नाबालिग के लापता होने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा; पुलिस के बार-बार चक्कर लगाने के बाद अंगद दत्ता ने संभाला मामला, कानूनी टीम ने हाईकोर्ट का रुख किया
जालंधर, अगस्त 2026: नाबालिग बच्चे सतिंदर कुमार के लापता होने का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। परिवार द्वारा स्थानीय पुलिस से बार-बार संपर्क करने के बावजूद संतोषजनक प्रगति न होने के बाद मामला कानूनी स्तर पर आगे बढ़ाया गया।
हाईकोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, बच्चा 30 जून 2026 को लापता हुआ था। उसकी मां मंजू देवी ने पुलिस पोस्ट परागपुर, थाना कैंट, जालंधर में संपर्क किया, जिसके बाद FIR No. 111 दिनांक 30.06.2026, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 127(6) के तहत दर्ज की गई। याचिका में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों से बार-बार संपर्क करने के बावजूद नाबालिग का पता नहीं चल सका और परिवार को जांच में हुई किसी महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी नहीं दी गई।
पुलिस स्टेशन से हाईकोर्ट तक — अंगद दत्ता ने संभाला मामला
यूथ कांग्रेस जालंधर (अर्बन) के जिला अध्यक्ष अंगद दत्ता के अनुसार, परिवार ने शुरुआत में पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत पर कार्रवाई की मांग की, लेकिन शिकायत को उचित रूप से आगे बढ़ाने में उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा।
इसके बाद यूथ कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह भिंदा पुलिस स्टेशन पहुंचे और परिवार की शिकायत को आगे बढ़ाने में मदद की, जिसके बाद FIR दर्ज हुई।
हालांकि FIR दर्ज होने के बाद भी परिवार लगभग एक महीने तक लगातार पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाता रहा, ताकि लापता बच्चे को तलाशने के लिए प्रभावी कार्रवाई हो सके।
याचिका में भी दर्ज है कि FIR दर्ज होने के बाद मंजू देवी ने जांच अधिकारी और अन्य पुलिस अधिकारियों से बार-बार संपर्क किया, लेकिन उनका आरोप है कि बेटे को तलाशने के लिए कोई प्रभावी जांच या ठोस कदम नहीं उठाए गए।
अंगद दत्ता ने परिवार को चंडीगढ़ की कानूनी टीम से जोड़ा
परिवार द्वारा अंगद दत्ता से संपर्क किए जाने के बाद उन्होंने इस मामले को गंभीरता से उठाया और मान लॉ फर्म, चंडीगढ़ से संपर्क किया।
एडवोकेट दिलराज मान और एडवोकेट प्रभसिमरन मान ने परिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी, ताकि जांच को प्रभावी, तेज और उचित निगरानी के तहत कराया जा सके।
याचिका में प्रभावी एवं शीघ्र जांच के निर्देश देने तथा वैकल्पिक रूप से पुलिस कमिश्नर के समक्ष परिवार द्वारा दी गई शिकायत पर कार्रवाई करने की मांग की गई, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की अध्यक्षता में Special Investigation Team (SIT) गठित करने की मांग भी शामिल थी।
अंगद दत्ता: “लापता बच्चा सिर्फ एक फाइल बनकर नहीं रह सकता”
अंगद दत्ता ने कहा:
“जब परिवार पुलिस के बार-बार चक्कर लगाने के बाद हमारे पास आया, तब हमारे लिए यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं था—यह एक लापता बच्चे और उसके परिवार की पीड़ा का मामला था। एक मां को कई हफ्तों तक पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाकर यह सोचने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए कि उसके बच्चे को तलाशने के लिए गंभीर प्रयास हो रहे हैं या नहीं। मैंने तुरंत यह मामला उठाया और चंडीगढ़ में अपनी कानूनी टीम से संपर्क किया, ताकि परिवार को उचित कानूनी सहायता मिल सके और मामला माननीय हाईकोर्ट के समक्ष रखा जा सके।”
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे को सुरक्षित तलाशने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए और परिवार को जांच की प्रगति के बारे में उचित जानकारी दी जाए।
प्रभावी जांच के लिए अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया
कानूनी टीम ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि मामला एक नाबालिग के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा है और जांच में देरी से बच्चे की सुरक्षित बरामदगी की संभावना प्रभावित हो सकती है।
याचिका में CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने, महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ, सर्च टीमों के गठन तथा पड़ोसी जिलों और विशेष एजेंसियों के साथ समन्वय जैसे कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
एडवोकेट दिलराज मान और एडवोकेट प्रभसिमरन मान ने कहा:
“हाईकोर्ट जाने का उद्देश्य जांच में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जांच प्रभावी, शीघ्र और इस तथ्य के प्रति संवेदनशील हो कि लापता व्यक्ति एक नाबालिग बच्चा है। उसे तलाशने के लिए कानून के तहत हर संभव जांच प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।”
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब
इस मामले की सुनवाई 12 अगस्त 2026 को CRM-M-44369-2026, मंजू देवी बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य में हुई।
माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को याचिका में लगाए गए तथ्यों के संबंध में Respondent No. 3 का संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 के लिए स्थगित कर दी।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट प्रभसिमरन सिंह और एडवोकेट दिलराज सिंह, साथ में एडवोकेट साहिल कौल पेश हुए।
अंगद दत्ता: “हम परिवार के साथ खड़े रहेंगे”
अंगद दत्ता ने कहा:
“हमारी एक ही मांग है कि बच्चे को तलाशकर सुरक्षित उसके परिवार के पास वापस लाया जाए। हम परिवार के साथ खड़े रहेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी चिंताओं को कानूनी एवं संवैधानिक माध्यम से उचित अधिकारियों के समक्ष रखा जाए।”
परिवार और कानूनी टीम अब 24 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तथा पंजाब सरकार के हलफनामे का इंतजार कर रही है।


