विकसित भारत 2047 के निर्माण में विश्वविद्यालय बनें राष्ट्रीय विकास के इंजन: अनुराग ठाकुर
चंडीगढ़: सांसद एवं संसदीय स्थायी समिति (कोयला, खान एवं इस्पात) के अध्यक्ष Anurag Singh Thakur ने कहा है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों से केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास और नवाचार के केंद्र बनने का आह्वान किया।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में आयोजित भारत उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने देश की विकास यात्रा को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की संज्ञा देते हुए कहा कि भारत आज रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।
सम्मेलन का आयोजन भारतीय निजी विश्वविद्यालय परिसंघ (CIPU) द्वारा “विकसित भारत 2047 की ओर – राष्ट्रीय विकास के इंजन के रूप में विश्वविद्यालय” विषय पर किया गया। इसमें देशभर से 150 से अधिक कुलाधिपति, कुलपति, शिक्षाविद, सरकारी अधिकारी और उद्योग जगत के विशेषज्ञ शामिल हुए।
अपने संबोधन में अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाइब्रेंसी रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत भी अब तेजी से विकास और नवाचार से जुड़ रहा है तथा नए उद्यमिता केंद्रों के रूप में उभर रहा है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश की शैक्षणिक संरचना में ऐतिहासिक विस्तार हुआ है। आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23 और आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। इसके साथ ही देश में विश्वविद्यालयों की संख्या में लगभग 59.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। वहीं वर्तमान में विचाराधीन विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक उच्च शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही और संरचनात्मक सुधारों को बढ़ावा देगा।
अनुराग ठाकुर ने देश के लगभग 557 निजी विश्वविद्यालयों की सराहना करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों की पहचान अनुकरण से नहीं, बल्कि नवाचार और शोध से होनी चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों के दौर में निजी विश्वविद्यालयों को परिवर्तन के वाहक बनते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।


