राज्यपाल कटारिया ने विकसित भारत@2047 के लिए AI आधारित, नैतिक और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप उच्च शिक्षा पर जोर दिया
पंजाब लोक भवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च शिक्षा पर कुलपतियों का सम्मेलन आयोजित
चंडीगढ़, 12 सितंबर:
पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक, श्री गुलाब चंद कटारिया ने आज विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार में बदलाव लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानव-केंद्रित, नैतिक, समावेशी और समाज के प्रति जिम्मेदार तरीके से होना चाहिए।
पंजाब लोक भवन में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उच्च शिक्षा” विषय पर आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री कटारिया ने कहा कि AI क्रांति ने लोगों के सीखने, काम करने, शोध करने और निर्णय लेने के तरीकों को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में AI भारत की अर्थव्यवस्था और समाज को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने वाली परिवर्तनकारी शक्ति है। सम्मेलन में पंजाब के राज्यपाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विवेक प्रताप सिंह, श्री ललित जैन, IAS और यू.टी. चंडीगढ़ की निदेशक उच्च शिक्षा, सुश्री पालिका अरोड़ा भी उपस्थित रहीं।
सम्मेलन की शुरुआत प्रो. जसपाल सिंह संधू, प्रमुख शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर, द्वारा सम्मेलन के विषय का माननीय राज्यपाल के समक्ष परिचय प्रस्तुत करने के साथ हुई। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन के खेल निदेशक, श्री सोरभ कुमार अरोड़ा, PCS ने “MY Bharat: Mera Yuva Bharat” विषय पर प्रस्तुति दी।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों को AI को केवल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस का विषय मानने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने चिकित्सा, कृषि, कानून, वित्त, भाषाओं, सामाजिक विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में भी AI की पढ़ाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने संस्थानों से कृषि, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, शासन व्यवस्था और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए AI आधारित समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
“AI के आगमन के साथ तकनीकी शिक्षा का भविष्य” विषय पर तकनीकी सत्र को प्रो. के. के. अग्रवाल, अध्यक्ष, साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन और संस्थापक कुलपति, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय ने संबोधित किया।
IIT रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और उनकी टीम ने “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: उभरती तकनीकें और उच्च शिक्षा में उनके उपयोग” विषय पर प्रस्तुति दी। सम्मेलन में बेहतर कार्यप्रणालियों पर आयोजित सत्रों में शहीद भगत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी, फिरोजपुर के कुलपति डॉ. सुरेश कुमार; महाराजा भूपिंदर सिंह पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, पटियाला के कुलपति डॉ. पुष्पिंदर सिंह गिल; तथा CGC यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. विनय गोयल ने प्रस्तुतियां दीं।
सम्मेलन में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं डिवीजन ऑफ करियर सर्विसेज के अतिरिक्त निदेशक डॉ. हरपाल थेठी ने विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच साझेदारी को मजबूत करने तथा युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष संबोधन दिया।
राज्यपाल कटारिया ने AI प्रयोगशालाओं, ब्रिज कोर्स, सर्टिफिकेशन कार्यक्रमों, कौशल विकास और व्यावहारिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, IndiaAI Mission, BharatGen, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन और One Nation One Subscription को भारत की शोध एवं तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहलों के रूप में रेखांकित किया।
जिम्मेदार AI के महत्व पर जोर देते हुए राज्यपाल ने डेटा की गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, डीपफेक, गलत सूचना, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी चिंताओं को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल यह नहीं सीखना चाहिए कि AI क्या कर सकता है, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि AI का उपयोग किन कार्यों के लिए किया जाना चाहिए और किनके लिए नहीं।
विश्वविद्यालयों से ज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के केंद्र बनने का आह्वान करते हुए श्री कटारिया ने कहा कि भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
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