वक्त के सत्गुरु को उनकी कृपा के बिना समझ पाना असम्भव
वक्त के सत्गुरु को भी इन्सान किसी तप-त्याग, अपनी बुद्धि, ताकत, धन-दौलत आदि से उनके वास्तविक स्वरूप को नहीं समझ सकता जब तक उस पर सतगुरु की कृपा नहीं हो जाती, ये उद्गार आज यहां चण्डीगढ़ ज़ोन के संत निरंकारी सत्संग भवन मनीमाजरा में हुए महिला निरंकारी सन्त समागम में जालन्धर से आए प्रचारक श्रीमति सपना सदाना जी ने हज़ारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए ।
आज आम इन्सान कहता है कि मेरे पास परमात्मा की भक्ति के लिए समय नहीं है इस बिन्दु पर चर्चा करते हुए श्रीमति सदाना जी ने कहा कि परमात्मा तो हर समय आठों पहर हमारे आसपास विराजमान होते हैं यह कण-कण में ज़र्रे-ज़र्रे में विद्यमान है यदि इस का एहसास करते हुए हम अपना कोई भी काम करते हैं तो वह कार्य सेवा बन जाता है, जैसे सन्तों ने लिखा भी है कि हत्थ कार वल दिल यार वल, हाथ पांव से काम कर चित निरंजन नाल । ठीक इसी प्रकार हमें भी जो सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज ने ब्रहमज्ञान प्रदान कर इस परमपिता परमात्मा के दर्शन करवाए हैं हमें इसके एहसास में रह कर ही काम करना है फिर इसकी भक्ति के लिए कोई अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं होती ।
इससे पूर्व यहां उपस्थित अनेक महिलायों ने गीत, कविता, स्पीच आदि द्वारा सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा दी जा रही शिक्षाओं को जीवन में अपनाने से होने वाले लाभ की चर्चा करते हुए बताया कि जब से हमारे उपर वक्त के सत्गुरू की कृपा हुई है हमारा जीवन अब स्वर्गम्यी हो जाता है।
इस अवसर पर यहां के ज़ोनल इन्चार्ज श्री ओ.पी. निरंकारी जी ने जालन्धर से आए सपना सदाना जी का सारी साधसंगत की ओर से धन्यवाद किया । यहां के मुखी श्री अमरजीत सिहं जी ने भी यहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया ।