Homepunjabस्वस्थ हरियाणा ही विकसित हरियाणा की आधारशिला' – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

स्वस्थ हरियाणा ही विकसित हरियाणा की आधारशिला’ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

स्वस्थ हरियाणा ही विकसित हरियाणा की आधारशिला’ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

 

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर बड़ा निवेश, 2014 से 298 प्रतिशत बढ़ा स्वास्थ्य बजट

 

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र की अनुकरणीय पहलों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को किया संबोधित

 

चंडीगढ़, 30 अप्रैल – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ‘स्वस्थ हरियाणा ही विकसित हरियाणा की आधारशिला है।’ इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। चालू वित्त वर्ष के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए पिछले वर्ष की तुलना में 32.89 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी करते हुए लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह वृद्धि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता को दर्शाती है। जबकि वर्ष 2014 में प्रदेश का स्वास्थ्य बजट 2,646 करोड़ रुपये था, जिसे वर्ष 2025-26 में बढ़ाकर 10,500 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस प्रकार पिछले वर्षों में स्वास्थ्य बजट में लगभग 298 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री वीरवार को चंडीगढ़ में स्वास्थ्य क्षेत्र की अनुकरणीय पहलों पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह अवसर देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। दो दिन तक इस क्षेत्र में देशभर में की जा रही श्रेष्ठ व अनुकरणीय पहलों को साझा किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन देश के स्वास्थ्य क्षेत्र की श्रेष्ठ सेवाओं और नवाचारों को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने मरीजों के परिजनों को प्रशिक्षित करने के लिए ‘केयर कम्पैनियन प्रोग्राम’ चलाया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से 188 केंद्रों में मरीजों के परिजनों को प्रशिक्षित किया है। उन्हें व्हाट्सएप-आधारित ‘मोबाइल केयर सर्विस’ से भी जोड़ा है। डिजिटल हेल्थ (ई-संजीवनी) कार्यक्रम में आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब प्रतिदिन 2,200 से अधिक टेली-परामर्श कर रहे हैं। वे ग्रामीण मरीजों को सीधे पी.जी.आई., चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों से परामर्श दिलाते हैं। U-WIN और eVIN जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा टीकाकरण और वैक्सीन की सप्लाई चेन को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। इससे शत-प्रतिशत टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित हो रही है।

 

हर जिले में मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य, MBBS सीटें 700 से बढ़कर 2710

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने हर जिले में एक नया मेडिकल कॉलेज खोलने का संकल्प लिया। वर्ष 2014 में प्रदेश में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे। अब इनकी संख्या 17 हो चुकी है। एम.बी.बी.एस. की सीटें 700 से बढ़कर 2,710 हो गई हैं। इसी तरह, नर्सिंग, फिजियथैरेपी व पैरामेडिकल में शिक्षा का विस्तार किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने केवल स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि उनकी गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया है। राज्य के 1,479 स्वास्थ्य संस्थान राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों के अंतर्गत प्रमाणित हो चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उसके नजदीक ही उपलब्ध हों। इतना ही नहीं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हरियाणा ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रत्येक जिला अस्पताल में आधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग स्थापित करने का काम तेजी से हो रहा है। आज राज्य में संस्थागत प्रसव दर 98.80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। इसी तरह प्रदेश में पूर्ण टीकाकरण दर 105 प्रतिशत हो चुकी है।

 

‘निरोगी हरियाणा’ के तहत 1 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग, 5.86 करोड़ मुफ्त टेस्ट

 

उन्होंने कहा कि ‘निरोगी हरियाणा’ जैसी पहल के माध्यम से हर नागरिक के स्वास्थ्य की जांच सुनिश्चित की जा रही है। अब तक अंत्योदय परिवारों के लगभग 1 करोड़ नागरिकों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और 5.86 करोड़ से अधिक लैब टेस्ट मुफ्त किए गए हैं। इससे बीमारियों का समय रहते पता लगाकर उनका उपचार संभव हो पाया है। प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 550 एम्बुलेंस का नेटवर्क स्थापित किया है। यह डायल-112 से जुड़ा हुआ है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में फोन आते ही 9 से 10 मिनट में एंबुलेंस वहां पहुंच जाती है।

