और उनके साथ काम करने वाले अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी अपनाने का अर्थ अपने देश की प्रतिभा पर विश्वास करना और उसे आगे बढ़ने का अवसर देना है। भारत में बने अच्छे उत्पादों को अपने जीवन में स्थान देकर हम अपने कारीगरों के कौशल और मेहनत का सम्मान कर सकते हैं। घर की सजावट, पहनावे और त्योहारों के उपहारों में भारतीय हस्तशिल्प को प्राथमिकता देने से कारीगरों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने उत्पादों को और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर सांझा बाजार स्थापित किए जा रहे हैं। विपणन और ब्रांडिंग में सहयोग देने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाए गए हैं। अब तक प्रदेश में 10 सांझा बाजार बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ‘स्वाप्न डिजिटल ग्राम बाजार पोर्टल’ और ‘सांझा बाजार सेल्स पोर्टल’ शुरू किए गए हैं। इन पोर्टलों पर पंजीकरण करवाकर कारीगर और स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद ऑनलाइन बेच सकते हैं। ऑनलाइन बाजार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। इन समूहों के उत्पाद प्रदेशभर में अपनी पहचान बना रहे हैं। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अब तक 67641 स्वयं सहायता समूहों से 6 लाख से अधिक परिवारों को जोड़ा जा चुका है। इन समूहों को रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सरल ऋण के माध्यम से वित्तीय सहायता दी जाती है। अब तक 596 करोड़ रुपये की विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है। सामुदायिक निवेश निधि की राशि को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रुपये कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की धरती सूरजकुंड शिल्प मेले, कुरुक्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और पिंजौर के आम उत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से देश-दुनिया के लोगों को जोड़ती रही है। ऐसे आयोजन स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने और नए ग्राहकों से जुड़ने का अवसर देते हैं। सूरजकुंड दिवाली मेला भी इसी सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने मेले में भाग लेने वाले सभी कारीगरों और आगंतुकों से स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेले और उसके आसपास सफाई रखें, खरीदारी के लिए कपड़े का थैला साथ लाएं तथा भोजन और पानी की बर्बादी से बचें। मिट्टी के दीये और टिकाऊ सजावटी वस्तुओं को अपनाकर त्योहारों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में योगदान दें। बच्चों को भी इन अच्छी आदतों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि उनके भीतर प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो।
*विरासत एवं पर्यटन मंत्री ने एनसीआर के लोगों से किया दिवाली मेले में खरीददारी का आह्वान*
हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि आज सूरजकुंड धार्मिक आस्था के केंद्र से लेकर अंतर्राष्ट्ररीय व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। इस वर्ष सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का 20 लाख लोगों ने आनंद लिया जिनमें 50 देशों के पर्यटक भी शामिल थे। इसी तर्ज पर सूरजकुंड दीवाली मेला भी धीरे-धीरे लोगों के दिलों में वही जगह बना रहा है। उन्होंने दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के लोगों से आह्वान किया कि वे अगले 4 दिन तक यहां लगाई गई 300 दुकानों के माध्यम से दिवाली की खरीददारी करें और मेले का आनंद लें। इससे स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा।
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हम सबको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के साथ आगे बढ़ना है और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के कार्य को पूर्ण करने में जिसकी जो भूमिका है वह निभानी चाहिए। सूरजकुंड हरियाणा व भारत की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने का आधार साबित होगा।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि हरियाणा के राखीगढ़ी में पुरातात्विक महत्व की साइट की खुदाई का कार्य चल रहा है जिसके माध्यम से 10 हजार साल पुरानी सभ्यता को देखने का अवसर मिल रहा है। राखीगढ़ी के माध्यम से सनातन संस्कृति की झलक देखी जा सकती है। उन्होंने आह्वान किया कि अधिक से अधिक लोग राखीगढ़ी जाकर हजारों साल पुरानी सभ्यता को देखें और उस समय के जीवन को अनुभव करें।
इस अवसर पर फरीदाबाद की मेयर श्रीमती प्रवीन बत्रा जोशी, पूर्व मंत्री श्रीमती सीमा त्रिखा, पर्यटन मंत्री श्री अरविंद शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती रीटा शर्मा, पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल, प्रबंध निदेशक श्री पार्थ गुप्ता, पंकज पूजन रामपाल, विपिन बैंसला, पूर्व विधायक श्री नरेंद्र गुप्ता, सहित प्रदेशभर से आए कारीगर, शिल्पकार, कलाकार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
क्रमांक -2026
