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संत रविदास के विचारों को जीवन में उतारें युवा, भेदभाव के विरुद्ध खड़े होकर समानता और मानवता का संदेश दें: राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष*

संत रविदास के विचारों को जीवन में उतारें युवा, भेदभाव के विरुद्ध खड़े होकर समानता और मानवता का संदेश दें: राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष*

 

*‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना भय, भेदभाव और अन्याय से मुक्त समाज का संदेश देती है — राज्यपाल*

 

*पंजाब विश्वविद्यालय में ‘संत रविदास: परम्परा, परिवर्तन और प्रतिरोध की चेतना’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को किया संबोधित*

 

चंडीगढ़, 23 अक्टूबर –  हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने युवाओं का आह्वान किया कि वे संत रविदास के विचारों को केवल पुस्तकों और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि अपने जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि जहां किसी के साथ भेदभाव हो, वहां समानता के पक्ष में खड़े हों; जहां किसी को सहायता की आवश्यकता हो, वहां सहयोग के लिए आगे आएं और जहां किसी को अवसर न मिल रहा हो, वहां उसके लिए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करें। यही संत रविदास के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

राज्यपाल आज पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में ‘संत रविदास: परम्परा, परिवर्तन और प्रतिरोध की चेतना’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्वानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के साथ संत रविदास के विचारों, सामाजिक दर्शन तथा समतामूलक समाज की अवधारणा पर अपने विचार साझा किए।

 

प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि संत रविदास की ‘बेगमपुरा’ की परिकल्पना भय, भेदभाव और अन्याय से मुक्त ऐसे समाज का संदेश देती है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर प्राप्त हों। आज आवश्यकता है कि इसी भावना के अनुरूप ऐसे भारत का निर्माण किया जाए, जहां प्रत्येक बच्चे को शिक्षा मिले, प्रत्येक युवा को अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो, महिलाओं को समान अवसर मिलें और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर सके। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

 

*सोशल मीडिया का उपयोग समाज को जोड़ने के लिए करें*

 

राज्यपाल ने कहा कि सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में संवाद के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं। इनका उपयोग समाज को जोड़ने, आपसी समझ बढ़ाने और सकारात्मक विचारों को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करने के लिए। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन एक-दूसरे के प्रति सम्मान बना रहना चाहिए। यही लोकतांत्रिक समाज की पहचान और भारतीय संस्कृति की शक्ति है।

 

उन्होंने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से आह्वान किया कि संत रविदास पर आयोजित संगोष्ठियां और अन्य अकादमिक गतिविधियां केवल एक दिन तक सीमित न रहें। उनके साहित्य, दर्शन और सामाजिक चिंतन पर निरंतर शोध हो, विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद आयोजित किए जाएं और उनके विचार कक्षाओं से निकलकर समाज तक पहुंचें।

 

*‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ में निहित है आत्मपरिवर्तन का संदेश*

 

संत रविदास की प्रसिद्ध उक्ति ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होती है। यदि हमारी सोच में समानता, व्यवहार में सम्मान और हृदय में मानवता होगी, तो हम अपने परिवार से लेकर पूरे समाज तक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया कि संत रविदास के विचारों को केवल पुस्तकों, भाषणों और मंचों तक सीमित न रखकर अपने दैनिक व्यवहार में अपनाएंगे।

 

*विकास वही, जिसमें समाज का अंतिम व्यक्ति भी पीछे न छूटे*

 

प्रो. घोष ने कहा कि भारत आज तेजी से प्रगति कर रहा है। प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल क्रांति और नए आर्थिक अवसर विकास की नई संभावनाएं प्रस्तुत कर रहे हैं। हालांकि, इस प्रगति के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि विकास की यात्रा में कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे। वास्तविक विकास वही है, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति को भी सम्मान, समान अवसर और आगे बढ़ने का अधिकार मिले। उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षाएं आज भी एक न्यायपूर्ण, समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए प्रासंगिक मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

 

इस अवसर पर राज्यपाल के परिसहाय श्री मोहित हांडा, पंजाब विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ की निदेशक प्रो. सरिता गुप्ता, हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सहित अनेक विद्वान, शोधकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

क्रमांक -2026

 

आंगनवाड़ी केंद्रों में खेल-खेल में सीखेंगे बच्चे, मजबूत होगी शिक्षा की नींव : श्रुति चौधरी

 

‘आगे बढ़े बचपन’ पहल के तहत 3 से 6 वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर

 

चंडीगढ़, 23 अक्तूबर-हरियाणा की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने कहा कि बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों को खेल-खेल में सीखने के अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, ताकि उनकी मजबूत नींव रखकर उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

 

उन्होंने कहा कि ‘आगे बढ़े बचपन’ की अवधारणा के तहत बच्चों को उनकी आयु और सीखने की क्षमता के अनुरूप रोचक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए विभाग द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों में शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) उपलब्ध करवाई गई है, जिससे बच्चे खेल, बातचीत और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सहजता से नई बातें सीख सकें।

