चंडीगढ़, 3 मई | रिपोर्ट: प्रियंका ठाकुर
पंजाब सरकार ने राज्य में फसली विविधीकरण को बढ़ावा देने और गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में खरीफ मक्का विविधीकरण योजना को अब 6 जिलों से बढ़ाकर 16 जिलों तक विस्तारित कर दिया गया है। इस योजना के तहत किसानों को धान की जगह मक्का की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 सीजन के लिए इस योजना का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 6 जिलों में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट को किसानों से अच्छा समर्थन मिला, जिसके बाद इसे बड़े स्तर पर लागू करने का फैसला लिया गया है।
इस योजना के तहत राज्य के 16 जिलों में लगभग 20,000 हेक्टेयर (50,000 एकड़) क्षेत्र को धान से हटाकर खरीफ मक्का के अंतर्गत लाने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹17,500 की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें ₹4,500 इनपुट लागत के बिल जमा करने पर और शेष ₹13,000 जियो-टैग्ड फसल सत्यापन के बाद दो किस्तों में दिए जाएंगे।
कृषि मंत्री ने बताया कि इस योजना के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है, जिसमें पंजीकरण से लेकर सत्यापन तक सब कुछ ऑनलाइन होगा। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और योग्य किसानों को समय पर सब्सिडी मिल सकेगी। इच्छुक किसान सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए धान-गेहूं का पारंपरिक चक्र अब टिकाऊ नहीं रहा है। ऐसे में मक्का जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है।
गुरमीत सिंह खुड्डियां ने किसानों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाएं और पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाएं। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को इस योजना के प्रति जागरूक करें।
सरकार का मानना है कि यह योजना न केवल जल संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।