सीएम विंडो और जनसंवाद शिकायतों का समय पर हो निपटान- भोपाल सिंह खदरी
–प्रदेश सरकार की आमजन की हर समस्या का पारदर्शी और संतोषजनक समाधान करने का है लक्ष्य
चंडीगढ़, 23 अक्टूबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री के विशेष अधिकारी श्री भोपाल सिंह खदरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएम विंडो और जनसंवाद पोर्टल पर प्राप्त होने वाली सभी समस्याओं का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निपटान सुनिश्चित किया जाए। समस्याओं के समाधान के उपरांत इसकी एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तुरंत ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाए, ताकि नागरिकों को उनकी समस्याओं के निराकरण का वास्तविक लाभ मिल सके।
श्री खदरी शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय चंडीगढ़ स्थित अपने कार्यालय में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में गृह विभाग, पुलिस विभाग, पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन, वक्फ बोर्ड, तकनीकी शिक्षा तथा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सहित कई प्रमुख विभागों से संबंधित सीएम विंडो और जनसंवाद की शिकायतों की गहन समीक्षा की गई।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के ग्रामीण व शहरी राशन डिपो संचालकों को पेडिंग कमिशन को जल्द दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों के निर्देश दिए कि कालेजों के एससी व बीसी विद्यार्थियों को समय पर स्कोलरशिप दी जाए।
वक्फ बोर्ड और जेल विभाग को विशेष निर्देश
बैठक के दौरान श्री खदरी ने वक्फ बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जहां-जहां पर वक्फ बोर्ड की जमीनों पर अवैध कब्जों की शिकायतें हैं, उनकी एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसके अतिरिक्त, जेल विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जेल से जुड़ी शिकायतों का प्राथमिकता से निवारण किया जाए और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाया जाए। साथ ही, कर्मचारियों की सरकार स्तर पर लंबित शिकायतों का भी समयबद्ध समाधान करने के निर्देश दिए गए।
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
श्री खदरी ने अधिकारियों को चेताया कि मुख्यमंत्री स्वयं सीएम विंडो और जनसंवाद की शिकायतों की नियमित रूप से समीक्षा कर रहे हैं। केवल शिकायतों को चिह्नित करना, उन्हें आगे के विभागों में भेजना, या बिना ठोस समाधान के औपचारिकता निभाते हुए मामलों को बंद करना सही निपटान नहीं माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी या आदेशों की अवहेलना को बेहद गंभीरता से लिया जाएगा। लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि आमजन की हर समस्या का पारदर्शी और संतोषजनक समाधान होना चाहिए।
क्रमांक-2026
*सीआईएसएफ का ऐतिहासिक पुनर्गठन, देश के संवेदनषील इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को मिलेगी नई धार*
*1 नवंबर 2026 से लागू होगा नया ढांचा, अब कार्यक्षेत्र आधार पर होगी सुरक्षा की जिम्मेदारी*
*इससे सुरक्षा में आएगी विशेषज्ञता, बेहतर होगा तालमेल और बढ़ेगी संचालन क्षमता*
चण्डीगढ, 23 अक्टूबर – देश के अति संवेदनशील और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अपनी प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रहा है। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद यह नया ढांचा 1 नवंबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा।
इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ की कमान और निगरानी व्यवस्था को अलग-अलग बिजली, कोयला, स्टील, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, बंदरगाह, सरकारी इमारतें, संग्रहालय, स्मारक और मेट्रो जैसे सेक्टर की विशिष्ट सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से ढालना है। इससे सुरक्षा तंत्र में विशेषज्ञता आएगी, संचालन निगरानी बेहतर होगी, सुरक्षा के तरीकों में एकरूपता आएगी और संबंधित मंत्रालयों, विभागों व प्रतिष्ठानों के प्रबंधन के साथ तालमेल और मजबूत होगा।
*क्षेत्रीय कमान से कार्यात्मक विशेषज्ञता की ओर*
सीआईएसएफ वर्तमान में हवाई अड्डों, बंदरगाहों, परमाणु और अंतरिक्ष केंद्रों, पावर प्लांट्स, स्टील प्लांट्स, कोयला खदानों, पेट्रोलियम रिफाइनरियों, नोट छापने वाली प्रेसों, सरकारी इमारतों, ऐतिहासिक स्मारकों और मेट्रो जैसी अलग-अलग तरह की संपत्तियों की सुरक्षा करता है। इनमें हर जगह काम करने की प्रक्रिया, बुनियादी ढांचा, संभावित खतरे और सुरक्षा की चुनौतियां बिल्कुल अलग होती हैं।
पहले सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से इलाके के आधार पर तय होती थी। हालांकि, पिछले 25 वर्षों में सीआईएसएफ ने कुछ खास क्षेत्रों जैसे एविएशन (हवाई अड्डों), परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग में काम के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी। इन क्षेत्रों से मिले अनुभव ने यह साबित किया कि अगर एक तरह के काम वाले प्रतिष्ठानों जैसे सभी एयरपोर्ट्स की निगरानी एक ही कमान के तहत हो, तो वहां के जवानों की ट्रेनिंग बेहतर होती है, सुरक्षा के नियम ज्यादा सटीक बनते हैं और प्रबंधन के साथ तालमेल शानदार रहता है। इसी सफलता को देखते हुए, सीआईएसएफ ने लंबी चर्चाओं और गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब अपने बाकी बचे सभी क्षेत्रीय सेक्टर्स को भी काम के आधार पर पुनर्गठित कर दिया है।
