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दूसरे राज्यों की सीमा से आने वाले बाजरा एवं धान पर कड़ी निगरानी रखें – मुख्यमंत्री*

दूसरे राज्यों की सीमा से आने वाले बाजरा एवं धान पर कड़ी निगरानी रखें – मुख्यमंत्री*

 

*सरकार किसानों का एक एक दाना खरीदेगी*

 

*खरीद के बाद उठान कार्य समय पर किया जा रहा पूरा*

 

चण्डीगढ, 9 अक्तूबर –  हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने जिला के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे राज्य में चल रही फसल खरीद प्रक्रिया पर फोकस रखें और दूसरे राज्यों की सीमा से आने वाले बाजरा एवं धान पर कड़ी निगरानी रखें।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को चंडीगढ़ में समाधान प्रकोष्ठ समीक्षा बैठक के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला के अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि निर्धारित नॉर्म अनुसार 17 प्रतिशत नमी वाले धान की खरीद अवश्य सुनिश्चित की जाए। राज्य सरकार किसानों का एक—एक दाना एमएसपी पर खरीदने का कार्य करेगी और किसानों को फसल की राशि का भी समय पर भुगतान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में मंडियों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी लगाए गए हैं। वे फिजिकल वेरिफिकेशन जांच कर रहें हैं। सभी नोडल अधिकारी किसानों की सुविधा के लिए तत्पर हैं तथा फसल खरीद प्रक्रिया के लिए जारी दिशा—निर्देशों की पालना भी सुनिश्चित की जाए। खरीद प्रक्रिया को सुचारू ढंग से चलाने के लिए मंडियों में जियो टैगिंग की गई है तथा सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। उन्होंने दूसरे राज्यों से बिक्री के लिए धान व बाजरे की फसल लाने वाले वाहनों को जब्त करने तथा इंटर स्टेट वाहन मूवमेंट पर पूरी निगरानी रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल खरीद के दौरान उठान कार्य भी समय पर पूरा किया जाए। विशेषकर कैथल मंडियों में उठान कार्य में तेजी लाई जाए ताकि किसानों को मंडियों में धान लाने में कोई दिक्कत न हो। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने बताया कि चीका मंडी में धान डालने के लिए चार स्थान निर्धारित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि धान डालने के लिए एक ही स्थान निर्धारित करने हेतु उचित समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ. यशपाल ने बताया कि धान के अलावा प्रदेश में लगभग पौने दो लाख बाजरे की आवक हो रही है। राज्य की मंडियों में रबी फसल की खरीद एमएसपी पर की जा रही है तथा समय पर किसानों को भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा फसल उठान के कार्य के लिए भी आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं।

क्रमांक — 2026

अंत्योदय परिवारों को पशुपालन के लिए सस्ते ऋण के साथ प्रति लीटर दूध पर प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी: मुख्यमंत्री

 

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने की मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना की समीक्षा

 

मुख्यमंत्री ने कहा, हर अंत्योदय परिवार में रोजगार के साधन खड़े करेंगे: मुख्यमंत्री

 

