भगवंत मान सरकार ने दस्ती मंजूरियों को समाप्त करने और वित्तीय शासन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल ई-सैंक्शन सिस्टम किया लॉन्च
मैनुअल और कागजी कार्यवाही वाली मंजूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल वर्कफ्लो से बदली जाएगी: हरपाल सिंह चीमा
ई-सैंक्शन मॉड्यूल जवाबदेही, बजट अनुशासन और निर्बाध वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करेगा: हरपाल सिंह चीमा
भगवंत मान सरकार ने ई-सैंक्शन मॉड्यूल यू.एस.एम.एस. किया शुरू, केंद्र से 50 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की संभावना
चंडीगढ़, 8 मई 2026
भगवंत मान सरकार ने आज यूनिफाइड सैंक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (यू.एस.एम.एस.) की शुरुआत करके वित्तीय शासन में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित किया। मैनुअल मंजूरियों की प्रक्रिया को डिजिटाइज करने और इसे राज्य की भुगतान प्रणालियों के साथ निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने इस ई-सैंक्शन मॉड्यूल का औपचारिक उद्घाटन किया।
यह रणनीतिक शुरुआत न केवल पुरानी दस्ती प्रक्रियाओं को सिर से लेकर अंत तक डिजिटल कार्यप्रणाली से बदलती है, बल्कि केंद्रीय दिशा-निर्देशों के भी अनुकूल है, जिससे राज्य के लिए बड़े वित्तीय प्रोत्साहनों के अवसर पैदा होंगे।
यहां म्यूनिसिपल भवन ऑडिटोरियम में ई-सैंक्शन मॉड्यूल की शुरुआत के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “बेहतर वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और सिर से अंत तक डिजिटाइजेशन सुनिश्चित करने के लिए खजाना और लेखा विभाग ने एन.आई.सी. के सहयोग से प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय मंजूरियां ऑनलाइन जारी करने तथा उसके बाद बिल तैयार करने के लिए मंजूरी को ऑटोमैटिक आई.एफ.एम.एस. पर भेजने हेतु एक ई-सैंक्शन मॉड्यूल विकसित किया है।”
ई-सैंक्शन मॉड्यूल के मुख्य लाभों का विवरण देते हुए वित्त मंत्री ने पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “मंजूरी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को उपयोगकर्ता के विवरण, समय और स्वीकृति श्रृंखला के साथ डिजिटल रूप में रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे एक संपूर्ण ऑडिट ट्रेल बनती है और जवाबदेही में सुधार होता है। यह सिस्टम मंजूरी जारी करने से पहले बजट की उपलब्धता की पुष्टि करता है, जिससे विभागों को अतिरिक्त खर्च से बचने और बजट प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।”
मंजूरियों के डिजिटाइजेशन के बारे में उन्होंने आगे कहा, “ई-सैंक्शन मॉड्यूल को मैनुअल और कागजी कार्यवाही वाली प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कार्यप्रणाली से बदलने के लिए पेश किया गया है, जिससे सरकारी वित्तीय प्रशासन में दक्षता और पारदर्शिता में सुधार होगा। यह मॉड्यूल सभी विभागों में मंजूरी आदेशों के प्रारूप और प्रक्रिया में एकरूपता लाता है, जिससे अनियमितताओं और प्रक्रियागत त्रुटियों में कमी आती है।”
आई.एफ.एम.एस. के साथ सिर से अंत तक एकीकरण के महत्वपूर्ण पहलू पर मंत्री ने भरोसा दिलाते हुए कहा, “यह मॉड्यूल आई.एफ.एम.एस. के भीतर बजट, खजाना, बिल प्रोसेसिंग और भुगतान प्रणालियों के साथ मंजूरी आदेशों के निर्बाध एकीकरण को सुनिश्चित करता है, जिससे कार्य के दोहराव और मैनुअल हस्तक्षेप में कमी आती है। ऑटोमैटिक सत्यापन, हेड ऑफ अकाउंट, राशि, स्कीम मैपिंग और लाभार्थी विवरणों से संबंधित क्लेरिकल त्रुटियों को कम करता है।”
पोर्टल की रणनीतिक शुरुआत के बारे में पृष्ठभूमि बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “इस मॉड्यूल को बी.एफ.ए.आई.आर. के अंतर्गत डी.एल.आई.-3 की अनुपालना करते हुए विकसित किया गया है। भारत सरकार ने पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एस.ए.एस.सी.आई.) 2026-27 हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें विभिन्न घटकों के अंतर्गत कई वित्तीय सुधारों की रूपरेखा दी गई है। इन दिशा-निर्देशों में डायरेक्टोरेट ऑफ ट्रेजरी एंड अकाउंट्स के कार्यालय द्वारा ‘ई-सैंक्शन मॉड्यूल’ को लागू करना शामिल है।”
अपने संबोधन के समापन पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस तकनीक के भविष्य के प्रभाव के बारे में अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “सफल और पूर्ण रूप से लागू होने पर यह पहल वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियों के डिजिटल निर्माण, स्वीकृति और निगरानी में निर्बाध सिर से अंत तक ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करके राज्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की उम्मीद है और इससे राज्य एस.ए.एस.सी.आई. दिशा-निर्देशों के तहत 50 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के लिए भी पात्र बन जाएगा।”
इस उद्घाटन समारोह में विश्व बैंक की टीम द्वारा मॉड्यूल की कार्यप्रणाली पर विशेषज्ञ व्याख्यान तथा एन.आई.सी. टीम द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई।


