युवाओं के ज्ञान और शोध से मजबूत बनेगा हरियाणा : मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी*
*हरियाणा को अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान आधारित विकास का अग्रणी केंद्र बनाने का लक्ष्य*
*मुख्यमंत्री ने उच्चतर शिक्षण संस्थानों के शोधकर्ताओं के साथ किया संवाद, जमीनी समस्याओं के समाधान पर केंद्रित अनुसंधान का किया आह्वान*
*जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और कृषि से जुड़े विषयों पर शोध को प्राथमिकता दें शोधकर्ता : श्री नायब सिंह सैनी*
*हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि के तहत 90 शोध परियोजनाओं के लिए 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता*
चंडीगढ़ 11 सितंबर : हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी देश और प्रदेश की ताकत उसकी बड़ी-बड़ी इमारतों और भवनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं के ज्ञान, शोध और नवाचार से होती है। उन्होंने शोधकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रदेश के विकास और समाजहित से जुड़े विषयों पर गहन शोध करें तथा नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दें।
मुख्यमंत्री आज पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान में उच्चतर शिक्षण संस्थानों के शोधकर्ताओं के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में ‘हरियाणा विजन-2047’ को धरातल पर उतारने के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से ‘हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि’ के लिए 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इसके तहत 90 अनुसंधान परियोजनाओं के लिए महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं निजी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी-अपनी परियोजनाओं पर चर्चा की। हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद द्वारा इन शोधकर्ताओं को 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध का विषय केवल शोध पत्र प्रकाशित करने और किताबें लिखने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समाज और लोगों के जीवन को सरल बनाना होना चाहिए। ज्ञान और शोध में इतनी शक्ति है कि इनके माध्यम से समाज की ज्वलंत समस्याओं का समाधान कर लोगों को लाभ पहुंचाया जा सकता है। आज जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादन जैसी गंभीर समस्याएं हमारे सामने चुनौती बनी हुई हैं। शोधकर्ता इन विषयों पर अनुसंधान कर इनके समाधान में महत्वपूर्ण सहयोग कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पानी एक प्राकृतिक संसाधन है और इसका निर्माण नहीं किया जा सकता। पानी बचेगा, तभी कल जीवन बचेगा। इसलिए इस विषय पर हमें अधिक से अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। बढ़ते औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पानी की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। उद्योगों को भी पानी की जरूरत है, जबकि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। शोध के माध्यम से यह पता लगाया जाना चाहिए कि भूजल स्तर को कैसे सुधारा जाए और पानी की गुणवत्ता को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के लिए कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती, हर समस्या का समाधान संभव है। शोधकर्ता अपने ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से लोगों के जीवन को सरल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हमारा लक्ष्य हरियाणा को अनुसंधान, नवाचार, नई सोच और ज्ञान आधारित विकास का अग्रणी केंद्र बनाना है। ऐसा हरियाणा, जो उद्यमिता और तकनीक के बल पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप ‘विकसित भारत-2047’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि आज शक्ति की परिभाषा बदल रही है। भविष्य में वही देश और प्रदेश सबसे अधिक शक्तिशाली होंगे, जिनके पास नया ज्ञान और नई तकनीक होगी।
मुख्यमंत्री ने शोधकर्ताओं को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तिया “हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं” को अपना लक्ष्य मानकर शोध को सार्थक परिणाम मिलने तक निरंतर प्रयास करते रहने का आह्वान किया।
उन्होंने शोधकर्ताओं से कहा कि आपका शोध हरियाणा की धरती और यहां के लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा होना चाहिए। कृषि में कम पानी से अधिक उत्पादन कैसे हो, मिट्टी का स्वास्थ्य कैसे सुधरे, फसल अवशेषों का उपयोग किस प्रकार हो, जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण के प्रभावी मॉडल कैसे विकसित किए जाएं, जलवायु परिवर्तन का खेती और जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का समाधान क्या हो, ऐसे प्रश्न हमारे गांवों, किसानों और आने वाली पीढ़ियों से सीधे जुड़े हैं। शोधकर्ताओं को इन विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और न्यू मैटेरियल्स जैसी उभरती तकनीकें शिक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल रही हैं। हमें भी अपनी शिक्षा और अनुसंधान व्यवस्था को इन बदलावों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा। साथ ही, शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी समाप्त करना भी हमारी प्राथमिकता है।
*अनुसंधान को पेटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इनोवेशन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता- शिक्षा मंत्री*
शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि ‘हरियाणा विजन-2047’ के तहत एक विकसित, आधुनिक और ज्ञान-आधारित राज्य के निर्माण में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शोध केवल किताबों और रिसर्च पेपर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा संबंध जमीनी समस्याओं के समाधान से होगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि’ के तहत 90 शोध परियोजनाओं के लिए 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य अनुसंधान को पेटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इनोवेशन से जोड़ना है, ताकि विश्वविद्यालय में आया एक विचार पेटेंट और तकनीक के माध्यम से उत्पाद, उद्यम और रोजगार में परिवर्तित हो सके।
श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री द्वारा उच्च शिक्षा और युवाओं के लिए की गई घोषणाओं को हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद ने प्रभावी ढंग से लागू करने का ढांचा तैयार कर लिया है। एनईपी-2020 के तहत 3 और 4 वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स तथा मल्टीपल एंट्री-एग्जिट जैसी नीतियों को धरातल पर उतारा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि करियर डेवलपमेंट सेल्स के माध्यम से युवाओं को उद्योग जगत से जोड़ा जा रहा है और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा का हिस्सा बनाया जा रहा है। सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि की इस मजबूत भागीदारी से हरियाणा का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला बनेगा।
*350 शोध प्रस्तावों में से 90 परियोजनाओं को मिली स्वीकृति- प्रो. के.सी. शर्मा*
हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. के.सी. शर्मा ने मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा-2047’ विजन के अनुरूप परिषद द्वारा सामान्य नियमावली तैयार की गई, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को जारी किया गया था।
उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य अनुसंधान परियोजना के तहत कुल 350 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 163 आवेदनों को स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अनुमोदित किया गया। इनमें से 90 परियोजनाओं के आवेदनों को अंतिम रूप से स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें 75 संकाय सदस्यों तथा 15 विद्यार्थियों की परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राजकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के अलावा निजी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के लिए भी वित्तीय सहायता राशि जारी की गई है।
*शोधकर्ताओं को 5,000 पेटेंट का लक्ष्य- डॉ. राज नेहरू*
स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक और मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू ने अपने संबोधन में विकसित हरियाणा के विजन को साकार करने में शोधकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप शोधकर्ताओं को 5,000 पेटेंट का लक्ष्य दिया गया है, जिनमें पेटेंट को उद्योग के साथ मिलकर व्यावसायिक रूप देने का लक्ष्य भी रखा गया है।
*2030 तक 1,000 पेटेंट का लक्ष्य- ए.के. सिंह*
उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह ने कहा कि गत वर्ष 168 पेटेंट का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि इस वर्ष यह लक्ष्य बढ़ाकर 350 किया गया है और वर्ष 2030 तक इसे 1,000 तक ले जाने का लक्ष्य है।
इस अवसर पर हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. एसके गक्खर और उच्चतर शिक्षण संस्थाओं के शोधकर्ता, प्रोफेसर व छात्र उपस्थित रहे।
क्रमांक -2026
त्योहारी सीजन से पहले हरियाणा सरकार खाद्य सुरक्षा को लेकर मुस्तैद
एनालॉग पनीर पर सख्ती, घी के नाम पर बिकने वाले उत्पादों पर भी निगरानी
औचक निरीक्षण, छापेमारी के दौरान पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करवाने पर सहमति
सैंपलिंग बढ़ाने और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश, पांच माह में 265 मामलों में दोषसिद्धि
चंडीगढ़, 11 सितंबर—त्योहारी सीजन को देखते हुए हरियाणा सरकार खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद हो गई है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाने, निरीक्षण एवं निगरानी को तेज करने तथा असुरक्षित और घटिया खाद्य पदार्थों की बिक्री पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने आज यहां खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की मांग और बिक्री बढ़ने की संभावना को देखते हुए सैंपलिंग एवं प्रवर्तन गतिविधियों में खास तौर पर तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाना केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रदेश की रणनीति असुरक्षित खाद्य पदार्थों की शीघ्र पहचान करने, वैज्ञानिक जांच को मजबूत करने, फील्ड निरीक्षण एवं प्रवर्तन व्यवस्था को प्रभावी बनाने तथा खाद्य कारोबार संचालकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
