*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि गुजरात बनेगी हरियाणा की विकास गाथा की सारथी*
*मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दो दिवसीय गुजरात दौरे में निवेश के साथ-साथ पारस्परिक सहयोग एवं समावेश पर बल*
*प्रवासी हरियाणवासियों के शिकायत निवारण के लिए पोर्टल बनाएगी हरियाणा सरकार, सूरत में मुख्यमंत्री ने की घोषणा*
*महाराष्ट्र के साथ साथ अब गुजरात में हरियाणा भवन बनाने की दिशा में बढ़े कदम*
चंडीगढ़, 28 अक्टूबर – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि गुजरात अब हरियाणा की विकास यात्रा की महत्वपूर्ण सारथी बनेगी। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के दो दिवसीय गुजरात दौरे के दौरान न केवल निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई, बल्कि दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक समावेश और सहयोग को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया।
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सूरत और अहमदाबाद दोनों शहरों में प्रवासी हरियाणवासियों से मुलाकात की। इन बैठकों में प्रवासियों ने अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ विभिन्न समस्याओं और अपेक्षाओं को भी साझा किया। मुख्यमंत्री ने प्रवासी समुदाय की भावनाओं को समझते हुए कहा कि हरियाणा सरकार उनके हितों की रक्षा और सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।
सूरत में मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि प्रवासी हरियाणवासियों की शिकायतों के शीघ्र और प्रभावी निवारण के लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से प्रवासी अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम प्रवासी समुदाय को सरकार से और अधिक जोड़ने वाला साबित होगा।
इसके साथ ही, महाराष्ट्र में हरियाणा भवन की तर्ज पर अब गुजरात में भी हरियाणा भवन बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए गए हैं। यह भवन प्रवासी हरियाणवासियों के लिए सांस्कृतिक, सामाजिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा तथा दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करेगा।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने जोर दिया कि गुजरात और हरियाणा के बीच सहयोग केवल आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय आयामों को भी मजबूत किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि से शुरू हुई यह साझेदारी हरियाणा की विकास गाथा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली साबित होगी।
क्रमांक-2026
जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए जर्मनी में रोजगार के अवसर*
जर्मन कंपनी कोटिंग कॉन्सेप्टस के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का किया दौरा_
कंपनी को ऑटोमोटिव एवं औद्योगिक कोटिंग क्षेत्र में प्रोसेस मैकेनिक एवं विशेषज्ञों की आवश्यकता_
कंपनी का विश्वविद्यालय से 180 कुशल तकनीशियनों की भर्ती का लक्ष्य_
चंडीगढ़, 28 अक्टूबर- जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के विद्यार्थियों के लिए जर्मनी में रोजगार के नए अवसर खुलने जा रहे हैं। जर्मनी की कंपनी कोटिंग कॉन्सेप्ट ने विश्वविद्यालय से लगभग 180 कुशल तकनीशियनों एवं औद्योगिक कोटिंग विशेषज्ञों की भर्ती करने की इच्छा व्यक्त की है। इस संबंध में जर्मनी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का दौरा किया और कौशल प्रशिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2027 में शुरू होगी तथा चयनित अभ्यर्थियों को जर्मनी जाने से पहले ए2 स्तर का जर्मन भाषा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में कोटिंग कॉन्सेप्टस की प्रबंध निदेशक जनीना राडो विक, लॉजिस्टिक्स एवं वर्क प्रिपरेशन विभाग के प्रमुख एंड्रियास फालर, प्रोडक्शन मैनेजर डेविड फ्रैंक तथा प्रोडक्शन मैनेजर सर्जियस स्टीनमार्क शामिल रहे। इस दौरे का समन्वय इंटरनेशनल टैलेंट सॉल्यूशंस के सीईओ अल्बर्ट बाकर, और इंडो यूरो सिंक्रोनाइजेशन ग्रुप के अध्यक्ष राज वंगापांडु तथा निदेशक राजीव गुलाटी ने किया।
विश्वविद्यालय में आयोजित बैठक का समन्वय डीन, इंस्टीट्यूशंस प्रो. मुनीष वशिष्ठ तथा प्रिंसिपल, कम्युनिटी कॉलेज ऑफ स्किल डेवलपमेंट प्रो. संजीव गोयल ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. नरेश चौहान ने की।
बोर्ड रूम में आयोजित औपचारिक सत्र का शुभारंभ फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. राजेश आहूजा के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत और जर्मनी के संस्थानों के साथ इसके ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की विकास यात्रा और प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गयी।
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक क्षमताओं एवं अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी देते हुए डॉ. रश्मि पोपली ने उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में उभरती प्रौद्योगिकियों एवं सतत विकास से जुड़े सात क्षेत्रों में 23 स्टार्टअप कार्यरत हैं। डॉ. विमलेश ओझा ने कम्युनिटी कॉलेज ऑफ स्किल डेवलपमेंट की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि कॉलेज के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकार के कौशल मिशन तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अनुरूप संचालित किए जा रहे हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर तकनीकी कुशल कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
बैठक के दौरान राज वंगापांडु और राजीव गुलाटी ने जर्मनी में कुशल तकनीकी कर्मियों की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। श्री वंगापांडु ने बताया कि कोटिंग कॉन्सेप्टस के लिए ऑटोमोटिव एवं औद्योगिक कोटिंग क्षेत्र में प्रोसेस मैकेनिक के पदों पर योग्य तकनीकी कर्मियों की भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2027 में आयोजित होगी तथा चयनित अभ्यर्थियों को जर्मनी में कार्यभार संभालने से पहले आवश्यक ए2 स्तर का जर्मन भाषा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
कोटिंग कॉन्सेप्टस की प्रबंध निदेशक जनीना राडोविक और एंड्रियास फालर ने जर्मनी के ऑटोमोटिव एवं औद्योगिक कोटिंग क्षेत्र में करियर की संभावनाओं, कार्यस्थल के मानकों और आवश्यक तकनीकी दक्षताओं की जानकारी दी। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों को भाषा प्रमाणन तथा जर्मनी में कार्य शुरू करने की प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. संजय कौशिक ने अंतरराष्ट्रीय सहभागिता पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि कोटिंग कॉन्सेप्ट और जर्मनी के औद्योगिक भागीदारों के साथ यह सहयोग विद्यार्थियों के लिए वैश्विक स्तर पर करियर के अवसर उपलब्ध कराने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विशेष रूप से कौशल आधारित कम्युनिटी कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय का व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है और यह साझेदारी युवाओं के लिए वैश्विक रोजगार के नए मार्ग खोलेगी।


