अम्बाला छावनी का “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” बनेगा राष्ट्रभक्ति का प्रेरणास्थल – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
यह स्मारक होगा देश का ऐतिहासिक और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित पहला स्मारक – मुख्यमंत्री
नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देगा अम्बाला छावनी का भव्य शहीद स्मारक- मुख्यमंत्री
1857 के गुमनाम वीरों की गौरवगाथा को जीवंत करेगा अम्बाला का शहीद स्मारक – अनिल विज
चण्डीगढ़, 21 मई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अम्बाला छावनी में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा को समर्पित “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” देशभक्ति, शौर्य और बलिदान का अद्भुत प्रतीक होगा। उन्होंने कहा कि यह स्मारक न केवल हमारी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का सशक्त केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी वीरवार को अम्बाला छावनी में निर्माणाधीन “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” का अवलोकन कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस स्मारक का कार्य अब अंतिम चरणों में है। इस अवसर पर हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, इतिहासकार, डिजाइन विशेषज्ञ तथा संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
वीर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देने हेतू समर्पित होगा स्मारक – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने स्मारक परिसर का विस्तृत निरीक्षण/अवलोकन करते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ऐतिहासिक प्रस्तुति एवं आधुनिक तकनीक के समावेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगा। उन्होंने कहा कि 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है और इस स्मारक के माध्यम से युवा पीढ़ी को देशभक्ति, त्याग और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री सैनी ने कहा कि हरियाणा की भूमि वीरों और बलिदानियों की धरती रही है तथा प्रदेश सरकार स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह स्मारक आधुनिक तकनीक, ऐतिहासिक तथ्यों और भव्य वास्तुकला का अद्भुत संगम होगा, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।
स्मारक में शेष कार्यों को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्मारक में शेष छोटे-मोटे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्मारक के प्रत्येक भाग में ऐतिहासिक तथ्यों की प्रमाणिकता और प्रस्तुति की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए, ताकि यहां आने वाले लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास का वास्तविक अनुभव प्राप्त हो सके।
शहीद स्मारक होगा देशभक्ति की भावना को जीवंत रखने वाला राष्ट्रीय चेतना केंद्र – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्मारक केवल एक भवन नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना को जीवंत रखने वाला राष्ट्रीय चेतना केंद्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में आजादी के अमृत काल के अंतर्गत स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं और “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा मंत्री द्वारा इस परियोजना के लिए किए प्रयासों की करी सराहना
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ऊर्जा मंत्री श्री अनिल विज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और विशेष रुचि के कारण यह स्मारक एक भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह स्मारक भविष्य में राष्ट्रीय गौरव का प्रमुख केंद्र बनेगा और देशभक्ति की भावना को और अधिक सशक्त करेगा।
अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री ने स्मारक को और अधिक भव्य बनाने के लिए सुझाव दीजिए जिन्हें जल्द अमल में लाया जाएगा
1857 की क्रांति पर आधारित यह स्मारक देश का अपनी तरह का पहला और ऐतिहासिक स्मारक- अनिल विज
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने आज “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री को स्मारक से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं, तकनीकी प्रबंधों एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1857 की क्रांति पर आधारित यह स्मारक देश का अपनी तरह का पहला और ऐतिहासिक स्मारक है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की विभिन्न वीर गाथाओं, युद्धों और बलिदानों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। श्री विज ने कहा कि स्मारक में 1857 के संग्राम से जुड़े गुमनाम (अनसंग) वीरों और क्रांतिकारियों के संघर्ष को विशेष रूप से दर्शाया गया है, ताकि देशवासियों को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया जा सके। यह स्मारक विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण ज्ञान केंद्र सिद्ध होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूलों, कॉलेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों को स्मारक भ्रमण हेतु प्राथमिकता दी जाए, ताकि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, देशभक्ति और बलिदान की अमूल्य विरासत के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी व ऊर्जा मंत्री श्री अनिल विज ने “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” में बनाई गई विभिन्न गैलरियों व ऑडिटोरियम में अवलोकन किया। ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने 1857 की क्रांति से जुडे एक लघु वृतचित्र को भी देखा और सराहा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री ने स्मारक के प्रांगण में रूद्राक्ष का पोधा भी लगाया ।