बैठक में बताया गया कि खाद्य सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन के मामलों में दोषसिद्धि की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023-24 में 47 मामलों से बढ़कर वर्ष 2025-26 में दोषसिद्धि की संख्या 111 हो गई। चालू वित्त वर्ष में 31 अगस्त, 2026 तक 265 मामलों में दोषसिद्धि हुई है और 55.86 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रवर्तन कार्रवाई के तहत 2.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
बैठक में एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर के विरुद्ध की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा जारी अधिसूचना के तहत प्रदेश में एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर बनाने, इसके भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।
बैठक में ‘घी’, ‘घी का दीया’ और ‘पूजा का घी’ के नाम से बेचे जाने वाले उत्पादों से संबंधित दिशा-निर्देशों की भी समीक्षा की गई। घी के रूप में लेबल किए गए, वर्णित, प्रस्तुत या बेचे जाने वाले उत्पादों के लिए निर्धारित घी मानकों का पालन करना अनिवार्य है।
जमीनी स्तर पर निरीक्षण और समयबद्ध कार्रवाई को मजबूत करने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 45 नियमित पदों पर भर्ती की मांग हरियाणा लोक सेवा आयोग को भेजी गई है। अतिरिक्त मानव संसाधन से प्रदेश में निरीक्षण, निगरानी, सैंपलिंग, जांच और प्रवर्तन कार्रवाई को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की बढ़ती वैधानिक एवं फील्ड से जुड़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए विभाग को औपचारिक रूप से ‘प्रवर्तन विभाग’ के रूप में मान्यता देने के विषय पर भी विचार किया गया।
वैज्ञानिक जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए वर्ष 2026-27 में पहले चरण में हिसार और नारनौल में खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए 24 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह प्रदेश में हिसार, नारनौल, सिरसा, जींद, यमुनानगर, रोहतक, फरीदाबाद और गुरुग्राम में आठ व्यापक एकीकृत खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
इन प्रयोगशालाओं के विस्तार से खाद्य पदार्थों की वैज्ञानिक जांच एवं निगरानी क्षमता बढ़ेगी तथा खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों की पहचान और प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था विकसित होगी।
प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय सलाहकार समितियों का गठन कर उनकी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। मुख्य सचिव ने इन समितियों के नियमित संचालन, उनके निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन और फॉलो-अप की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वर्ष 2026 के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा घेवर, दूध एवं दुग्ध उत्पादों, कैफीनयुक्त पेय पदार्थों तथा आयातित खाद्य पदार्थों की लेबलिंग संबंधी आवश्यकताओं को लेकर विशेष प्रवर्तन अभियान चलाए गए। इसके अलावा 236 खाद्य प्रतिष्ठानों खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता अभियान चलाए गए। इनमें स्ट्रीट फूड कार्ट, खाद्य दुकानें, रेस्तरां, ढाबे तथा कटे हुए फल एवं तैयार खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेता शामिल थे।
इनमें से 153 प्रतिष्ठान एवं विक्रेता स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं का अनुपालन करते पाए गए, जबकि नियमों के उल्लंघन के मामलों में लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई शुरू की गई।
बैठक में विभाग के फील्ड स्तर पर प्रवर्तन अभियानों के लिए संस्थागत एवं सुरक्षा संबंधी सहायता की आवश्यकता की भी समीक्षा की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को औचक निरीक्षण, छापेमारी, रात्रिकालीन कार्रवाई तथा अन्य संवेदनशील प्रवर्तन गतिविधियों के दौरान पुलिस सहायता एवं सुरक्षा उपलब्ध करवाने पर सहमति व्यक्त की गई, ताकि फील्ड कार्रवाई प्रभावी और सुरक्षित तरीके से सुनिश्चित की जा सके।
क्रमांक -2026
हरियाणा में प्लॉट धारकों को एक बार फिर बड़ी राहत
–एचएसवीपी की ‘विवादों से समाधान योजना 2026′ शुरू
– 724 करोड़ रुपये की मिलेगी छूट
