चंडीगढ़:
पंजाब एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग द्वारा सेक्टर-35 स्थित म्यूनिसिपल भवन में “मानवाधिकार लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में न्यायपालिका, प्रशासन, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न जिलों से आए कोर ग्रुप सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरकेश मनुजा रहे। उनके साथ कई विशिष्ट अतिथियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण, राष्ट्रीय गान और दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
कॉन्क्लेव की खास बात कोर ग्रुप सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। इन सदस्यों को मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें जागरूकता फैलाना, पीड़ितों को न्याय दिलाने में सहायता करना, उल्लंघन के मामलों की रिपोर्ट करना और आयोग तथा समाज के बीच सेतु का काम करना शामिल है।
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति हरकेश मनुजा ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संस्थानों और नागरिक समाज का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने में सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर बल दिया।
इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संत प्रकाश ने विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने यूरेनियम प्रदूषण, सार्वजनिक सुरक्षा, मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार और शैक्षणिक संस्थानों में अग्नि सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया।
कॉन्क्लेव में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान सामाजिक सेवा और मानवाधिकार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा मानवाधिकार शिक्षा, आयोग की भूमिका और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में खुली चर्चा, प्रेस वार्ता और समापन समारोह भी आयोजित किया गया।
यह कॉन्क्लेव संवाद, जागरूकता और सहयोग का एक सशक्त मंच बनकर उभरा, जिसने मानवाधिकार संरक्षण के प्रति संस्थागत और सामुदायिक प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
✍️ रिपोर्ट: प्रियंका ठाकुर