 

श्रीमती श्रुति चौधरी ने कहा कि खेल-आधारित शिक्षण से बच्चों के भाषा और संवाद कौशल में सुधार होता है। बच्चे सुनने, बोलने, अपने विचार व्यक्त करने और दूसरों की बात समझने की क्षमता विकसित करते हैं। इसके साथ ही उनकी सोचने-समझने, याद रखने, तर्क करने तथा समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी मजबूत होती है।

 

उन्होंने कहा कि रंगों, आकारों, गिनती, वर्गीकरण और दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को नए कौशल सीखने का अवसर मिलता है। समूह में खेलना और गतिविधियों में भाग लेना उन्हें मिल-जुलकर रहने, अपनी बारी की प्रतीक्षा करने, दूसरों के साथ सहयोग करने तथा सामाजिक व्यवहार सीखने में मदद करता है। ऐसी गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन और स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता को भी बढ़ावा देती हैं।

 

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में खेल-आधारित गतिविधियां बच्चों को विद्यालय में प्रवेश के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे उनमें सीखने के प्रति रुचि विकसित होती है और वे आगे की औपचारिक शिक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते हैं।

 

श्रीमती श्रुति चौधरी ने कहा कि हर बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग का प्रयास है कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के लिए ऐसा आनंददायक और प्रेरणादायक वातावरण बनें, जहां वे खेलते हुए सीखें, अपनी प्रतिभा को पहचानें और आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।

 

क्रमांक -2026

 

 

हरियाणा में नशा तस्करी के खिलाफ अभियान तेज

 

9 माह में 6,824 गिरफ्तार, 19.52 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच

 

चंडीगढ़, 23 अक्टूबर-हरियाणा में नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जनवरी से सितंबर 2026 तक 6,824 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नशा तस्करी से जुड़ी 19.52 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई है। यह जानकारी आज यहां मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई 14वीं राज्य स्तरीय नार्को समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) समिति की बैठक में दी गई।

 

मुख्य सचिव ने नशा तस्करी के मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई, अभियोजन को मजबूत करने, वित्तीय जांच और नशा मुक्ति एवं पुनर्वास से संबंधित उपायों की समीक्षा की। बैठक में राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण रोडमैप 2026-29 के तहत विभिन्न विभागों की कार्रवाई तथा पिछली राज्य स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।

 

हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री संजय कुमार ने बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान अटैच की गई संपत्तियों का मूल्य पिछले वर्ष की इसी अवधि के 5.92 करोड़ रुपये से बढ़कर 19.52 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें लगभग 230 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। संपत्ति अटैच किए जाने से संबंधित व्यक्तियों की संख्या भी 78 से बढ़कर 163 हो गई, जो 108.97 प्रतिशत की वृद्धि है।

 

ये आंकड़े नशा तस्करी से जुड़ी वित्तीय संपत्तियों की पहचान करने और उन पर लक्षित कार्रवाई करने पर राज्य सरकार के बढ़ते फोकस को दर्शाते हैं। राज्य सरकार ने दिसंबर 2026 तक 30 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त, 15.09 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों से संबंधित मामले दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन हैं।

 

श्री संजय कुमार ने बताया कि जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान नषीली दवा और मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर की संख्या 39.93 प्रतिशत बढ़कर 2,722 से 3,809 हो गई। गिरफ्तारियों की संख्या 26.53 प्रतिशत बढ़कर 5,393 से 6,824 हो गई। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित मामलों की संख्या भी 346 से बढ़कर 380 हो गई, जो 9.83 प्रतिशत की वृद्धि है।

नशीले पदार्थों की बरामदगी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। हेरोइन की बरामदगी 43.176 किलोग्राम से लगभग दोगुनी होकर 84.695 किलोग्राम हो गई, जबकि अफीम की बरामदगी 235.550 किलोग्राम से बढ़कर 430.300 किलोग्राम हो गई। कोकीन की बरामदगी 194.47 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 2.96 किलोग्राम और एमडी/एमडीएमए की बरामदगी 235.51 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 1.76 किलोग्राम दर्ज की गई।

 

बैठक में अभियोजन के परिणामों में सुधार पर भी चर्चा की गई। दोषसिद्धि दर 53.33 प्रतिशत से बढ़कर 58.34 प्रतिशत हो गई है, जो 5.01 प्रतिशत अंक की वृद्धि है। अभियोजन निदेशालय के साथ तालमेल कर एनडीपीएस के 50 मामलों को विशेष निगरानी के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें एक मामले में दोषसिद्धि के बाद 14 वर्ष के कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

 

अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा में 12 नशा तस्करी गिरोहों की पहचान की गई है और उन्हें ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई जारी है। इसके अलावा, 29 भगोड़ों की पहचान की गई है। दो ब्लू कॉर्नर नोटिस और एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है तथा इस संबंध में दिल्ली स्थित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ मामला उठाया गया है। जिलों को लुकआउट नोटिस जारी करने और पासपोर्ट निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

वर्ष 2022 से अब तक 163 आदतन नशा अपराधियों को प्रिवेंटिव डिटेंषन के तहत रखा गया है। जनवरी 2026 से मार्च 2027 तक 70 लोगों को प्रिवेंटिव डिटेंषन में रखने के राज्य के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिलावार लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं।

 

जांच की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो मुख्यालय में विशेष जांच एवं वित्तीय जांच प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है। अब तक चार प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के माध्यम से 139 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित सभी मामलों में वित्तीय जांच करने के निर्देशों पर बल दिया गया है।

 

डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली नशा संबंधी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में एक समर्पित प्रकोष्ठ विकसित किया जा रहा है। जुलाई 2026 से एक साइबर विशेषज्ञ की सेवाएं परामर्शदाता के रूप में ली जा रही हैं।

गुप्त रूप से संचालित सिंथेटिक ड्रग प्रयोगशालाओं की पहचान के लिए थाना प्रभारियों, पुलिस चैकी प्रभारियों और गश्ती कर्मियों को आवश्यक जानकारी दी गई है। ऐसी गतिविधियों का पता लगाने में सहायता के लिए पुलिस थानों और पुलिस अधीक्षकों के कार्यालयों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा निर्धारित रेड फ्लैग संकेतक प्रदर्शित किए गए हैं।

 

13 अक्टूबर को हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और आबकारी एवं कराधान विभाग की संयुक्त बैठक में नशीले पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले पूर्वगामी रसायनों की निगरानी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने पर सहमति बनी। यूआरएन रखने वाली फर्मों का विवरण साझा किया गया है, जिसका आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा सत्यापन किया गया है।

 

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने केमिस्ट शाॅप्स में सीसीटीवी सिस्टम के निरीक्षण तथा रिकॉर्डिंग को दोबारा प्राप्त कर सकने की व्यवस्था की जांच के लिए एक प्रारूप प्रक्रिया तैयार की है। मुखबिरों और प्रवर्तन कर्मियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हरियाणा एंटी-नारकोटिक्स पुरस्कार नीति-2026 का प्रारूप अनुमोदन के लिए पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है।

 

बैठक में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत करने के प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। हरियाणा के सभी 127 नशा मुक्ति केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत निर्धारित पंजीकरण व्यवस्था के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।

 

इसके अतिरिक्त, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के एनडीपीएस प्रभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त वैज्ञानिक मानव-षक्ति की नियुक्ति तथा ग्रुप-सी कर्मचारियों के सेवा नियम अधिसूचित करने के प्रस्तावों पर चर्चा की गई, ताकि मादक पदार्थों की जांच रिपोर्ट समय पर तैयार करके न्यायालयों में प्रस्तुत की जा सके।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, डॉ. जी. अनुपमा, श्री ए.के. सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

क्रमांक -2026

 

 

‘मेरा पानी मेरी विरासत‘ योजना से जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को मिल रहा बढ़ावा : कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा

 

– दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को 2,000 रुपये प्रति एकड़ का दिया जाएगा अतिरिक्त बोनस

 

चंडीगढ़ , 23 अक्टूबर – हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने राज्य में भूजल के गिरते स्तर को रोकने, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए फसल विविधीकरण और जल संरक्षण को एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीति बताया है।

 

उन्होंने कहा कि लगातार धान और गन्ने जैसी अधिक पानी की खपत वाली मोनोकल्चर फसलों से इतर कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ना पानी की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। पानी जैसे बहुमूल्य और महंगे प्राकृतिक संसाधन के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गई ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना एक अनोखी पहल है, जिसके तहत धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती करने वाले किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

 

कृषि मंत्री ने बताया कि योजना की शुरुआत में धान की जगह वैकल्पिक फसलें उगाने पर किसानों को 7,000 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दी जाती थी। वहीं वर्तमान में, यदि कोई किसान पिछले 4 वर्षों के दौरान धान की खेती कर रहा था और अब वह धान छोड़कर अन्य फसलों—जैसे कि अनाज-मक्का, खरीफ दलहन (मूंग, अरहर/तूर, उड़द, मोठ), खरीफ तिलहन (मूंगफली, तिल, अरंडी), रेशेदार फसलें (कपास), खरीफ सब्जियां (प्याज), बागवानी, चारा फसलें और कृषि-वानिकी (यूकेलिप्टस और सफेदा)—की खेती करता है, या फिर भूमि को खाली (परती) भी छोड़ता है, तो उसे 8,000 रुपये प्रति एकड़ का लाभ दिया जा रहा है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो किसान पिछले वर्ष इस योजना के तहत पात्र थे,

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