चंडीगढ़ मेयर चुनाव में AAP-कांग्रेस का गठबंधन, 18-18 वोटों से मुकाबला हुआ बेहद रोचक
चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव ने एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है। 29 जनवरी को होने वाले मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने औपचारिक रूप से गठबंधन का ऐलान कर दिया है। दोनों दलों के बीच सहमति बनने के बाद चुनावी मुकाबला पूरी तरह रोमांचक हो गया है, क्योंकि अब भाजपा और विपक्षी गठबंधन—AAP व कांग्रेस—दोनों के पास बराबर 18-18 वोट हैं।
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं। मेयर चुनाव में सांसद का एक अतिरिक्त वोट भी शामिल होता है, जिससे कुल मतों की संख्या 36 हो जाती है। जीत के लिए 19 वोटों की जरूरत होती है। मौजूदा स्थिति में भाजपा के पास 18 पार्षद हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के 11 और कांग्रेस के 6 पार्षद हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के वोट के साथ AAP-कांग्रेस गठबंधन का आंकड़ा भी 18 तक पहुंच गया है। ऐसे में यह चुनाव बेहद कांटे का हो गया है और एक-एक वोट निर्णायक साबित हो सकता है।
गठबंधन के तहत पदों का बंटवारा भी तय कर लिया गया है। आम आदमी पार्टी मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार उतारेगी, जबकि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। इस फार्मूले को दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिल चुकी है।
इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा मंगलवार को चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान की। इस मौके पर चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी मौजूद रहे। लक्की ने बताया कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के साथ सभी स्तरों पर बातचीत पूरी हो चुकी है और पदों के बंटवारे पर पूरी सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला शहर के हित और स्थिर प्रशासन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सांसद मनीष तिवारी ने भी गठबंधन पर अपनी मुहर लगाते हुए कहा कि चंडीगढ़ के विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्ष का एकजुट होना जरूरी है। उनके अनुसार यह गठबंधन किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर के बेहतर भविष्य के लिए किया गया है।
गौरतलब है कि बीते दिनों AAP-कांग्रेस गठबंधन को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। आम आदमी पार्टी के चंडीगढ़ प्रभारी और दिल्ली के विधायक जरनैल सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद गठबंधन टूटने की अटकलें तेज हो गई थीं। पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर साझा कर पदों के बंटवारे पर सवाल उठाए गए थे। इससे दोनों दलों के बीच मतभेद की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है और दोनों पार्टियां फिर से एक मंच पर आ गई हैं।
दूसरी ओर, भाजपा ने AAP-कांग्रेस गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजीव राणा ने इसे अवसरवादी गठबंधन करार देते हुए कहा कि सत्ता की लालसा में दोनों दल लोकतंत्र, महिला सुरक्षा और संवैधानिक मूल्यों से समझौता कर रहे हैं। उन्होंने पार्षद सुमन की भाभी को घर से उठाए जाने की घटना का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि महिला सम्मान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
संजीव राणा ने कहा कि सत्ता के नशे में दोनों दल सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर राजनीतिक विरोध को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने इस मुद्दे को चुनाव में जोर-शोर से उठाने के संकेत भी दिए हैं।
अब सभी की निगाहें 29 जनवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि चंडीगढ़ की सत्ता की कुर्सी किसके हाथ जाती है। बराबरी के वोटों ने मेयर चुनाव को पूरी तरह दिलचस्प और अप्रत्याशित बना दिया है।