*नए बदलाव में नए सेक्टर्स का गठन यह*
नए ढांचे के तहत मौजूदा क्षेत्रीय सेक्टर्स में सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक और एमआरटीएस सेक्टर, मौजूदा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सेक्टर को अब पुनर्गठित कर नई दिल्ली मुख्यालय को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
नई दिल्ली को पावर प् सेक्टर और नॉर्थ ईस्टर्न कोलकाता को पावर सेक्टर प्प् बनाया गया है। कोयला और स्टील ईस्टर्न सेक्टर रांची को अब पूरी तरह से कोयला सेक्टर में बदला गया है, जबकि सेंट्रल सेक्टर भिलाई अब समर्पित स्टील सेक्टर होगा। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर गुवाहाटी को बदलकर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर कर दिया गया है।
बंदरगाह सेक्टर में भारत के समुद्री व्यापार की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, वेस्टर्न सेक्टर मुंबई को वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर पश्चिमी तट और साउथ सेक्टर चेन्नई को ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर पूर्वी तट में तब्दील कर दिया गया है।
मौजूदा परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग सेक्टर बेंगलुरु, एयरपोर्ट सेक्टर प् नई दिल्ली और एयरपोर्ट सेक्टर प्प् बेंगलुरु पहले की तरह ही अपने कार्यात्मक ढांचे के तहत काम करते रहेंगे। बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच यह एक आवष्यक सुधार एवं पुनर्गठन ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब सीआईएसएफ की भूमिका सिर्फ पारंपरिक औद्योगिक सुरक्षा से आगे बढ़कर नई और विशेष सुरक्षा जिम्मेदारियों तक फैल रही है।
सीआईएसएफ को अंतर्राष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा कोड के तहत बंदरगाहों के लिए एक मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन नामित किया गया है। बंदरगाह क्षेत्र में इस नए ढांचे से विशेष सुरक्षा विशेषज्ञता विकसित करने में मदद मिलेगी।
बल को जम्मू कश्मीर में अति संवेदनशील जेलों की सुरक्षा का जिम्मा भी सौंपा गया है। साथ ही, सीआईएसएफ को संवेदनषील सरंचना के लिए हवाई सुरक्षा की नोडल एजेंसी भी बनाया गया है। इन जिम्मेदारियों के लिए विशेष ट्रेनिंग, स्पष्ट जवाबदेही और उभरते खतरों से निपटने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
सुरक्षा में तकनीक के बढ़ते महत्व को देखते हुए सीआईएसएफ प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर अपनी साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटीड्रोन क्षमताओं को भी लगातार मजबूत कर रहा है ताकि महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को साइबर हमलों और संदिग्ध ड्रोन्स के खतरों से बचाया जा सके।
देश के लिए इस पुनर्गठन का सीधा मतलब है कि अब भारत की रणनीतिक और आर्थिक संपत्तियों की सुरक्षा एक बेहद कुशल और सेक्टर विशेष सुरक्षा तंत्र के हाथों में होगी। पूरी तरह से कार्यात्मक कमान में बदलने से सीआईएसएफ एक ऐसे भविष्य के लिए तैयार फोर्स बनेगा, जो उभरते खतरों का सक्रिय रूप से सामना कर सकेगा और भारत की तेज आर्थिक वृद्धि की नींव को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगा।
क्रमांक 2026
*संत रविदास के विचारों को जीवन में उतारें युवा, भेदभाव के विरुद्ध खड़े होकर समानता और मानवता का संदेश दें: राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष*
*‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना भय, भेदभाव और अन्याय से मुक्त समाज का संदेश देती है — राज्यपाल*
*पंजाब विश्वविद्यालय में ‘संत रविदास: परम्परा, परिवर्तन और प्रतिरोध की चेतना’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को किया संबोधित*
चंडीगढ़, 23 अक्टूबर – हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने युवाओं का आह्वान किया कि वे संत रविदास के विचारों को केवल पुस्तकों और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि जहां किसी के साथ भेदभाव हो, वहां समानता के पक्ष में खड़े हों; जहां किसी को सहायता की आवश्यकता हो, वहां सहयोग के लिए आगे आएं और जहां किसी को अवसर न मिल रहा हो, वहां उसके लिए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करें। यही संत रविदास के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राज्यपाल आज पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में ‘संत रविदास: परम्परा, परिवर्तन और प्रतिरोध की चेतना’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्वानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के साथ संत रविदास के विचारों, सामाजिक दर्शन तथा समतामूलक समाज की अवधारणा पर अपने विचार साझा


