चंडीगढ़ | प्रियांका ठाकुर
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के अत्यंत संवेदनशील मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के पूर्व अकाउंटेंट सतिंदर सिंह कोहली की गिरफ्तारी ने जांच को नई दिशा दे दी है। इस गिरफ्तारी के बाद वर्षों से लंबित कई सवाल फिर से चर्चा में आ गए हैं।
अकाल तख्त साहिब की रिपोर्ट और आदेशों के आधार पर एसजीपीसी ने सिख गुरुद्वारा ज्यूडिशियल कमेटी में कोहली के खिलाफ करीब 7.20 करोड़ रुपये की वसूली का केस दर्ज कर रखा है। यह राशि कोहली एंड एसोसिएट्स को दी गई 9 करोड़ रुपये से अधिक की अदायगी का 75 प्रतिशत हिस्सा है। हालांकि हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी इस केस के जरिए अब तक एक रुपया भी रिकवर नहीं हो सका है।
अकाल तख्त साहिब द्वारा नियुक्त जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि यदि समय रहते आंतरिक नियंत्रण प्रणाली लागू होती और खातों का कम्प्यूटरीकरण किया गया होता, तो पावन स्वरूपों की संख्या में बार-बार बढ़ोतरी और कमी जैसी गंभीर स्थिति पैदा नहीं होती। इस लापरवाही से एसजीपीसी को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उसकी साख को भी गहरा आघात पहुंचा।
कोहली पर वर्ष 2014 में गंभीर आरोप लगने के बाद उनका अनुबंध समाप्त किया गया था, लेकिन बाद में पुनर्बहाली ने राजनीतिक संरक्षण के आरोपों को जन्म दिया। वह सुखबीर सिंह बादल से जुड़े कारोबारी खातों और गुरबाणी प्रसारण से जुड़ी संस्थाओं से भी संबद्ध रहे हैं।
पूर्व अकाउंटेंट की गिरफ्तारी से जांच को गति जरूर मिली है, लेकिन एसजीपीसी और अकाली नेतृत्व की भूमिका को लेकर उठे सवाल अब भी अनसुलझे हैं। अब निगाहें पुलिस जांच और अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि इस संवेदनशील मामले की असली जिम्मेदारी किस पर आती है।


