पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को शिक्षा विभाग में चयनित 606 नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि योजनाओं को ज़मीन पर लागू करना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया से पहले सभी कानूनी अड़चनों को दूर किया जाता है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की रोक या विवाद न उत्पन्न हो।
सीएम मान ने कहा कि उनकी सरकार का फोकस “क्रेडिट वॉर” नहीं, बल्कि काम और कर्मचारियों से सीधे संवाद पर है। उन्होंने पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि पहले नौकरियों में केवल चहेतों को तरजीह दी जाती थी, जबकि मौजूदा सरकार ने पारदर्शिता के साथ योग्य युवाओं को अवसर दिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को मजबूत करने के लिए स्पेशल एजुकेटर का अलग कैडर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में समाज में अमीर वही माना जाएगा, जिसके बच्चे शिक्षित होंगे, न कि जिसके पास बैंक बैलेंस या शोरूम होंगे।
सीएम मान ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि उनसे केवल शिक्षण कार्य ही लिया जाएगा और गैर-शैक्षणिक कार्यों पर सख्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार ने शिक्षा बजट 26–27 प्रतिशत तक रखा और पंजाब में भी आगामी बजट में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
शिक्षा सचिव अनिंदिता मित्रा ने जानकारी दी कि शिक्षा स्तर सुधारने के लिए 350 करोड़ रुपये के वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है और एक साल के भीतर 3,000 स्पेशल एजुकेटर नियुक्त किए जाएंगे।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि अब राज्य के लगभग सभी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। 99.9 प्रतिशत स्कूल परिसरों की बाउंड्री कवर की जा चुकी है और जल्द ही 100 प्रतिशत स्कूलों में प्रिंसिपल की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी।