चंडीगढ़ , 11 सितंबर – हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने प्रदेश के प्लॉट धारकों के पुराने विवादों का निपटारा करने के लिए ‘विवादों से समाधान योजना 2026’ के तहत एक और अवसर दिया है। इस योजना के तहत राज्य के 103 सेक्टरों में फैले लगभग 4,414 पात्र आवंटियों को 724 करोड़ रुपये से अधिक की महत्वपूर्ण छूट दी जाएगी। प्राधिकरण ने योजना का लाभ उठाने के लिए 31 दिसंबर, 2026 को अंतिम तिथि तय की है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना मुख्य रूप से प्लॉट एन्हांसमेंट से जुड़े विवादों के एकमुश्त निपटारे के लिए लाई गई है। इसके दायरे में वे आवंटी भी शामिल हो सकेंगे जो प्राधिकरण की पिछली योजनाओं का लाभ उठाने से चूक गए थे। योजना का लाभ आवासीय प्लॉट्स, ग्रुप हाउसिंग साइट्स, संस्थागत (इंस्टीट्यूशनल) और औद्योगिक (इंडस्ट्रियल) प्लॉट्स के आवंटी उठा सकते हैं। पात्र आवंटी अपने प्लॉट आईडी और पासवर्ड की मदद से एचएसवीपी के आधिकारिक पोर्टल (https://vsss.hsvphry.org.in/) पर लॉगिन करके अपने लिए निर्धारित छूट राशि का ब्योरा देख सकते हैं।
प्राधिकरण ने बकायेदारों और डिफॉल्टर आवंटियों को कहा है कि यदि कोई आवंटी तय समय-सीमा के भीतर इस योजना का लाभ उठाकर अपने बकाये का निपटान नहीं करता है, तो लागू नियमों और विधिक प्रावधानों के तहत संबंधित प्लॉट के पुनः अधिग्रहण (Resumption) की सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी। किसी भी प्रकार की सहायता या विस्तृत जानकारी के लिए आवंटी अपने नजदीकी एचएसवीपी एस्टेट कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं या पोर्टल के माध्यम से अपना अनुरोध दर्ज करा सकते हैं।
क्रमांक -2026
जंगबीर सिंह
निजी स्थान पर वीटा मिल्क बूथ खोलने का सुनहरा अवसर
– मिल्क प्लांट जींद ने मांगे आवेदन
चंडीगढ़ , 11 सितंबर – द हिसार जींद को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड (मिल्क प्लांट जींद) ने निजी स्थान पर वीटा बूथों के आवंटन के लिए आम जनता से आवेदन आमंत्रित किए हैं। वीटा दूध और इसके विभिन्न दुग्ध उत्पादों की बिक्री के इच्छुक व्यक्ति, जिनके पास स्वयं की उपयुक्त भूमि उपलब्ध है, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास कम से कम 4 मीटर × 4 मीटर माप की अपनी उपयुक्त जगह होना अनिवार्य है। इसके साथ ही आवेदक का हरियाणा का मूल निवासी होना जरूरी है, उसकी आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी गई है।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस योजना के तहत वीटा बूथ संरचना का निर्माण खर्च तथा संचालन से जुड़े सभी व्यय, जैसे बिजली और पानी का बिल, आवेदक को स्वयं उठाना होगा। सामान्य आवेदकों के लिए 50,000 रुपये की रिफंडेबल (वापसी योग्य) सुरक्षा राशि तथा 500 रुपये का नॉन-रिफंडेबल (गैर-वापसी योग्य) प्रसंस्करण शुल्क तय किया गया है। बीपीएल (BPL) और एमएमएपीयूवाई (MMAPUY) योजना के अंतर्गत आने वाले आवेदकों को विशेष छूट दी गई है; उनके लिए सुरक्षा राशि पूरी तरह से निःशुल्क रखी गई है और आवेदन फार्म शुल्क केवल 100 रुपये रखा गया है।
उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति वीटा मिल्क प्लांट जींद के बिक्री एवं विपणन विभाग से 500 रुपये का आवेदन-पत्र प्राप्त कर सकते हैं या जारी किए गए क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करके इसे डाउनलोड कर सकते हैं। सभी आवश्यक दस्तावेजों, निर्धारित शुल्क और सुरक्षा राशि के साथ पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र द हिसार जींद को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड के कार्यालय में जमा कराना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर 2026 को सायं 04:00 बजे तक निर्धारित की गई है। विस्तृत नियम व शर्तों के लिए आधिकारिक वेबसाइट www.vita.haryana.gov.in पर विजिट किया जा सकता है।
क्रमांक -2026
जंगबीर सिंह
*25 वर्षों की सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की यात्रा को जन-जन तक पहुंचाएगा ‘सेवा संकल्प अभियान’ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी*
*17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक पूरे हरियाणा में होंगे सेवा, संस्कार, नवाचार और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम; 17 सितंबर की शाम 7 बजे हर घर में जलाया जाएगा ‘आशीर्वाद का दीया’*
चंडीगढ़, 11 सितंबर – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन, जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रनिर्माण की ऐतिहासिक यात्रा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्तूबर, 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। यह अभियान केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के सेवा-संकल्प के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, उनके जनकल्याणकारी कार्यों की जानकारी प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने और विकसित भारत के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का व्यापक जनअभियान होगा।
मुख्यमंत्री ने पंचकूला में आयोजित प्रेस वार्ता में अभियान की तैयारियों, कार्यक्रमों और उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया एडवाइजर राजीव जेटली, प्रवीण आत्रेय और भाजपा जिला प्रधान अजय मित्तल भी उपस्थित रहे।
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