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महिला आरक्षण को हमारा पूरा समर्थन, लेकिन केंद्र द्वारा यह सिर्फ चुनावी ड्रामा रचा जा रहा है: मीत हेयर

महिला आरक्षण को हमारा पूरा समर्थन, लेकिन केंद्र द्वारा यह सिर्फ चुनावी ड्रामा रचा जा रहा है: मीत हेयर

महिला आरक्षण बिल एक राजनीतिक चाल लग रहा है, केंद्र का इरादा संदिग्ध: गुरमीत सिंह मीत हेयर

परिसीमन बिल पंजाब जैसे राज्यों को कमजोर करेगा और संघीय संतुलन को बिगाड़ेगा: गुरमीत सिंह मीत हेयर

जनगणना पर केंद्र का यू-टर्न महिलाओं के आरक्षण के प्रति उनकी मंशा पर शंकाएं खड़ा कर रहा है: गुरमीत सिंह मीत हेयर

पहले ही कम प्रतिनिधित्व के कारण पंजाब के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार हो रहा है, परिसीमन स्थिति को और बिगाड़ेगा: गुरमीत सिंह मीत हेयर

देश के लिए बड़ा योगदान देने वाले प्रवासी पंजाबियों को दोहरी नागरिकता देने का समय: गुरमीत सिंह मीत हेयर

चंडीगढ़/नई दिल्ली, 17 अप्रैलः

आम आदमी पार्टी (आप) के संगरूर से सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को हमारा पूरा समर्थन है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इसे लाने की मंशा और समय पर उन्होंने शंका जताते हुए इसे राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया। साथ ही उन्होंने परिसीमन बिल का सख्त विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यह पंजाब जैसे राज्यों के संघीय ढांचे को तोड़कर उनके प्रतिनिधित्व को और कमजोर कर सकता है।

संसद में देर रात हुई बहस को संबोधित करते हुए आप के सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि हम महिला आरक्षण बिल का पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन इसके पीछे केंद्र सरकार की मंशा गंभीर शंकाएं खड़ी करती है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके और समय पर यह बिल लाया गया है, उससे पता लगता है कि इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम की बजाय राजनीतिक लाभ की कोशिश के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

आप सांसद ने आगे कहा कि अगर केंद्र सरकार का इरादा साफ और सही होता तो वह इस बिल को 2023 में ही पास कर सकती थी। उस समय केंद्र द्वारा यह दलील दी गई थी कि यह बिल जनगणना के बाद लाया जाएगा, लेकिन अब भी यह बिल उसी समय लाया गया है, जब जनगणना का काम अभी शुरू भी नहीं हुआ है, जो केंद्र की संदिग्ध पहुँच की ओर इशारा करता है।

परिसीमन बिल का सख्त विरोध करते हुए गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि यह परिसीमन बिल राज्यों के राजनीतिक संतुलन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है, जिससे पंजाब जैसे छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व और कम हो जाएगा, जबकि ज्यादा आबादी वाले राज्यों को इसका काफी लाभ होगा, जो छोटे और बड़े राज्यों के बीच असमानताओं को और गहरा करेगा।

उन्होंने पंजाब से संबंधित लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को उजागर करते हुए कहा कि आजादी से पहले और बाद में पंजाब से किए गए वादे अभी तक अधूरे हैं। पंजाब को विशेष दर्जा देने की बजाय, राज्य के फंड रोके जा रहे हैं और बीबीएमबी पर भी राज्य के अधिकारों को लगातार खोखला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कम प्रतिनिधित्व के कारण पंजाब के साथ पहले ही सौतेली मां वाला सलूक होता रहा है और यह परिसीमन इस स्थिति को और भी बिगाड़ देगा।

अन्य देशों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों में सभी राज्यों को बराबर अधिकार मिल रहे हैं, इसे ध्यान में रखते हुए भारत को भी ऐसे ढांचे की ओर बढ़ना चाहिए जहां आबादी को देखे बिना हर राज्य के साथ निष्पक्षता और बराबरी से पेश आया जाए।

प्रवासी पंजाबियों से संबंधित मुद्दा उठाते हुए गुरमीत सिंह मीत हेयर ने नीति सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि प्रवासी पंजाबियों ने देश और पंजाब के लिए बड़ा योगदान दिया है और अब समय आ गया है कि सरकार उनकी भूमिका को पहचानते हुए भारत के साथ उनके संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रवासी पंजाबियों को दोहरी नागरिकता देने पर गंभीरता से विचार करे।

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