चंडीगढ़, 9 अक्तूबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में 1.80 लाख रुपये सालाना आमदनी वाले अंत्योदय परिवारों के लिए रोजगार के नए साधन खड़े किए जाएंगे। अंत्योदय परिवारों को पशुपालन के लिए सस्ते ऋण के साथ-साथ दूध पर प्रति लीटर 10 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी जिसका उपयोग उसके ऋण की अदायगी में किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को अंत्योदय परिवारों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ नई योजनाएं शुरू करने के लिए भी व्यापक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने अंत्योदय परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा उनके लिए रोजगार के नए साधन तैयार करने के लिए विभागों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के प्रभाव की समीक्षा की तथा उन्हें ऋण उपलब्ध करवाने के लिए बैंक अधिकारियों को आवश्यक हिदायतें दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंत्योदय परिवारों के लिए रोजगार के साधन तैयार करने के लिए सभी विभागों की योजनाओं तथा बैंकों की ऋण सुविधाओं का समन्वय किया जाना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दूध की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अंत्योदय परिवारों को दूध उत्पादन से जोड़ना काफी लाभदायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों को भैंस खरीदने के लिए जहां पशुपालन विभाग 80 हजार रुपये तक की सब्सिडी दे रहा है वहीं वीटा के माध्यम से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त मदद दी जाएगी। ऐसी भैंसों का दूध वीटा खरीदेगा और प्रति लीटर 10 रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि सरकार देगी। महिला स्वयं सहायता समूहों तथा अनुसूचित जाति के परिवारों को ब्याज मुक्त ऋण प्रदान किया जाएगा। इनके ब्याज का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग को इस वर्ष कम से कम 15000 भैंसों को पर ऋण उपलब्ध करवाने का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी अंत्योदय परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए नई योजनाएं तैयार करें। उन्होंने सभी जिलों में अधिक से अधिक हर हित स्टोर, वीटा बूथ और मिल्क बार खोलने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी प्रदेश में 1450 हर हित स्टोर चल रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को 1 नवंबर तक 200 नए हर हित स्टोर तथा 300 नए वीटा बूथ, मिल्क बार तथा सांझा बाजार खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने गांवों में पंचायती जमीन पर हर हित स्टोर व वीटा बूथ खुलवाने के लिए पंचायत विभाग तथा शहरी क्षेत्रों के लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर गांव, कॉलोनी, सेक्टर तथा हाउसिंग सोसायटियों में हर हित स्टोर और वीटा मिल्क बूथ खोले जाएं।

‘सेवा’ विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जी. अनुपमा ने बताया कि हरियाणा में अंत्योदय परिवारों की आय के साधनों को बढ़ाने के लिए अंत्योदय मेलों का आयोजन शुरू किया गया था जिनके काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इन मेलों में भागीदारी करने के लिए अंत्योदय परिवारों को विभिन्न माध्यमों से आमंत्रित किया जाता है और उनकी रुचि के अनुसार रोजगार शुरू करवाने के लिए उन्हें बैंकों से ऋण दिलवाने में मदद की जाती है। इसके लिए 19 विभागों की 47 स्कीमों के माध्यम से अंत्योदय परिवारों को स्वरोजगार शुरू करवाने में मदद की जाती है। 2021 में शुरू किए गए इसके पहले चरण में 1.35 लाख परिवारों के ऋण स्वीकृत हुए हैं।

उन्होंने बताया कि योजना के दूसरे चरण की शुरुआत मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा 11 दिसंबर 2025 को की गई जिसके तहत अब तक सभी जिलों में एक-एक जिला स्तरीय अंत्योदय मेला आयोजित किया जा चुका है। इनमें 67096 परिवारों को आमंत्रित किया गया था जिनमें से 20103 परिवारों को परामर्श दिया गया और 15159 ऋण आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 11687 आवेदनों को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि इसके अगले चरण में सभी विधानसभा क्षेत्रों में अंत्योदय मेले आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अंत्योदय मेलों को विभागीय योजनाओं के साथ एकीकृत किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को रोजगार के साधन उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि बैंक गरीब लोगों को लोन देने से न कतराएं। यदि जरूरत हुई तो बैंकों के ब्याज की भरपाई सरकार अपने स्तर पर करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अगले एक साल के दौरान लगाए जाने वाले अंत्योदय मेलों को कलेंडर तैयार किया जाए ताकि इनमें अधिक से अधिक लोगों को आमंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी विभाग समय की जरूरत के अनुसार ऐसे नए स्वरोजगारों की सूची बनाएं जिनके माध्यम से अंत्योदय परिवारों को नए रोजगारों से जोड़ा जा सके।

बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, ‘सेवा’ विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जी. अनुपमा, कृषि व पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार, प्रधान सचिव श्री राजीव रंजन, श्री विजय सिंह दहिया, श्री अशोक कुमार मीणा तथा मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री के उप-प्रधान सचिव डॉ. यशपाल सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

क्रमांक — 2026

 

*समाधान शिविरों में आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर करें समाधान – मुख्यमंत्री*

 

