पंजाब के पानी पर CM भगवंत मान का बड़ा बयान, बोले- एक बूंद भी नहीं देंगे दूसरे राज्यों को
चंडीगढ़, 27 अक्टूबर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के नदी जल अधिकारों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि पंजाब अपने हिस्से का पानी किसी अन्य राज्य को नहीं देगा। उन्होंने कहा कि पंजाब अपने जल संसाधनों की रक्षा के लिए अदालतों से लेकर सड़कों तक संघर्ष करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने यह बात पंजाब विधानसभा के सत्र के अंतिम दिन नदी जल और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के दौरान कही।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विधानसभा में पंजाब के जल अधिकारों को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि राजस्थान पंजाब के पानी का उपयोग बिना भुगतान किए कैसे कर रहा है। उनके अनुसार, राजस्थान की ओर पंजाब की रॉयल्टी के लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रावी और ब्यास नदियों के पानी पर राजस्थान और हरियाणा का कोई अधिकार नहीं बनता। हालांकि, नदी जल के बंटवारे को लेकर विभिन्न राज्यों के बीच कानूनी और प्रशासनिक विवाद लंबे समय से जारी हैं।
यमुना के पानी में पंजाब के हिस्से की मांग
भगवंत सिंह मान ने हरियाणा के रावी-ब्यास के पानी पर दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यमुना के पानी में पंजाब के जायज हिस्से की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से सतलुज-यमुना लिंक (SYL) का नाम बदलकर यमुना-सतलुज लिंक रखने और हरियाणा के अतिरिक्त पानी को पंजाब की ओर देने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी और उससे जुड़े संसाधनों के मामले में पंजाब के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए उनके हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
चार साल में नहरी सिंचाई का विस्तार
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के सिंचाई संबंधी कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में सरकार बनने के समय खेतों तक नहरी पानी की पहुंच लगभग 22 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने बताया कि सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगभग 14,000 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। इसके अलावा, राजबाहों की सफाई, नहरों और खालों का नवीनीकरण भी किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग चार दशकों बाद कंडी नहर को पुनर्जीवित किया और पठानकोट, अमृतसर तथा गुरदासपुर में आठ नई नहरें शुरू की हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों से लगभग 60.80 लाख एकड़ क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है।
रॉयल्टी के दावे पर पंजाब का रुख
भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब को वर्ष 1960 तक अपनी नदियों के पानी के लिए रॉयल्टी मिलती थी, लेकिन बाद में यह भुगतान बंद हो गया। उन्होंने पानी की रॉयल्टी के रूप में लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये के दावे का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सभी उचित कदम उठाएगी।
news written by Priyanka Thakur


