पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम को मिल रहा जनता का साथ, तस्करों पर लगातार शिकंजा
पंजाब सरकार राज्य को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। “युद्ध नशे के विरुद्ध” मुहिम के तहत तस्करों पर कड़ी कार्रवाई और नशा छोड़ चुके व्यक्तियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की इस सख्त और संवेदनशील नीति का असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने वीरवार को जालंधर स्थित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (पिम्स) अस्पताल के दौरे के दौरान कहा कि राज्य में नशा तस्करों पर कार्रवाई तेज़ हो गई है। इसके साथ ही नशा छोड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों को नशा छुड़ाने वाले केंद्रों में भर्ती कर उनका इलाज और काउंसलिंग की जा रही है, ताकि वे समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन जी सकें।
उन्होंने बताया कि पंजाब में अब आम लोग भी इस मुहिम में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। लोग तस्करों और नशे के अड्डों के बारे में पुलिस को गुप्त सूचनाएं देकर अभियान को सफल बनाने में सहयोग कर रहे हैं। यह बदलता नजरिया राज्य में बढ़ती जागरूकता का प्रमाण है।
तस्करों पर सख्त एक्शन
सरकार के निर्देश पर पुलिस प्रशासन ने नशा तस्करों के खिलाफ एक्शन तेज़ कर दिया है। कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है और नशे के कारोबार में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। ड्रग नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए राज्यभर में पुलिस, विशेष टास्क फोर्स और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं।
पुनर्वास पर जोर
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि केवल नशा तस्करों पर कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशा छोड़ चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से नशा छुड़ाने वाले केंद्रों में मेडिकल ट्रीटमेंट, मनोवैज्ञानिक परामर्श और व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे वे न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन पाते हैं।