*समाधान शिविर सरकार की फ्लैगशिप योजना, गत वर्ष के दौरान शिविरों में 55365 शिकायतों का किया समाधान*

 

चंडीगढ, 9 अक्तूबर –  हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि समाधान शिविर सरकार की फ्लैगशिप योजना है। इसलिए सभी अधिकारी हर जिलों में लगाए जाने वाले शिविरों में आने वाली समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें। हर समस्या का समाधान नवीनतम तकनीकी का लाभ उठाते हुए करें जिससे कोई भी समस्या लंम्बित नही रहेगी।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को चण्डीगढ़ में समाधान प्रकोष्ठ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के ओएसडी बीबी भारती, स्पेशल आफिसर भोपाल सिंह खदरी भी मौजूद रहे। इसके अलावा सभी जिलों के उपायुक्त एवं प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे जुड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान प्रकोष्ठ शिकायत निवारण प्रक्रिया दोहरी सत्यापन व्यवस्था एवं राज्य स्तरीय कार्रवाई का ढांचा है। इसमें समस्याओं को रिओपन कर विस्तार से समीक्षा की जाती है और संबंधित शिकायतकर्ता से फोन करके उसके बारे में जानकारी ली जाती है। इसलिए राज्य स्तर पर 5591 शिकायतें दोबारा खोली गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान समाधान शिविरों में 92848 शिकायतें आई, जिनमें से 55365 शिकायतों का समाधान किया गया।

 

*40000 लोगों से फोन कर समस्या के समाधान बारे ली जानकारी*

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान की गई शिकायतों में से 40000 शिकायतकर्ताओं से सीधे फोन कर समस्या के समाधान बारे राज्य स्तर पर जानकारी ली गई तथा 11500 शिकायतों का रिओपन होने के बाद निवारण हुआ है। यह बहुत ही सराहनीय कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि रिओपन प्रतिशत अधिक नहीं होना चाहिए, जिन जिले की 35 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतें रिओपन हुई हैं तो वे जिले स्टेट एवरेज में आने के लिए बेहतर कार्य करें।

 

*औपचारिकता नहीं समस्या का समाधान निकालने का करें कार्य*

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी शिविर में आई समस्याओं को लेकर कोई औपचारिकता न करते हुए, उनका समाधान निकालने का कार्य करें। यदि इन समस्याओं का मौके पर ही समाधान हो जाता है, तो जनता को उनका तत्काल लाभ मिलेगा। जनता से सीधे मिलें और समस्या बारे विस्तार से जानकारी लें, जिससे उनकी सुनवाई एवं समाधान बेहतर किया जा सकेगा और समस्या दोबारा भी नहीं आएगी। इसलिए समाधान शिविर में आए व्यक्ति की समस्या के निवारण करने के कार्य में तेजी लाए।

 

*समाधान शिविर में जिम्मेवार अधिकारी की लगाएं डयूटी*      

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी पूर्ण तालमेल एवं आपसी सामंजस्य के साथ समस्याओं का निपटान करें। इसके अलावा, हर समाधान शिविर में किसी जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए। यदि ऐसा नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अलावा जिलों से एमिनेंट पर्सन भी शिविर में अवश्य शामिल किए जाए। उन्होंने कहा कि शिविर की समस्याओं के समाधान की प्रकाशित विज्ञप्ति और एटीआर भी समय पर अपलोड की जाए।

 

*हर जिले से नई पॉलिसी हेतू 10 सुझाव अवश्य भेंजे*

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान शिविर की शिकायतों का उपायुक्त स्वयं पढ़कर सर्वेक्षण एवं निपटारा करें। इसके अलावा सभी एसडीएम भी शिकायतों को पढ़कर ही निपटाएं। यदि कुछ समस्याओं में पॉलिसी बनाने से जनता को राहत मिलती है तो पॉलिसी बनाकर कार्य किया जाएगा। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी 10 दिन में हर जिले से कई तरह के 10 सुझाव अवश्य भेंजे। उन्होंने कहा कि कई समस्याओं में पोलिसी के कारण दिक्कतें आ रही हैं तो वह अधिकारियों की इंटरवेंशन से ही दूर होंगी।

