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हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने ’पोइला बैसाख’ की शुभकामनाएँ दी – ठाकुर रामकृष्ण की ’प्राण प्रतिष्ठा’ के वार्षिक उत्सव के दौरान सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में ’कालीबाड़ी चंडीगढ़’ की भूमिका की सराहना की।

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने ’पोइला बैसाख’ की शुभकामनाएँ दी
– ठाकुर रामकृष्ण की ’प्राण प्रतिष्ठा’ के वार्षिक उत्सव के दौरान सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में ’कालीबाड़ी चंडीगढ़’ की भूमिका की सराहना की।

चंडीगढ़, 13 अप्रैल, 2026-
 हरियाणा के माननीय राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने आज चंडीगढ़ स्थित कालीबाड़ी में ठाकुर रामकृष्ण की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के वार्षिक उत्सव के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बंगाली नववर्ष ‘पोइला बैसाख’ के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर लेडी गवर्नर श्रीमती मित्रा घोष भी उपस्थित रहीं।

माननीय राज्यपाल ने ‘पोइला बैसाख’ को हर्ष, नवचेतना और नवआरंभ का प्रतीक बताते हुए कहा कि ‘पोइला’ (अर्थात पहला) और ‘बैसाख’ (बंगाली पंचांग का प्रथम माह) से मिलकर बना यह पर्व आशा, समृद्धि और नई संभावनाओं के आगमन का संदेश देता है।

उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि दीपावली, ईद-उल-फितर, क्रिसमस, गुरुपर्व, पोंगल और ‘पोइला बैसाख’ जैसे त्योहार धार्मिक सीमाओं से परे जाकर समाज को एकता के सूत्र में पिरोते हैं। ये उत्सव आपसी सम्मान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं तथा करुणा और सह-अस्तित्व जैसे मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर ‘विविधता में एकता’ की भारतीय भावना को साकार करते हैं।

माननीय राज्यपाल ने ‘पोइला बैसाख’ से जुड़ी पारंपरिक प्रथाओं का उल्लेख करते हुए ‘हल्खाता’ की रस्म का विशेष रूप से जिक्र किया, जिसमें व्यापारी नए बही-खाते आरंभ कर समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही उन्होंने ‘चौत्र बिक्री’ से जुड़े उत्सव के उत्साह की भी चर्चा की।

उन्होंने कालीबाड़ी, चंडीगढ़ द्वारा भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान उन युवा पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, जो अपने मूल स्थानों से दूर रह रही हैं। उन्होंने कहा कि कालीबाड़ी जैसी संस्थाएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर माननीय राज्यपाल एवं लेडी गवर्नर ने कालीबाड़ी की वार्षिक पत्रिका ‘अपब्रिनु’ का विमोचन किया तथा उसकी संपादकीय टीम को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में स्वामी शांतत्मानंद जी, स्वामी भीतिहरानंद जी, स्वामी तन्महिमानंद जी और राज्यपाल के निजी सचिव श्री शंख चटर्जी, श्री प्रणोब सेन, अध्यक्ष, कालीबाड़ी, श्रीमती अमृता गांगुली, प्रभारी, रामकृष्ण मंदिर, श्री राजेश रॉय, महासचिव, कालीबाड़ी, श्री बीके चटर्जी, कोषाध्यक्ष, कालीबाड़ी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
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