चंडीगढ़/नई दिल्ली, 10 जनवरी:
पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने वर्ष 2025 के दौरान भारत-पाक सीमा पर बढ़े तनाव और उसके बाद आई भीषण बाढ़ से राज्य को हुई भारी क्षति का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की है। नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्री-बजट बैठक के दौरान उन्होंने केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए पंजाब की प्रमुख आर्थिक और नीतिगत मांगों को विस्तार से रखा।
वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब को सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। इसके बाद आई बाढ़ को गृह मंत्रालय ने गंभीर आपदा घोषित किया था। उन्होंने बताया कि इस आपदा से 2,300 से अधिक गांव और लगभग 20,000 परिवार प्रभावित हुए हैं तथा अनुमानित नुकसान 12,905 करोड़ रुपये से अधिक है। पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए उन्होंने जीएसडीपी के 1 प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त उधारी सीमा की मांग की।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए चीमा ने पुलिस आधुनिकीकरण, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और एंटी-ड्रोन तकनीक के लिए पंजाब को 1,000 करोड़ रुपये की विशेष केंद्रीय ग्रांट देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सहायता सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप होनी चाहिए।
कृषि क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए वित्त मंत्री ने 7,757 करोड़ रुपये के लंबित ग्रामीण विकास फंड (RDF) को तुरंत जारी करने की मांग की। साथ ही भूजल संरक्षण के लिए धान विविधीकरण प्रोत्साहन को 7,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति एकड़ करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने जीएसटी 2.0 के बाद राज्य को हो रहे लगभग 6,000 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए मजबूत मुआवजा तंत्र लागू करने की भी मांग की। इसके अलावा मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों का विरोध करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कटे हुए बजट को बहाल करने की अपील की।