 

*सफाई से संबंधित शिकायतें निपटाने हेतू चलाएं विशेष सफाई अभियान* 

 

मुख्यमंत्री ने सोनीपत, रोहतक, पानीपत, झज्जर, पंचकूला, सिरसा के उपायुक्तों से बात करते कहा कि उनके समक्ष आने वाली शिकायतों में 10 प्रतिशत शिकायतें रिओपन की गई है। इस पर अधिकारियों ने बताया कि कुछ शिकायतें डिमांड, प्रोप्रटी आईडी एवं पुलिस से संबंधित रही है। उन्होंने कहा कि डिमांड वाली समस्याओं को अलग कर मुख्यालय भेजा जाए तथा सफाई व्यवस्था से संबंधित शिकायतों को निपटाने के लिए अधिकारी सुबह के समय विशेष सफाई अभियान चलाएं। अधिकारी सुबह के समय सफाई अभियान चलाएंगे तो शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त होगी।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सफाई के साथ सड़कों के गड्ढे भरने का कार्य भी करवाया जाए। सफाई एवं गड्ढे भरने के लिए वाहन भी सभी स्थानीय निकायों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होनें कहा कि जिन शहरों में ठेकेदार सफाई को लेकर निर्धारित नॉर्म अनुसार वाहन उपलब्ध नहीं करवाते उन पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके अलावा विशेषकर तालाबों पर अवैध कब्जे हैं तो उन्हें खाली करवाया जाए और उन स्थानों पर बेहतर परियोजना विकसित करने के लिए सुझाव भेंजे जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ. यशपाल यादव, मॉनिटरिंग एवं कोर्डिनेशन सेल की विशेष सचिव डॉ. प्रियकां सोनी, मुख्यमंत्री के ओएसडी राकेश संधु, विवेक कालिया, मॉनिटरिंग एवं कोर्डिनेशन सेल के कई अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

क्रमांक — 2026

कारोबारी सुगमता और औद्योगिक निवेश बढ़ाने को 28 सूत्री सुधार एजेंडा पर काम

कारोबारी नियमों के सरलीकरण और एमएसएमई इकोसिस्टम को मजबूत करने में जुटा हरियाणा

भवन निर्माण उप-नियमों को सरल बनाने और नियामकीय सुधारों में तेजी लाने पर केंद्र से मिली सराहना

चंडीगढ़, 9 अक्तूबर-हरियाणा सरकार प्रदेश को कारोबार और निवेश के लिए अधिक अनुकूल बनाने के उद्देश्य से नियामकीय सुधारों के साथ-साथ सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था को उद्यमियों के अनुकूल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए राज्य सरकार 28 सूत्री सुधार एजेंडा पर काम कर रही है।

यह जानकारी आज अनुपालन में कमी लाने और नियामकीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण से जुड़े अभियान के दूसरे चरण के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए हुई उच्चस्तरीय बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव श्री के.के. पाठक और हरियाणा के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल ने की।

बैठक के दौरान श्री के.के. पाठक ने भवन निर्माण उप-नयमों को सरल बनाने तथा नियामकीय प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के हरियाणा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण संबंधी नियमों को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और कारोबार के अनुकूल बनाने से अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा कारोबारी सुगमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को दूर करने, कारोबारी सुगमता में सुधार लाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से 28 सूत्रीय सुधार एजेंडा पर काम कर रही है। औद्योगिक विकास, भूमि संबंधी नियमों, भवन निर्माण की मंजूरी, श्रम सुधारों, बिजली कनेक्शन, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक-केंद्रित सेवाओं सहित विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

उन्होंने बताया कि अब तक आठ सुधार प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं, जबकि 18 प्रस्तावों पर सहमति बनने के बाद उनका क्रियान्वयन किया जा रहा है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जटिल और अनुमति-आधारित नियामकीय व्यवस्था को सरल एवं पूर्वानुमेय प्रणाली में बदलना है, ताकि उद्यमी अधिक विश्वास के साथ अपने कारोबार में निवेश कर सकें, उसका विस्तार कर सकें और संचालन कर सकें।

