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समान अंक, समान रैंक: मान सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में टाई-ब्रेकर के रूप में जन्मतिथि के उपयोग की वर्षों पुरानी परंपरा समाप्त की

समान अंक, समान रैंक: मान सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में टाई-ब्रेकर के रूप में जन्मतिथि के उपयोग की वर्षों पुरानी परंपरा समाप्त की

• विद्यार्थियों द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान को दिए गए फीडबैक के बाद शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने व्यापक परीक्षा मूल्यांकन सुधारों की घोषणा की

• क्षमता-आधारित प्रश्नपत्र और नकल रोकने के लिए सख्त उपाय लागू किए जाएंगे: हरजोत बैंस

चंडीगढ़, 9 जून:

पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मुख्यमंत्री स.भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) की मूल्यांकन प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए यह निर्णय लिया है कि बोर्ड परीक्षाओं में समान अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अब समान रैंक दी जाएगी। इस निर्णय के साथ जन्मतिथि को टाई-ब्रेकर के रूप में उपयोग करने की वर्षों पुरानी परंपरा समाप्त हो जाएगी।

यह महत्वपूर्ण निर्णय आज पीएसईबी की बोर्ड बैठक के दौरान लिया गया। इस फैसले की प्रेरणा 31 मई 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान समारोह “सितारे ज़मीन पर” के दौरान विद्यार्थियों के साथ हुई बातचीत से मिली। इस समारोह में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं के जिला टॉपर्स को सम्मानित किया था। बातचीत के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि टॉपर के बराबर अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को केवल आयु के आधार पर मेरिट सूची में नीचे रखा जाता है, जिससे उनकी रैंक प्रभावित होती है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को यह परंपरा समाप्त करने और समान अंक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए संयुक्त रैंकिंग प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए थे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। टॉपर के बराबर अंक प्राप्त करने वाले किसी भी विद्यार्थी को केवल आयु के आधार पर कम रैंक नहीं दी जा सकती। मुख्यमंत्री मान के दूरदर्शी नेतृत्व में अब समान अंक का अर्थ समान रैंक होगा।

स हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि रैंकिंग प्रणाली में सुधार के अलावा शिक्षा बोर्ड ने प्रश्नपत्रों के स्वरूप में भी बड़े बदलाव करने का निर्णय लिया है, जिनका उद्देश्य नकल पर रोक लगाना और रटंत प्रणाली को समाप्त करना है। “सितारे ज़मीन पर” कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया था कि वर्तमान प्रश्नपत्रों में ज्ञान और समझ की अपेक्षा रटने की क्षमता को अधिक महत्व दिया जाता है।
उन्होंने कहा, “हम विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार क्षमता-आधारित (कम्पीटेंसी-बेस्ड) प्रश्नपत्रों को अपनाने जा रहे हैं। हमारा ध्यान विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता और तार्किक सोच का आकलन करने पर होगा, न कि इस बात पर कि वे कितना रट सकते हैं। बेहतर प्रश्नपत्रों का उद्देश्य नकल की संभावनाओं को समाप्त करना है। जब प्रश्न रटने के बजाय सोचने और समझने की क्षमता को परखेंगे, तब पेपर लीक और नकल की गुंजाइश स्वतः कम हो जाएगी।”

शिक्षा मंत्री ने कहा, “विद्यार्थी हमारा भविष्य हैं। हमारे प्रत्येक निर्णय से उन्हें निष्पक्षता, आत्मविश्वास और वैश्विक स्तर के मानक मिलने चाहिए। मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व वाली सरकार विद्यार्थियों को नीति-निर्माण के केंद्र में रख रही है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड अब चरणबद्ध तरीके से रटंत शिक्षा की पुरानी प्रवृत्ति को समाप्त करेगा और प्रत्येक परीक्षा को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष तथा विद्यार्थी-अनुकूल बनाएगा।”

बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों से प्राप्त सभी रचनात्मक सुझावों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा अगली बोर्ड परीक्षा से पहले संयुक्त रैंकिंग प्रणाली और नए प्रश्नपत्र पैटर्न के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

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