केंद्र की रिपोर्ट ने खोली हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था की पोल, सरकार बताए जिम्मेदार कौन? : कुमारी सैलजा
स्कूलों का जर्जर ढांचा, शिक्षकों के हजारों खाली पद और युवाओं को रोजगार से वंचित करना भाजपा सरकार की विफलता का प्रमाण; सरकार नहीं जागी तो बहुत देर हो जाएगी
चंडीगढ़, 11 जुलाई।
सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य कुमारी सैलजा ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई+ रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं केंद्र सरकार के आंकड़े यह स्वीकार कर रहे हैं कि हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर नई-नई घोषणाएं कर रही है, जबकि दूसरी ओर सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि केंद्र सरकार की रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों, आधारभूत सुविधाओं की कमी तथा शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों का उल्लेख किया गया है, तो हरियाणा सरकार को यह बताना चाहिए कि पिछले लगभग 12 वर्षों में शिक्षा सुधार के दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं उतर पाए। क्या केवल घोषणाओं और विज्ञापनों से शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो जाएगी? सांसद ने कहा कि प्रदेश में हजारों शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। अनेक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं हैं और भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं। सरकार न तो सरकारी स्कूलों का ढांचा सुधार पा रही है और न ही समय पर शिक्षकों की नियमित भर्ती कर रही है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि जब सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण प्रभावित होगा तो उसका असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। आज हरियाणा का पढ़ा-लिखा युवा बेरोजगारी का सामना कर रहा है। सरकारी भर्तियों में बड़ी संख्या में हरियाणा के युवाओं को अयोग्य बताया जा रहा है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या हरियाणा का युवा दोषी है, या फिर पिछले लगभग 12 वर्षों से शिक्षा और भर्ती व्यवस्था को कमजोर करने वाली भाजपा सरकार इसकी जिम्मेदार है? कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि सरकारी भर्तियों में 35 प्रतिशत जैसे न्यूनतम मापदंड पर भी बड़ी संख्या में युवा सफल नहीं हो पा रहे हैं तो सरकार को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि इसके पीछे शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियां, शिक्षकों की कमी और सरकार की नीतियां कितनी जिम्मेदार हैं। युवाओं को दोष देने से पहले सरकार को अपनी विफलताओं का जवाब देना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने मांग की कि जर्जर सरकारी स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, सभी रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र नियमित भर्ती की जाए, विद्यालयों में आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं तथा भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। कुमारी सैलजा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने शिक्षा और रोजगार के इन गंभीर मुद्दों पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए तो प्रदेश की एक पूरी पीढ़ी प्रभावित होगी। सरकार अभी भी चेत जाए, क्योंकि यदि अब भी सुधार नहीं किया गया तो बहुत देर हो जाएगी।
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राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून में विद्यार्थियों से करेंगे संवाद, शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर होगी चर्चा : कुमारी सैलजा
सिरसा, 11 जुलाई।
सिरसा की सांसद, उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद करेंगे।
सांसद ने कहा कि आज देश में छात्रों से जुड़ा मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का भविष्य उसके विद्यार्थी हैं। लाखों छात्र-छात्राएं और उनके परिवार बेहतर शिक्षा एवं रोजगार की उम्मीद लेकर वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक और भर्ती घोटालों ने उनके सपनों को गहरी चोट पहुंचाई है। कुमारी सैलजा ने कहा कि जब किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीदें टूट जाती हैं। मेहनत करने वाले युवाओं का मनोबल गिरता है, अनेक विद्यार्थी निराशा का शिकार हो जाते हैं और कुछ तो आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने पर भी मजबूर हो जाते हैं। यह स्थिति देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। नई शिक्षा नीति लागू कर देना ही सरकार की जिम्मेदारी पूरी करना नहीं है, बल्कि परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की आवाज को मजबूती देने, उनकी समस्याओं को सुनने तथा शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से श्री राहुल गांधी 17 जुलाई को देहरादून में छात्रों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य की रक्षा, शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने तथा विद्यार्थियों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की दिशा में यह संवाद एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।


