सरकार सावधान: खेती से खिलवाड़ बंद करो
बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत और रतन मान समेत अर्थशास्त्रियों की चेतावनी अमेरिका से प्रस्तावित व्यापार समझौता किसानों के लिए बन सकता है बड़ा संकट
राकेश टिकैत और रतन मान बोले – खेती और किसानों के हितों से समझौता हुआ तो देशभर में होगा बड़ा विरोध
चंडीगढ़ 11 मार्च: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बेंगलुरु में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में देशभर से आए किसान नेताओं, कृषि विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी। वक्ताओं ने कहा कि यदि मौजूदा शर्तों पर यह समझौता लागू किया गया तो भारत की खेती, किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत और रतन मान समेत अर्थशास्त्रियों की चेतावनी अमेरिका से प्रस्तावित व्यापार समझौता किसानों के लिए बन सकता है बड़ा संकट
राकेश टिकैत और रतन मान बोले – खेती और किसानों के हितों से समझौता हुआ तो देशभर में होगा बड़ा विरोध
चंडीगढ़ 11 मार्च: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बेंगलुरु में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में देशभर से आए किसान नेताओं, कृषि विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी। वक्ताओं ने कहा कि यदि मौजूदा शर्तों पर यह समझौता लागू किया गया तो भारत की खेती, किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख राकेश टिकैत और हरियाणा के किसान नेता रतन मान विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि किसानों के हितों को नजरअंदाज करके किया गया कोई भी व्यापार समझौता देश के किसानों के लिए घातक साबित हो सकता है।
खेती केवल व्यापार नहीं, देश की खाद्य सुरक्षा का आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि खेती केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और करोड़ों किसानों के जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यापार समझौते के कारण किसानों की आय घटती है या खेती पर संकट आता है तो किसान चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों, राज्यों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय भविष्य में देश की कृषि व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
विदेशी कंपनियों के लिए खुल सकता है भारतीय कृषि बाजार
हरियाणा के किसान नेता रतन मान ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते की शर्तों से भारतीय कृषि बाजार विदेशी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय व्यापारिक कंपनियों के लिए खुल सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो छोटे और मध्यम किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो जाएगा। विदेशी कंपनियां बड़े पैमाने पर सस्ते उत्पाद भारत में ला सकती हैं, जिससे देश के किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना और भी कठिन हो जाएगा।
असमान आयात शुल्क से बढ़ेगी किसानों की मुश्किल
संगोष्ठी में मौजूद अर्थशास्त्रियों ने बताया कि अमेरिका अपने कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क लगभग 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 23 प्रतिशत या उससे अधिक कर सकता है, जबकि भारत से कई कृषि उत्पादों पर 39 प्रतिशत तक का आयात शुल्क घटाकर शून्य करने का दबाव बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी असमान शर्तें भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। इससे विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक मात्रा में आएंगे और देश के किसानों की उपज की मांग घट सकती है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि सहायता पर बढ़ सकता है दबाव
चिंता जताई गई कि यदि यह व्यापार समझौता लागू होता है तो भारत की न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली कृषि सहायता योजनाओं पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के कारण सरकार पर कृषि सहायता कम करने का दबाव बन सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।
छोटे किसानों पर सबसे अधिक असर
वक्ताओं ने कहा कि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। यदि कृषि बाजार विदेशी कंपनियों के लिए पूरी तरह खुल गया तो सबसे अधिक नुकसान इन्हीं किसानों को होगा।
सस्ते आयातित कृषि उत्पादों के कारण स्थानीय उत्पादन पर दबाव बढ़ेगा, जिससे खेती की लागत निकालना भी कई किसानों के लिए कठिन हो सकता है।
खेती केवल व्यापार नहीं, देश की खाद्य सुरक्षा का आधार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि खेती केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और करोड़ों किसानों के जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यापार समझौते के कारण किसानों की आय घटती है या खेती पर संकट आता है तो किसान चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों, राज्यों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय भविष्य में देश की कृषि व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
विदेशी कंपनियों के लिए खुल सकता है भारतीय कृषि बाजार
हरियाणा के किसान नेता रतन मान ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौते की शर्तों से भारतीय कृषि बाजार विदेशी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय व्यापारिक कंपनियों के लिए खुल सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो छोटे और मध्यम किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो जाएगा। विदेशी कंपनियां बड़े पैमाने पर सस्ते उत्पाद भारत में ला सकती हैं, जिससे देश के किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना और भी कठिन हो जाएगा।
असमान आयात शुल्क से बढ़ेगी किसानों की मुश्किल
संगोष्ठी में मौजूद अर्थशास्त्रियों ने बताया कि अमेरिका अपने कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क लगभग 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 23 प्रतिशत या उससे अधिक कर सकता है, जबकि भारत से कई कृषि उत्पादों पर 39 प्रतिशत तक का आयात शुल्क घटाकर शून्य करने का दबाव बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी असमान शर्तें भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। इससे विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक मात्रा में आएंगे और देश के किसानों की उपज की मांग घट सकती है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि सहायता पर बढ़ सकता है दबाव
चिंता जताई गई कि यदि यह व्यापार समझौता लागू होता है तो भारत की न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली कृषि सहायता योजनाओं पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के कारण सरकार पर कृषि सहायता कम करने का दबाव बन सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।
छोटे किसानों पर सबसे अधिक असर
वक्ताओं ने कहा कि भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। यदि कृषि बाजार विदेशी कंपनियों के लिए पूरी तरह खुल गया तो सबसे अधिक नुकसान इन्हीं किसानों को होगा।
सस्ते आयातित कृषि उत्पादों के कारण स्थानीय उत्पादन पर दबाव बढ़ेगा, जिससे खेती की लागत निकालना भी कई किसानों के लिए कठिन हो सकता है।
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