उन्होंने बताया कि एक महत्वपूर्ण विधायी पहल के तहत राज्य विधानसभा द्वारा गत 01 सितंबर को हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक, 2026 को पारित किया गया। यह पहल नए उद्यमों के लिए प्रक्रियागत औपचारिकताओं को कम करने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक सहयोगी वातावरण तैयार करने के सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

निवेशकों की सुविधा के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक मॉडल टाउनशिप में खाली औद्योगिक भूखंडों को निर्धारित शर्तों और शुल्क के अधीन पट्टे पर देने की अनुमति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को एचएसआईआईडीसी की पूर्व अनुमति के बिना अनुमत औद्योगिक गतिविधियों से संबंधित परियोजनाओं में बदलाव करने की सुविधा दी गई है। ऐसे मामलों में संबंधित एस्टेट मैनेजर को केवल सूचना देना आवश्यक होगा और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

राज्य सरकार भूमि उपयोग की ऐसी आधुनिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, जो मांग पर आधारित हो और जिसमें उन गतिविधियों की अनुमति देने का सिद्धांत अपनाया जाए, जिन पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध न हो। इस पहल का उद्देश्य आवश्यक नियोजन संबंधी सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए भूमि उपयोग में अधिक लचीलापन प्रदान करना है।

इसके साथ ही, भवन और निर्माण संबंधी अनुमतियों की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। साथ ही अग्नि सुरक्षा नियमों की समीक्षा भी की जा रही है। श्रम सुधारों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को चैबीसों घंटे संचालित करने की सुविधा प्रदान करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की हैं। इसके साथ ही, निर्धारित शर्तों के अधीन महिलाओं को रात्रि पाली में रोजगार देने से संबंधित प्रावधानों में भी संशोधन किए गए हैं। इन उपायों से व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर बढ़ने और कारोबारियों को संचालन में अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है।

बैठक में मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्त प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्रमांक-2026

पंचायती भूमि शुरू होगी प्राकृतिक खेती : श्याम सिंह राणा

 

प्रथम चरण में पट्टे पर दिया जाएगा पंचायती भूमि का 10 फ़ीसदी हिस्सा

 

चंडीगढ़, 9 अक्टूबर – हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश सरकार पंचायती भूमि पर भी प्राकृतिक खेती शुरू करेगी। इसके लिए पंचायतों को अपनी भूमि पर प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रथम चरण में अगले वर्ष के प्रारम्भ में पंचायती भूमि के 10 फ़ीसदी हिस्से को प्राकृतिक खेती करने के लिए पट्टे पर दिया जाएगा।

श्री राणा अपने कार्यालय में “बजट-घोषणाओं” तथा “सीएम-घोषणाओं” से संबंधित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार भी उपस्थित थे।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने अधिकारियों को आम-बजट में की घोषणाओं को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की 800 एकड़ भूमि पर तो प्राकृतिक खेती की ही जाएगी, साथ ही साथ अब पंचायती भूमि पर भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती से होने वाली उपज की बिक्री के लिए अनाज मंडियों में अलग व्यवस्था की जाएगी।

श्री श्याम सिंह राणा को अधिकारियों ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष जहां एक लाख एकड़ सेमग्रस्त भूमि को ठीक किया था वहीं इस वर्ष एक लाख 40 हजार एकड़ भूमि को दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा है। इसमें से अभी तक लगभग 22 हजार एकड़ भूमि को ठीक कर दिया गया है। उन्होंने “मेरा पानी मेरी विरासत” योजना योजना के तहत धान की जगह अन्य फसलों की बुआई करने पर दिए जाने वाले अनुदान की भी समीक्षा की।

उन्होंने खेतों की मिट्टी के साथ-साथ ट्यूबवेल के पानी की जाँच में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को इस पानी की जांच करवाने के लिए किसानों को जागरूक करने तथा उनको प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। अब तक लगभग 3 हजार किसानों ने अपने ट्यूबवेल के पानी की जांच करवाई है।

श्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी “बजट-घोषणाओं” तथा “सीएम-घोषणाओं” को निर्धारित अवधि में पूरा किया जाना चाहिए।

क्रमांक -2026

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