अवलोकन के दौरान लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अपूर्व कुमार सिंह, सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं कला विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ अमित अग्रवाल, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक श्री के. मकरंद पाण्डुरंग, शहीद स्मारक के निदेशक डॉ कुलदीप सैनी, वरिष्ठ इतिहासकार कपिल कुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
क्रमांक-2026
एमडीयू में पीजी समेत 100 पाठ्यक्रमों में दाखिले शुरू, 4000 सीटों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ
चंडीगढ़ , 21 मई – महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट्स तथा एमडीयू-सीपीएएस, गुरुग्राम में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातकोत्तर (पीजी), एलएलबी ऑनर्स तीन वर्षीय, बीपीएड, एम्प्लॉयबिलिटी एनहांसमेंट सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा, एम्प्लॉयबिलिटी एनहांसमेंट सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा, एमटेक प्रोग्राम्स, दो वर्षीय डीटीआईएसएल तथा डीआईएसएलआई पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय ने 100 पाठ्यक्रमों की करीब 4000 सीटों पर दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।
एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने शुक्रवार को कुलपति कार्यालय के कांफ्रेंस कक्ष में सत्र 2026-27 की प्रवेश विवरणिका (प्रॉस्पेक्ट्स) का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने बताया कि इन पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए विद्यार्थी 10 जून तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और दाखिले प्रवेश परीक्षा के आधार पर किए जाएंगे।
डीन, एकेडमिक एफेयर्स प्रो. ए.एस. मान ने सत्र 2026-27 के पीजी पाठ्यक्रमों की प्रवेश विवरणिका बारे जानकारी दी। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल, डीन, फैकल्टी ऑफ लाइफ़ साइंसेज प्रो मीनाक्षी वशिष्ठ, डीन ह्यूमैनिटीज प्रो. रणदीप राणा, निदेशक आईक्यूएसी प्रो. बी. नरसिम्हन, निदेशक सीडीओई प्रो. राजेश धनखड़, प्रो. केके शर्मा, प्रो. अनिल ओहलान, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी, शैक्षणिक शाखा के सहायक कुलसचिव तेजपाल, कुलपति कार्यालय के अधीक्षक खैराती लाल, कंप्यूटर सेंटर से यशपाल हुड्डा, मुकेश सेतिया उपस्थित रहे।
100 पाठ्यक्रमों में 4000 सीटें उपलब्ध
पीजी, एलएलबी ऑनर्स तीन वर्षीय, बीपीएड, सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा के 100 पाठ्यक्रमों की लगभग 4000 सीटों पर प्रवेश के लिए विद्यार्थी 10 जून तक विश्वविद्यालय वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एडमिशन प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा।
उल्लेखनीय है कि एमडीयू के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट्स में संचालित पाठ्यक्रमों- एमए-एजुकेशन में 30 सीटें, एमएड में 50 सीटें, एमपीएड में 40 सीटें, बीपीएड में 100 सीटें, एमए अंग्रेजी में 60 सीटें, एमए हिन्दी में 60 सीटें, एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार में 40 सीटें, एमए संस्कृत में 75 सीटें, एमए संगीत वोकल में 15 सीटें, एमए म्यूजिक इंस्ट्रूमेंटल सितार में 15 सीटें, एमए फाइन आर्ट्स ड्राइंग एंड पेंटिंग में 15 सीटें, एमए योगा साइंस में 50 सीटें, एमए डिफेंस एंड स्ट्रेटिजिक स्टडीज में 50 सीटें, एमए इकोनोमिक्स में 60 सीटें, एमए ज्योग्राफी में 50 सीटें, एमए हिस्ट्री में 70 सीटें, एम.लिब एंड इंफोर्मेशन साइंस में 45 सीटें, एमए. पॉलिटिकल साइंस में 60 सीटें, एमए साइकोलोजी में 40 सीटें, एमए लोक प्रशासन में 50 सीटें, एमए सोशियोलोजी में 50 सीटें, एमएससी फोरेंसिक साइंस में 25 सीटें, एलएलबीए आनर्स तीन वर्षीय में 120 सीटें, एलएलएम में 30 सीटें, एलएलएम एसएफएस में 60 सीटें उपलब्ध हैं।
एमएससी-बायोइंफोर्मेटिक्स में 20 सीटें, बायोटैक्नोलोजी में 20 सीटें, एग्रीकल्चर बायोटैक्नोलोजी में 20 सीटें, मेडिकल बायोटैक्नोलोजी में 30 सीटें, बायोकैमिस्ट्री में 40 सीटें, बॉटनी में 40 सीटें, एनवायरमेंटल साइंसेज में 35 सीटें, इनवायरमेंटल बायोटेक्नोलॉजी में 20 सीटें, फूड टैक्नोलोजी में 20 सीटें, जेनेटिक्स में 30 सीटें, माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी में 20 सीटें, माइक्रोबायोलोजी में 25 सीटें, जूलोजी में 40 सीटें, मास्टर ऑफ होटल मैनजमेंट एंड केटरिंग टेक्नोलोजी में 30 सीटें, मास्टर ऑफ टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट में 40 सीटें, एमबीए में 180 सीटें, एम.कॉम में 60 सीटें उपलब्ध हैं।
एम.फार्मेसी- इंडस्ट्रीयल फार्मेसी में 10 सीटें, फार्मास्यूटिकल कैमिस्ट्री में 15 सीटें, फार्माकोगनोसी में 10 सीटें, ड्रग रेगुलेटरी अफेयर्स में 10 सीटें, एमएससी कैमिस्ट्री में 90 सीटें, एमसीए में 60 सीटें, एमएससी-कंप्यूटर साइंस में 40 सीटें, एमएससी कंप्यूटर साइंस-डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग में 40 सीटें, एमटेक कंप्यूटर साइंस में 30 सीटें, एमएससी गणित में 60 सीटें, एमएससी गणित एफएफएस में 120 सीटें, एमएससी फिजिक्स में 60 सीटें, एमएससी स्टैटिसटिक्स में 50 सीटेंं, एमए हिन्दू स्टडीज में 30 सीटें, एमबीए बिजनेस साइकोलॉजी में 60 सीटें तथा एमए-गाइडेंस एंड काउंसलिंग में 30 सीटें उपलब्ध हैं।
एमटेक बायोटेक्नोलॉजी में 18 सीटें, एमटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 24 सीटें, एमटेक कंप्यूूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 30 सीटें, एमटेक (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग) में 24 सीटें, एमटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में 18 सीटें, एमटेक मैन्युफैक्चरिंग एंड ऑटोमेशन में 24 सीटें, एमटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 24 सीटें, एमटेक स्टै्रक्चरल इंजीनियरिंग में 24 सीटें, एमटेक पावर सिस्टम्स में 24 सीटें उपलब्ध हैं। वर्किंग प्रोफेशनल के लिए एमटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, पावर सिस्टम और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रत्येक में 15 सीटें उपलब्ध हैं।