उन्होंने कहा कि सभी जिलों में सी.टी. स्कैन तथा एम.आर.आई. सेवाएं उपलब्ध करवाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इस समय 18 जिला नागरिक अस्पतालों में सी.टी. स्कैन सेवाएं, 7 जिला नागरिक अस्पतालों में एम. आर.आई. सेवाएं दी जा रही हैं। प्रदेश के 22 नागरिक अस्पतालों में मुफ्त हेमो डायलिसिस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त हेमो डायलिसिस सेवाएं 18 अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं पर उपलब्ध करवाई जाएगी। इसी तरह, 4 केंद्रों में कैथ लैब और कार्डियक केयर यूनिट चल रही हैं। ये 6 अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध करवाई जाएंगी।

उन्होंने कहा कि गरीब नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत- जन-आरोग्य योजना के तहत प्रदेश में 3 लाख रुपये वार्षिक आय तक के परिवारों को शामिल करते हुए आयुष्मान-चिरायु योजना चलाई गई है। इससे प्रदेश की आधी से अधिक आबादी को अब 5 लाख रुपये सालाना तक मुफ्त इलाज मिल रहा है। जिला स्तर पर डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित किए हैं। इनमें मरीजों को मुफ्त इलाज दिया जा रहा है। इसके अलावा, कैंसर के मरीजों को मुफ्त यात्रा सुविधा और आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही हैं।

 

‘बीमारी से पहले बचाव’पर जोर, योग और खेल संस्कृति को बढ़ावा

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल इलाज कर देना ही अच्छी स्वास्थ्य सेवा नहीं कही जा सकती। अच्छी स्वास्थ्य सेवा वह है, जिसमें व्यक्ति को बीमार ही न होने दिया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों को जन-जागरूकता अभियान में शामिल होना होगा। लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगे तो बीमारियां कम होंगी। हरियाणा में इसके लिए गांव-गांव योग एवं व्यायामशालाएं खोलने और पूरे प्रदेश में खेल संस्कृति विकसित करने का काम किया है।

उन्होंने आह्वान किया कि मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करना हैं, जहां हर नागरिक स्वस्थ हो, हर परिवार सुरक्षित हो और हर राज्य प्रगति के पथ पर अग्रसर हो और ‘स्वस्थ भारत, सशक्त भारत’ का संकल्प साकार हो।

 

इस अवसर पर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा सहित केंद्र सरकार के अलावा विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

क्रमांक – 2026

हरियाणा में बड़े पैमाने पर विनियमन में ढील

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाने के लिए ‘ओम्निबस बिल’ लाने की तैयारी

एकीकृत विधायी ढांचे में समाहित होंगे नियामकीय बदलाव

इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती के लिए 500 करोड़ का ‘सक्षम’ फंड प्रस्तावित

 

चंडीगढ़, 30 अप्रैल- हरियाणा सरकार ने निवेश के मामले में प्रदेश को अग्रणी गंतव्य बनाने के मकसद से प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए विनियमन में ढील (डी-रेगुलेशन) देने का अभियान शुरू किया है। इसी कड़ी में प्रस्तावित सर्वग्राही विधेयक (ओम्निबस बिल) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा सुधारों को संस्थागत रूप देने की तैयारी है।

कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव श्री के.के. पाठक और हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में यहां हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में अनुपालन में कमी और डी-रेगुलेशन फेज-2 के अन्तर्गत हुए सुधारों की समीक्षा की गई।

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए प्रस्तावित हरियाणा ओमनीबस बिल विभिन्न नियामकीय बदलावों को एकीकृत विधायी ढांचे में समाहित करेगा। इससे विभागों में एकरूपता सुनिश्चित होगी और लालफीताशाही को कम करने तथा शासन को सरल बनाने वाले सुधारों को दीर्घकालिक कानूनी आधार मिलेगा।

बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों ने 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना, स्वीकृति प्रक्रियाओं में तेजी लाना तथा व्यवसायों, संस्थानों और नागरिकों के लिए एक सुगम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। अधिकांश सुधार प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं और कई लागू होने की प्रक्रिया में हैं, जो राज्य के सुधार एजेंडे में तेजी को दर्शाता है।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों को लंबित प्रस्तावों को शीघ्र पूरा करने, एमआईएस पोर्टल पर कार्ययोजनाएं तुरंत अपलोड करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सुधारों का जमीनी स्तर पर स्पष्ट और मापनीय प्रभाव दिखाई दे। उन्होंने कहा कि इन सुधारों की सफलता जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी।

सुधारों के प्रमुख क्षेत्रों में भूमि और निर्माण नियमों का सरलीकरण शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (सीएलयू) की आवश्यकता नहीं है, जिससे निवेशकों और भूमि मालिकों को बड़ी राहत मिली है।

शेष नियंत्रित क्षेत्रों में भी सीएलयू स्वीकृतियों को स्वचालित बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह प्रणाली औद्योगिक क्षेत्रों में पहले से लागू है और मार्च 2027 तक इसका अन्य श्रेणियों में भी विस्तार करने की योजना है। मांग आधारित भूमि उपयोग प्रणाली में गतिविधियों की अनुमति होगी जब तक कि वे विशेष रूप से प्रतिबंधित न हों। इससे नियामकीय बाधाओं में और कमी आएगी।

निर्माण क्षेत्र में कब्जा प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक अनुमोदनों को सरल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कई अनावश्यक एनओसी को हटाने का प्रस्ताव है, जिससे समय और लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र को एक सशक्त सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे सभी व्यावसायिक स्वीकृतियों के लिए एकीकृत प्रणाली उपलब्ध होगी। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर तेज निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा। लगभग 30 दिनों में स्वीकृति देने के लक्ष्य के साथ ‘सर्विस लेवल एग्रीमेंट’ लागू किए जा रहे हैं। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड भी विकसित किया जा रहा है, जिससे स्वीकृति की समय-सीमा की निगरानी की जा सकेगी।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य सरकार के इस सुधार एजेंडे के केंद्र में हैं। नए सुधारों के तहत औद्योगिक प्लॉट के उप-विभाजन, पूर्व स्वीकृति के बिना व्यावसायिक गतिविधियों में बदलाव, संपत्तियों के हस्तांतरण या सब-लीज की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है।

प्रस्तावित ‘हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट’ के तहत उद्यमों को स्व-घोषणा के आधार पर कार्य शुरू करने की अनुमति होगी और शुरुआती चरण में निरीक्षणों में भी कमी की जाएगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने के लिए 500 करोड़ रुपये का ‘सक्षम’ फंड प्रस्तावित है, जिससे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का उन्नयन किया जाएगा। इसके अलावा, अपशिष्ट उपचार और अग्नि सुरक्षा जैसी साझा सुविधाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर भी कार्य किया जा रहा है।

हरियाणा अब पारंपरिक और जटिल प्रावधानों के स्थान पर वैश्विक मानकों के अनुरूप जोखिम-आधारित आधुनिक अग्नि सुरक्षा नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में साझा अग्नि सुरक्षा ढांचा विकसित करने से लागत कम होगी और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

राज्य ने अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। नगर निगम कानूनों से ट्रेड लाइसेंस पहले ही हटाए जा चुके हैं और प्रस्तावित ओमनीबस बिल के तहत अन्य लाइसेंसों को भी सरल बनाने की योजना है, जिससे विनियामक ढांचे में दोहराव खत्म होगा।

बैठक में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डाॅ. अमित कुमार अग्रवाल, अग्निशमन सेवाएं विभाग के महानिदेशक श्री शेखर विद्यार्थी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री जे. गणेशन तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक श्री यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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